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रूस तो बहाना, भारत असली निशाना! नोबेल नहीं मिला तो दिखी मानसिकता, 500% टैरिफ ठोक पैसे की तंगी दूर करेंगे ट्रंप?

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में नाकामी के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त रुख अपनाया है. ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दी है, जिससे भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ 500फ फ़ीसदी तक बढ़ सकते हैं.

Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही यह कहते रहे हों कि उन्होंने दुनिया के कई देशों के बीच चल रहे युद्धों को खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में उन्हें अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है. इसके साथ ही नोबेल शांति पुरस्कार ना मिलने से भी ट्रंप बौखला गए थे. इसी नाकामी की झुंझलाहट अब वह दूसरे देशों पर निकालते नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि ट्रंप ने एक बार फिर अपनी असफल कोशिशों का ठीकरा भारत पर फोड़ने के संकेत दिए हैं.

दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसे सख्त बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी. इस फैसले के बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 500 फीसदी तक पहुंच सकती है. माना जा रहा है कि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है, लेकिन इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं.

कुछ दिनों में हो सकती है वोटिंग 

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अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमति जता दी है. ग्राहम के मुताबिक, ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात सकारात्मक रही और अब इस प्रस्ताव पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग कराई जा सकती है. माना जा रहा है कि अगर बिल पास होता है, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर दिखाई देगा.

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भारत समेत चीन और ब्राज़ील पर भी दबाव बनाने की कोशिश 

यह प्रस्तावित बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की साझा पहल है. बिल के तहत उन देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का प्रावधान रखा गया है, जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम जैसी अहम चीजों की खरीद जारी रखे हुए हैं. अमेरिका का तर्क है कि इससे रूस को युद्ध चलाने के लिए आर्थिक मदद मिलती है. सीनेटर ग्राहम का कहना है कि इस कानून के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने का मजबूत हथियार मिलेगा, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदने से पीछे हटें. वहीं, अमेरिका चीन के बीच भी टैक्स को लेकर दबाव बढ़ा चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया. गौरतलब है कि पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था. इसके अलावा रूस से तेल खरीदने को लेकर भी 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाया गया था. नतीजतन कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तल्खी देखने को मिली.

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ट्रंप ने भारत को लेकर दिया था चेतवानी भरा बयान 

जानकारी देते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैक्स लगाने के संकेत देकर हलचल बढ़ा दी है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात से वाकिफ थे कि वह उनसे नाराज हैं. ट्रंप ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएम मोदी भले ही अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्हें खुश रखना भी जरूरी था. उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी कि अमेरिका बहुत जल्द टैक्स बढ़ाने का फैसला कर सकता है. इतना ही नहीं, पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बयान उस वक्त सामने आया था, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचकर अमेरिकी बाजार को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था. इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन व्यापार के मुद्दे पर भारत पर लगातार दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है.

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बताते चलें कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर जारी वार्ता इस समय ठहराव की स्थिति में है. अमेरिका की मांग है कि भारत, अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगाए गए शुल्क में कटौती करे. वहीं भारत सरकार ने दो टूक रुख अपनाते हुए साफ किया है कि किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों की कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

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