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चीन की सेना में बगावत! ढीली पड़ रही जिनपिंग की पकड़... नेवी चीफ और न्यूक्लियर साइंटिस्ट को किया बर्खास्त

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सबसे ताकतवर सैन्य इकाई सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) में बड़ा फेरबदल किया है. पीएलए के वरिष्ठ अधिकारी एडमिरल मियाओ हुआ को उनके पद से हटा दिया गया है. मियाओ CMC के 'राजनीतिक कार्य विभाग' के प्रमुख थे. इस कदम से राजनीतिक हलकों में हलचल है और अटकलें तेज हैं कि क्या पार्टी या सेना के भीतर शी जिनपिंग के खिलाफ असंतोष पनप रहा है.

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) में बड़ा उलटफेर कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. इस फैसले के बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या शी जिनपिंग के खिलाफ पार्टी या सैन्य स्तर पर कोई बगावत आकार ले रही है?

सबसे बड़ा झटका पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को लगा है, जहां सेना के सबसे सीनियर अधिकारियों में से एक एडमिरल मियाओ हुआ को उनके पद से हटा दिया गया है. मियाओ CMC के 'राजनीतिक कार्य विभाग' के प्रमुख थे. यह विभाग सेना के भीतर विचारधारा, राजनीतिक निष्ठा और अनुशासन की निगरानी करता है. यानी मियाओ पर सेना की नीतिगत निष्ठा और नेतृत्व की स्थिरता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी. इसके अलावा चीन के राष्ट्रीय परमाणु निगम के डिप्टी चीफ इंजीनियर लियू शिपेंग को भी देश की संसद नेशनल पीपल्स कांग्रेस (NPC) से बाहर कर दिया गया है. ये दोनों घटनाएं ऐसे समय पर सामने आई हैं जब साउथ चाइना सी में चीन अपनी सैन्य तैनाती को लगातार आक्रामक बना रहा है.

शी जिनपिंग को 'अपनी टीम' पर गहराया संदेह
चीन की राजनीति और सेना में इन दिनों असाधारण उथल-पुथल देखने को मिल रही है. हाल ही में चीनी सेना की शीर्ष संस्था CMC (सेंट्रल मिलिट्री कमीशन) से एडमिरल मियाओ हुआ को बर्खास्त कर दिया गया है. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मियाओ को ‘अनुशासन के गंभीर उल्लंघन’ के आरोपों में पहले ही निलंबित किया गया था और अप्रैल 2025 में उन्हें नेशनल पीपल्स कांग्रेस (NPC) से भी बाहर कर दिया गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन जब 'गंभीर उल्लंघन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो उसका सीधा संकेत भ्रष्टाचार की ओर होता है. यह घटना 1960 के बाद से किसी CMC अधिकारी के खिलाफ की गई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. जानकारी देते चले कि मियाओ CMC के ‘राजनीतिक कार्य विभाग’ के प्रमुख थे और उन्हें व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विश्वासपात्र माना जाता था. यही नहीं, मियाओ शी के कार्यकाल में हटाए गए आठवें CMC सदस्य हैं. सभी वे अधिकारी जिन्हें शी ने खुद चुना था. यही कारण है कि अब चीन की सत्ता के गलियारों में यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या शी जिनपिंग अपनी टीम के लिए सही लोगों का चयन कर पा रहे हैं?

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जिनपिंग की टीम में पड़ी फूट? 
चीन की सेना और राजनीतिक नेतृत्व में हाल के दिनों में जिस तरह से शीर्ष स्तर पर बदलाव हो रहे हैं, उसने शी जिनपिंग की टीम में मतभेद और अविश्वास की अटकलों को हवा दे दी है। भले ही चीनी नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थिरता और शक्ति की छवि पेश कर रहा हो, लेकिन हकीकत में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर असंतोष और अनिश्चितता गहराती दिख रही है।

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अमेरिका-चीन सैन्य संवाद और कमजोर पड़ता भरोसा
अमेरिका और चीन के बीच सैन्य संवाद पहले से ही सीमित है. ऐसे में चीनी सेना के भीतर लगातार बदलते चेहरे इस कूटनीतिक संवाद को और भी कमजोर बना सकते हैं, खासकर ताइवान स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाकों में. हाल ही में अमेरिकी रक्षा अधिकारी शंघाई में बातचीत के लिए पहुंचे थे, लेकिन किसी भी उच्चस्तरीय बैठक की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई. इतना ही नहीं, सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग में भी चीन ने सिर्फ जूनियर प्रतिनिधिमंडल भेजकर संकेत दे दिया कि बीजिंग फिलहाल रक्षात्मक मुद्रा में है.

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दो रक्षा मंत्री और रॉकेट फोर्स प्रमुख हटे
बताते चलें कि पिछले दो वर्षों में चीन के दो रक्षा मंत्री, PLA की रॉकेट फोर्स के दो प्रमुख, और कई रक्षा उद्योगों से जुड़े बड़े अधिकारी अपने पदों से हटाए जा चुके हैं. इन सभी बदलावों को लेकर बताया जा रहा है कि ये कार्रवाइयां सैन्य उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं. खास बात यह है कि बर्खास्त रक्षा मंत्री ली शांगफू खुद भी पहले सेना के इक्विपमेंट प्रोक्योरमेंट डिपार्टमेंट के प्रमुख रह चुके हैं, और उन पर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे.

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