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तालिबानी हमले से कांपी पाकिस्तानी सेना... आर्मी के 12 जवान ढेर, 5 ने किया आत्मसमर्पण, टैंक-चौकियों पर अफगान बलों का कब्जा

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद अब हिंसक झड़पों में बदल गया है. 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने टीटीपी चीफ नूर वली मेहसूद को निशाना बनाते हुए अफगान शहरों पर हवाई हमले किए, जिसके बाद तनाव बढ़ गया. अफगानिस्तान ने इसे सीधा हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई की और दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गईं.

Source: Social Media
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अब खुली झड़पों में बदल चुका है. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं. दरअसल, बीते दिनों में हुए हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र की शांति को हिला दिया है. इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता की लहर है, क्योंकि यह संघर्ष न केवल दो देशों के बीच बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है.

क्यों शुरू हुआ दोनों देशों के बीच तनाव?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की शुरुआत खुलकर तब हुआ जब पाकिस्तान ने 9 अक्टूबर की रात अफगानिस्तान के चार प्रमुख शहरों काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में हवाई हमले किए. ये हवाई हमले टीटीपी चीफ नूर वली मेहसूद  निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया था. पाकिस्तान का कहना है कि यह हमला उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी था, क्योंकि टीटीपी उसके खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रही थी. इन हमलों के दौरान रात का सन्नाटा गोलियों और विस्फोटों की आवाज़ों में बदल गया. स्थानीय लोगों ने बताया कि कई इलाकों में जोरदार धमाके हुए और कई घरों को नुकसान पहुंचा. हालांकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अफगानिस्तान ने इसे सीधा हमला मानते हुए इसे युद्ध की शुरुआत बताया था.

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अफगानिस्तान का पलटवार

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पाकिस्तानी हमलों के दो दिन बाद अफगानिस्तान की सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू की. 11 अक्टूबर की रात, अफगानिस्तान की 201 खालिद बिन वलीद आर्मी कोर ने नंगरहार और कुनार प्रांतों में डुरंड लाइन के पास स्थित पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला कर दिया. अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अफगान सेनाओं ने कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया है. टोलो न्यूज के अनुसार, अफगान बलों ने कुनार और हेलमंद प्रांतों में एक-एक पाकिस्तानी चौकी को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. वहीं पक्तिया प्रांत के आरयूब जाजी इलाके में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच लगातार गोलीबारी की खबरें हैं.

12 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत

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अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि इन झड़पों में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है. हेलमंड के बहरम चाह जिले में हुई लड़ाई में 12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और एक बख्तरबंद टैंक अफगान बलों ने कब्जे में ले लिया. वहीं, कंधार के मायवंद जिले से खबर है कि पांच पाकिस्तानी सैनिकों ने तालिबान बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. तालिबान के मुताबिक, यह पाकिस्तान की अनुचित आक्रामकता का नतीजा है. दूसरी ओर, पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि उनकी सेना ने भी अफगान चौकियों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया है और कई अफगान सैनिक मारे गए हैं. फ़िलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह फिलहाल साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं.

कतर ने जताई चिंता

सीमा पर बढ़ते संघर्ष ने अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चिंतित कर दिया है. कतर के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हिंसा में बढ़ोतरी से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है. कतर ने दोनों देशों से अपील की कि वे संयम बरतें, बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दें और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजें. बयान में कहा गया कि कतर उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं. कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान, दोनों देशों की जनता की भलाई और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है.

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क्या है टीटीपी और सीमा विवाद?

दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से डुरंड लाइन को लेकर विवाद रहा है. यह सीमा ब्रिटिश काल में खींची गई थी, जिसे अफगानिस्तान अब तक आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करता. इसके अलावा, पाकिस्तान पर यह आरोप भी लगता रहा है कि उसने तालिबान को पहले समर्थन दिया था, लेकिन अब वही तालिबान उसके खिलाफ हो गया है. पाकिस्तान के मुताबिक, टीटीपी के आतंकी अफगान सीमा से पाकिस्तान में घुसपैठ कर हमले करते हैं, जबकि अफगानिस्तान इसे पाकिस्तान की नाकामी बताता है. यही मुद्दा अब दोनों देशों के बीच बड़े संघर्ष में तब्दील होता जा रहा है.

तालिबान की सख्त चेतावनी

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तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी हमलों के बाद बेहद कड़ा बयान जारी किया है. अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 'हमने 12 बजे रात तक जवाबी कार्रवाई की, लेकिन अगर पाकिस्तान ने दोबारा हमारे क्षेत्रीय अधिकार का उल्लंघन किया, तो हम मजबूर होकर और कठोर जवाब देंगे.' तालिबान ने यह भी कहा कि अफगान सेनाएं अपने देश की हवाई सीमा और सीमावर्ती इलाकों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि संघर्ष फिलहाल थमने वाला नहीं है.

क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे की घंटी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी यह संघर्ष सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है. चीन, ईरान और भारत जैसे देशों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि इन सभी का हित इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने में निहित है. जानकारों का कहना है कि यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो सीमा पर एक बार फिर आतंकवादी संगठनों को सक्रिय होने का मौका मिल सकता है. ऐसे में यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है.

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बताते चलें कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. यहां उन्होंने पाकिस्तान के हवाई हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अफगानों के साहस की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए. मुत्तकी ने स्पष्ट किया कि तालिबान भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन यह रिश्ता एकतरफा नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो अफगानों की ताकत पर शक करता है, उसे सोवियत संघ, अमेरिका और नाटो से सबक लेना चाहिए, क्योंकि अफगानिस्तान को दबाना आसान नहीं.

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