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'पुतिन फिर से ट्रंप को बेवकूफ बना देंगे...' अलास्का मीटिंग से यूक्रेनियों को नहीं है कोई उम्मीद, बताया कब तक चलेगी जंग

रूस-यूक्रेन के जंग के बीच यूक्रेनी लोगों को लगता है कि अलास्का में होने वाली मीटिंग से कोई फायदा नहीं है. लोग कह रहे हैं कि पुतिन एक बार फिर ट्रंप को मुर्ख बना देंगे. ये युद्ध तब तक चलता रहेगा जब तक यूक्रेन या रूस, दोनों में से किसी एक का अस्तित्व रहेगा.

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14 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:25 AM )
'पुतिन फिर से ट्रंप को बेवकूफ बना देंगे...' अलास्का मीटिंग से यूक्रेनियों को नहीं है कोई उम्मीद, बताया कब तक चलेगी जंग
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रूस-यूक्रेन के बीच की जंग पूरी दुनिया के लिए संघर्ष बना हुआ है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मंचो से कह चुके है कि वो इसे रूकवा देंगे. लेकिन उनके इन दावों के बीच एक यूक्रेनी महिला इरीना ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि 'युद्ध तब तक चलता रहेगा जब तक यूक्रेन या रूस, दोनों में से किसी एक का अस्तित्व रहेगा.’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध सुलझाने को लेकर 15 अगस्त, शुक्रवार को अलास्का में शिखर वार्ता करने वाले हैं. लेकिन इरीना के साथ-साथ यूक्रेन के बहुत से लोगों इस बात को मानते है. इनका कहना है कि इस मुलाकात से कोई उम्मीद नहीं है. उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप-पुतिन की मुलाकात से युद्ध का कोई स्थायी हल निकलेगा.

‘ट्रंप-पुतिन मिलकर कोई चमत्कार नहीं करने जा रहे हैं’ 

युद्ध में घायल हुए यूक्रेनी सैनिक टारस भी मानते हैं कि ट्रंप-पुतिन मिलकर कोई चमत्कार नहीं करने जा रहे हैं. कतर के सरकारी ब्रॉडकास्टर अलजजीरा से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मुलाकात से कोई चमत्कार नहीं होने वाला है, कोई शांति समझौता नहीं होने वाला है. मुलाकात के दौरान पुतिन ट्रंप को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करेंगे कि यूक्रेन ही है जो शांति नहीं चाहता है जिस कारण युद्धविराम नहीं हो पा रहा है.' 

टारस ने तीन साल से अधिक समय फ्रंट लाइन पर रूसी सैनिकों से लड़ते हुए बिताया है. वो कहते हैं कि हाल ही में विस्फोटकों से लदे एक रूसी ड्रोन ने उन पर हमला किया और उन्हें घायल कर दिया. हालांकि, घायल होते हुए भी उन्होंने ड्रोन को उन्होंने मार गिराया था.

टारस ने आगे कहा कि पुतिन, ट्रंप को धोखा देने के लिए यह बैठक कर रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप खुद को शांतिदूत मानते हैं और पुतिन उनकी इस सेल्फ इमेज को खुश करना चाहते हैं ताकि ट्रंप खुश होकर रूस पर और अधिक आर्थिक प्रतिबंध न लगाएं. पुतिन ट्रंप को खुश कर पूर्वी यूक्रेन में बड़ी सैन्य सफलता भी हासिल करने की फिराक में हैं. 

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टारस कहते हैं, 'पुतिन को यकीन है कि वो इस सर्दी तक, कुछ बड़ा हासिल कर लेंगे या फिर उनके सैनिक हमारे फ्रंट लाइन को नाकाम कर देंगे और यूक्रेन पर अपनी शर्तें थोपेंगे.' 

‘ट्रंप को फिर से मूर्ख बना देंगे पुतिन…’

जर्मनी के ब्रेमेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता निकोले मित्रोखिन कहते हैं, 'पुतिन के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वो ट्रंप के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत करें. मुझे लगता है कि दोनों के बीच समझौता हवाई हमलों को रोकने के समझौते तक सीमित रहेगा, और पुतिन को जमीनी ऑपरेशन को अंतिम रूप देने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा- यानी इन तीन महीनों में वो पूरे दोनेस्त्क क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे.' 
मित्रोखिन ने कहा, 'बैठक में पुतिन निश्चित रूप से ट्रंप को मूर्ख बना देंगे और सब कुछ फिर से शुरू हो जाएगा.'

यहां मीटिंग वहां यूक्रेन में आगे बढ़ रहा रूस 

ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि आगामी अलास्का शिखर सम्मेलन, युद्ध-विराम सुनिश्चित करने के लिए दिशा में एक बड़ा कदम होगा. लेकिन यूक्रेन के नागरिक, सैनिक और विशेषज्ञ, अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों की बीच बैठक के नतीजों को लेकर ज्यादा आशावादी नहीं हैं. इसका एक कारण पूर्वी यूक्रेन की जमीनी हकीकत भी है. इस महीने की शुरुआत में, रूस ने दक्षिण-पूर्वी डोनेट्स्क क्षेत्र में प्रमुख पदों पर कब्ज़ा करने की अपनी कोशिश तेज़ कर दी है. रूस ने अपने हजारों सैनिकों को यूक्रेनी पदों पर घुसने के लिए लगभाग "आत्मघाती मिशन" पर भेजने का आदेश दिया है. रूस ड्रोन से यूक्रेनी ठिकानों की 24x7 निगरानी भी कर रहा है.

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पिछले 3 महीने में रूसी सेना ने यूक्रेन के लगभाग 1,500 वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, जिसमें से ज्यादा तार डोनेट्स्क क्षेत्र में है. इसमे से तकरीबन 3/4 हिसा रशिया के कंट्रोल में है. पिछले 3 सालों में डोनेट्स्क पर रशियन कैप्चर की तुलना में स्पीड थोड़ी बढ़ गई है.

फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने यूक्रेनी क्षेत्र पर 27% कब्जा कर लिया था. लेकिन यूक्रेनी सेनाओं ने मजबूत जवाबी हमला करके, कीव के आस-पास और उत्तरी यूक्रेन के क्षेत्रों में रूस से कब्ज़ी हुई ज़मीन का 9% हिसाब 2022 के अंत तक वापस ले लिया.

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तब से रूस सिर्फ 1% से भी कम यूक्रेनी क्षेत्र पर दोबारा नियंत्रण कर पाया है. यूक्रेन के उत्तरी सुमी क्षेत्र में एक बफर जोन पर कब्जा करने की वजह से रूस की कोशिश भी विफल हो गई है.

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