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‘भारत को खोना अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी भूल’ टैरिफ पर भड़का ट्रंप समर्थक, दी बड़ी चेतावनी

ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर उनके सहयोगी भी उनसे किनारा कर रहे हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के बाद अब ट्रंप के समर्थक भी उन्हें खरी-खरी सुना रहे हैं. ट्रंप के शुभचिंतकों ने चेताया है कि भारत को निशाना बनाने का नतीजा गंभीर हो सकता है.

सोशल मीडिया
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’Make America Great Again’ का नारा देने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुहिम अब उल्टी पड़ रही है. जिससे अमेरिकी ग्रेट नहीं ठगा सा महसूस कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ दर का विरोध अब अमेरिका में भी होने लगा है. ट्रंप खुद अपने ही देश के लोगों की निशाने पर हैं. ट्रंप के शुभचिंतक ही उन्हें आईना दिखा रहे हैं. इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर भी ट्रंप के खिलाफ अच्छा खासा माहौल बना हुआ है. लोगों ने चेताया कि भारत पर ट्रंप का रुख अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी भूल साबित होगी. 

खुदको ट्रंप का फ़ैन बताने वाले अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर और बिजनेसमैन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें वह ट्रंप के भारत पर भारी भरकम टैरिफ़ लगाने के फैसले को सबसे बड़ी गलती करार देते हुए बड़ी चेतावनी दे दी. साथ ही बताया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था में भारतीयों का कितना प्रभाव है. 

 

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वीडियो में दिख रहे शख़्स का नाम नीमा यामिनी हैं. जो एक अमेरिकी बिजनेसमैन, इनवेस्टर और कंटेंट क्रिएटर हैं. नीमा सोशल मीडिया पर वित्तीय सुझावों के लिए जाने जाते हैं और उनके 2 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं.

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‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र’

वीडियो में नीमा यामिनी कहते दिखे कि, ‘हम भारत को 4 लाख 22 हज़ार वीज़ा क्यों दे रहे हैं? जबकि वे साम्यवादी रूस से तेल खरीदते हैं और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से नज़दीकी रखते हैं. क्या हम कोई बेवकूफ़ देश हैं? लोग शायद भूल जाते हैं कि भारत साम्यवादी चीन नहीं है, है ना? भारत वास्तव में दुनिया का नंबर वन सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यहीं संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी सफल इंजीनियर हैं, टेक इंडस्ट्री के सीईओ हैं’. इस दौरान ट्रंप समर्थक ने भारतीय मूल के टेक टाइकून के नाम की लिस्ट भी दिखाई.  

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तो क्या मोदी के असली दोस्त हैं ट्रंप?

ट्रंप समर्थक ने कहा, इनमें से बहुत से डॉक्टर हैं, अस्पतालों में काम करते हैं और हमारी यूनिवर्सिटीज़ में सफल हैं. वे अमेरिका को उसकी बेहतरीन उपलब्धियों तक पहुंचने में मदद करते हैं, है ना? लेकिन ट्रंप सही थे. भारत हमें अरबों का माल बेचता है, हमारे निर्यात को रोकता है और आसमान छूती टैरिफ़ लगाकर हमें लूटता है और फिर रूस जैसे साम्यवादी देश से खरीद करता है. तो क्या यह असल में दोस्ती है? यह तो एकतरफ़ा सौदा है तो फिर हम कैसे झुकें? यहां असली डरावना सपना यही है. अगर हम अमेरिका में भारत को दूर धकेलते हैं और वे सचमुच चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और रूस के साथ जुड़ जाते हैं. तो बस, सब ख़त्म. 

'भारत को खोना सबसे बड़ी गलती’

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नीमा यामिनी ने कहा कि, भारत को खोना पिछले कई दशकों में अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी गलती होगी. एक ऐसी गलती जो दुनिया की व्यवस्था को इतना बदल देगी कि अमेरिका फिर कभी महाशक्ति नहीं रह पाएगा. यह सवाल नरम होने का नहीं है, यह सवाल समझदार होने का है. एक अमेरिकी के तौर पर, जो राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन करता है, मैं उन्हें संदेह का लाभ देता हूँ कि शायद मैं कुछ मिस कर रहा हूं. मैं चाहता हूँ कि राष्ट्रपति ट्रंप इस पर सही फ़ैसला लें, क्योंकि अमेरिका तभी सुरक्षित है जब भारत हमारे साथ है, हमारे खिलाफ नहीं. घड़ी टिक-टिक कर रही है. 

ट्रंप के पूर्व सहयोगी जॉन बोल्टन क्यों भड़के? 

ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर उनके सहयोगी भी उनसे किनारा कर रहे हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भारत-अमेरिका संबंधों पर डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा, डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध थे लेकिन अब वह ख़त्म हो गए हैं. यह सभी के लिए सबक़ है कि अच्छा निजी रिश्ता कभी-कभी मदद कर सकता है लेकिन यह आपको सबसे बुरे नतीजों से नहीं बचा सकता. 

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(Photo- जॉन बोल्टन)

‘ट्रंप ने बिगाड़े भारत-अमेरिका के रिश्ते’

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जॉन बोल्टन ने कहा, मोदी की चीन में मौजूदगी मुझे पूरी तरह से ट्रंप के कारण लगती है. पिछले कई महीनों में ट्रंप ने भारत के साथ जिस तरह का व्यवहार किया है, उसने दशकों की मेहनत को पीछे धकेल दिया है.

भारत पर अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जॉन बोल्टन

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जॉन बोल्टन ट्रंप के क़रीबी रहे हैं. वे ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यरत थे. यह पहली बार नहीं है जब बोल्टन ने भारत पर लगाए अमेरिकी टैरिफ़ को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की हो. इससे पहले बोल्टन ने कहा था कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंध भारत को उसका तेल ख़रीदने से नहीं रोक सकते. पहले भी उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत को निशाना बना रहा है. बोल्टन ने कहा था कि, रूस पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. चीन पर भी कोई नया प्रतिबंध नहीं लगा, जबकि वही रूस से तेल और गैस का सबसे बड़ा ख़रीदार रहा है, लेकिन भारत को अलग करके निशाना बनाया गया है. 

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