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रूस-चीन भी पस्त, दुनिया में बढ़ी भारत के हथियारों की डिमांड

भारत ने दुनिया के 20 देशों में अपने डिप्लोमैट भेजे दिए हैं…ख़ास प्लान पर काम करने अलग देशों में गए ये डिप्लोमैट अपने प्लान में सक्सेसफुल हो जाते हैं तो भारत को फिर कोई रोकने वाला नहीं होगा

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दुनिया में अलग अलग तरह की जंग के बीच भारत अपनी शानदार रणनीति के तहत काम करने में लगा है. दुनिया में जहां उथल पुथल का दौर जारी है. वहीं भारत अपने एक्शन प्लान पर काम कर रहा है.और इसी कड़ी में रणनीतिक चाल चलते हुए भारत ने दुनिया के 20 देशों में अपने डिप्लोमैट भेजे दिए हैं.ख़ास प्लान पर काम करने अलग देशों में गए ये डिप्लोमैट अपने प्लान में सक्सेसफुल हो जाते हैं तो भारत को फिर कोई रोकने वाला नहीं होगा. दरअसल, पिछले तीन सालों से ज़्यादा से चल रही रूस - यूक्रेन जंग की वजह से काफ़ी तबाही हो चुकी है. इस जंग में ज़्यादा नुक़सान यूक्रेन का हुआ है वहीं रूस में कम तबाही नहीं हुई लेकिन इस बीच दुनिया में कई देश जो हथियारों के लिए रूस पर निर्भर थे उन्हें कोई और देश चाहिए जो उनकी हथियारों की कमी को पूरा करे. हालांकि भारत भी रूस से कई बड़े हथियार ख़रीदता है लेकिन इस जंग के लिए रूस को भी हथियारों की ज़रूरत है. और वैसे भी भारतीय सरकार पिछले कुछ सालों में सरकार हथियारों के निर्यात पर भी जोर दे रही है. इसके लिए भारत एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के ज़रिए हथियार खरीदने के लिए कर्ज दे रहा है ये उन देशों के लिए है जो हथियार को ख़रीदना चाहता हैं लेकिन उनके पास ज़्यादा पैसे नहीं है. इसका सबसे बड़ा फ़ायदा भारत को ही है कि भारत को क़र्ज़ दिया हुए पैसे तो वापस मिल ही जाएंगे साथ ही उन देशों में भारत के हथियार भी पहुंच जाएंगे.इसके अलावा इसका फायदा उन देशों को मिलेगा जो राजनीतिक अस्थिरता या कम क्रेडिट रेटिंग की वजह से महंगे कर्ज नहीं उठा पाते. 


भारत ने अपने प्लान के तहत ब्राजील-अर्जेंटीना समेत 20 देशों में अपने डिप्लोमैट भेजे हैं. जिससे रूस और यूक्रेन पर निर्भर अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के देशों के पास भारत हथियारों के लिए एक विल्कप बनकर सामने आए..भारत ने इसी जंग का फ़ायदा लेने की कोशिश की है और ऐेसे देशों से संपर्क बढ़ाया है. खास बात यह है कि भारत पश्चिमी और रूसी दोनों तरह के हथियारों का इस्तेमाल करता रहा है। भारत के पास दोनों तरह की हथियार टेक्नोलॉजी का अनुभव है ऐसे में भारत इन देशों की रक्षा जरूरतों को समझ सकता है. 

भारत के ज्यादातर बैंक हथियारों की बिक्री के लिए लोन देने में आनाकानी करते हैं। खासकर ऐसे देशों के साथ भारतीय बैंक सौदा नहीं करना चाहते जहां राजनीतिक जोखिम ज्यादा है। लिहाजा EXIM को डिजाइन किया गया है. 

जानकार बताते हैं कि इसी आनाकानी की वजह से भारत को चीन, फ़्रांस जैसे देशों से पीछे होना पड़ा है क्योंकि ये देश हथियार खरीदने के लिए भारी भरकम लोन भी देते हैं। लिहाजा भारत भी अब लोन देकर हथियार बेचने के बाजार में आ गया है . 

भारत बड़े स्तर पर ऐसे देशों के लिए सप्लायर बनने की कोशिश में लगा है..कई देश ऐसे हैं जो अपनी रक्षा के लिए ज़्यादा से ज़्यादा हथियार चाहते हैं और उन्हें भारतीय हथियारों में दिलचस्पी भी है लेकिन वो पैसे की कमी के कारण हथियार नहीं ले सकते ऐसे में भारत उन देशों के लिए सबसे बड़ी ढाल बनकर सामने आ गया है. 
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