Advertisement
Loading Ad...
समुद्र में चीन को घेरनी की रणनीति तैयार, भारत का दिखेगा जलवा
हिंद महासागर से जुड़े अफ्रीकी देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए पहली बार भारतीय नौसेना, अफ्रीका के दस देशों के साथ साझा मेरीटाइम एक्सरसाइज करने जा रही है.
Advertisement
Loading Ad...
भारतीय सेना अपने दमख़म और पराक्रम से दुश्मनों को धूल चटाना अच्छे से जानती है। दुनिया में सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक भारत की सेना के आगे टिक पाना दुश्मनों के लिए नामुमकिन है। अपने दमख़म को दिखाने और अपने मित्र देशों की सेनाओं के साथ समय समय पर उनका दिल जीतने के लिए अभ्यास भी करती है।जिसे देखकर दुश्मनों का भी कलेजा कांप जाता है। इसी कड़ी में हिंद महासागर से जुड़े अफ्रीकी देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए और उसे काउंटर करने के लिए पहली बार भारतीय नौसेना, अफ्रीका के दस देशों के साथ साझा मेरीटाइम एक्सरसाइज करने जा रही है अगले महीने (13-18 अप्रैल) के बीच ये ऐकेमी होगी ऐकेमी यानी अफ्रीका इंडिया की मेरीटाइम इंगेजमेंट (एआईकेईवाईएमई) को भारतीय नौसेना, अफ्रीकी देशों के साथ समुद्री-सुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर रही है. इस एक्सरसाइज में भारत के अलावा दस अफ्रीकी देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी।संस्कृत के शब्द ऐकेमी का अर्थ होता है एकता। इस एक्सरसाइज के उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहेंगे।
चीन का बढ़ता प्रभाव समंदर में कर किसी के लिए चुनौती से कम नहीं है।ऐसे में चीन से चल रहे सीमा विवाद के बीच भारत का इस एक्सरसाइज में शामिल होना एक बड़ी बात है। एक्सरसाइज में कोमोरोस, जिबूती, इरिट्रिया, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स और साउथ अफ्रीका की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी। खास बात ये है कि जिबूती में चीन ने अपना पहला विदेशी नेवल बेस स्थापित किया है। जिबूती में अमेरिका के बाद चीन, दूसरा ऐसा देश है जिसकी नौसेना ने अपना बेस बनाया है। ऐकेमी एक्सरसाइज की कर्टन रेजर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ, वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने बताया कि ।
पहले संस्करण में पश्चिमी अफ्रीका के उन देशों को शामिल किया गया है जिनके तट हिंद महासागर से सटे हुए हैं। दो साल में एक बार होने वाली इस एक्सरसाइज में अगले संस्करणों में पूरे अफ्रीका महाद्वीप के देशों की नौसेनाओं को शामिल करने की कोशिश की जाएगी।
अफ्रीका से सटे हिंद महासागर क्षेत्र की बात करें तो ये समुद्री डकैतों के घिरा रहा है ऐसे में एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच समुद्री-व्यापार में दिक़्क़तें आती हैं। साथ ही ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और गैर-कानूनी फिशिंग जैसी गतिविधियां भी देखने को सामने आती हैं। इस पर क़ाबू पाने के लिए इस क्षेत्र में नौसेनाओं का मज़बूत होना बेहद जरूरी है।
Advertisement
Loading Ad...
यह भी पढ़ें
Loading Ad...
Loading Ad...