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पुतिन ने ट्रंप का प्लान कर दिया फेल! रूस-यूक्रेन शांति वार्ता से पीछे हटे अमेरिकी राष्ट्रपति, कहा– पहले वो दोनों आमने-सामने करें बातचीत

रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करवाने की कोशिशों में सक्रिय रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब सीधे हस्तक्षेप से पीछे हटने का फैसला किया है. ट्रंप चाहते हैं कि पुतिन और जेलेंस्की पहले बिना अमेरिकी मध्यस्थता के आमने-सामने बातचीत करें. अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप की नजर में शांति प्रक्रिया का अगला चरण दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक है, हालांकि यह बैठक होगी या नहीं, यह अब भी अनिश्चित है.

Donal Trump- Putin-Zelenskyy (file Photo)
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन साल पूरे होने वाले हैं. इस लंबे संघर्ष ने न सिर्फ दोनों देशों को हिला दिया है बल्कि पूरी दुनिया पर इसके गहरे असर दिखाई दे रहे हैं. ऊर्जा संकट, आर्थिक मंदी और कूटनीतिक खींचतान ने इस युद्ध को वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया है. ऐसे में शांति स्थापित करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं. यूरोप से लेकर एशिया और अमेरिका तक कई देशों ने बीच-बचाव की भूमिका निभाने की कोशिश की लेकिन सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने, जिन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोकने के लिए कई प्रयास किए. 

अचानक बदला ट्रंप का रुख 

शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को समाप्त करने के लिए बेहद आक्रामक रुख अपनाया था. उन्होंने रूस को खुले तौर पर चेतावनी दी थी कि 50 दिनों के भीतर युद्ध खत्म किया जाए. इतना ही नहीं, ट्रंप ने साफ संकेत दिए थे कि अगर वे सीधे हस्तक्षेप करेंगे तो हालात बदल जाएंगे. उनकी इस रणनीति से ऐसा लग रहा था कि जल्द ही पुतिन और जेलेंस्की को मजबूरन बातचीत की मेज पर बैठना पड़ेगा. ट्रंप की कोशिश थी कि पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत हो, उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मिलकर युद्धविराम पर सहमति बनाई जाए. एक समय तो यह भी कयास लगाए जाने लगे थे कि जल्द ही दोनों नेताओं के साथ ट्रंप की त्रिपक्षीय बैठक हो सकती है. इस उम्मीद ने दुनियाभर में युद्ध खत्म होने की एक नई किरण दिखाई थी. लेकिन अब बड़ी खबर यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे हस्तक्षेप से पीछे हटने का फैसला किया है. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अब चाहते हैं कि पहले पुतिन और जेलेंस्की आपस में आमने-सामने बैठकर बातचीत करें और अमेरिका की भूमिका बाद में तय की जाए. उन्होंने अपने सलाहकारों को साफ निर्देश दिया है कि जब तक दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक नहीं करते, तब तक किसी भी तरह की त्रिपक्षीय बैठक में अमेरिका शामिल नहीं होगा.

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वेट एंड वॉच की रणनीति पर ट्रंप का फोकस 

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ट्रंप का नया रुख अब 'वेट एंड वॉच' यानी इंतजार और देखने की नीति जैसा है. खुद ट्रंप ने रेडियो इंटरव्यू में कहा कि वे देखना चाहते हैं कि पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात में क्या नतीजे निकलते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति उनके चुनावी वादों से बिल्कुल उलट है. पहले जहां वे युद्ध खत्म करने की त्वरित सफलता का दावा कर रहे थे, अब वहीं उन्होंने खुद को पीछे खींच लिया है.

यूरोप को भरोसा दिलाने में जुटा पेंटागन

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इस बीच पेंटागन भी सक्रिय हो गया है. यूरोप के कई देश इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं अमेरिका भविष्य में यूक्रेन में बड़ी सैन्य भूमिका न निभा दे. इस पर सफाई देते हुए अमेरिकी रक्षा उपसचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने यूरोपीय सैन्य नेताओं से मुलाकात कर कहा कि अमेरिका की भूमिका सीमित रहेगी. पेंटागन का संदेश साफ है कि यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का फैसला तो होगा, लेकिन अमेरिका सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगा.

अमेरिकी सैनिक नहीं जाएंगे यूक्रेन

इससे पहले खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित समझौते के तहत अमेरिकी सैनिकों को यूक्रेन नहीं भेजा जाएगा. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति हूं और मैं आपको यह आश्वासन देता हूं कि अमेरिकी सैनिक युद्ध के बाद यूक्रेन नहीं भेजे जाएंगे.” उनका यह बयान जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ लंबी चर्चा के बाद आया.

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पुतिन अपने फैसले पर अडिग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही दुनिया भर में कई संघर्षों को समाप्त कराने का दावा किया हो और खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का दावेदार बताया हो, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध में उनकी कोशिशें असरदार साबित होती नहीं दिख रहीं. ट्रंप से मुलाक़ात के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर ट्रंप पुतिन और जेलेंस्की के बीच बैठक कराने से पीछे हटते हैं तो इसका सीधा मतलब यही है कि पुतिन उनकी बातों से सहमत नहीं हैं. ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध को रुकवाने में ट्रंप की भूमिका कमजोर पड़ सकती है और नोबेल शांति पुरस्कार पाने का उनका सपना अधूरा रह सकता है.

रूस ने रखी हैं कुछ शर्तें

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उधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी अपनी शर्तें सामने रखी हैं. वह चाहते हैं कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र को छोड़ दे, NATO में शामिल होने की महत्वाकांक्षा को त्याग दे और तटस्थ रहकर पश्चिमी सैनिकों को अपने देश से बाहर रखे. इन शर्तों को मानना यूक्रेन के लिए बेहद कठिन है, क्योंकि इससे उसकी संप्रभुता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो जाते हैं.

अलास्का में पुतिन-ट्रंप बैठक

इन सबके बीच अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन की मुलाकात ने भी सुर्खियां बटोरी हैं. इस बैठक में दोनों नेताओं ने तीन घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की. चर्चा का मुख्य एजेंडा भी यूक्रेन ही रहा. हालांकि किसी ठोस नतीजे का ऐलान नहीं हुआ, लेकिन यह साफ हो गया कि पुतिन और ट्रंप के बीच भविष्य की रणनीति पर बातचीत जारी है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुतिन और जेलेंस्की सीधे मुलाकात के लिए तैयार होंगे. क्या अमेरिका की "वेट एंड वॉच" रणनीति से शांति वार्ता सफल हो पाएगी. या फिर यह युद्ध और लंबा खिंच जाएगा. फिलहाल हालात यही दिखा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी है.

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बताते चलें कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को सिखाया है कि आधुनिक समय में भी कूटनीति से ज्यादा अहमियत शक्ति और रणनीति की होती है. डोनाल्ड ट्रंप का बदला हुआ रुख इस युद्ध के भविष्य को किस दिशा में ले जाएगा, यह आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन इतना तय है कि दुनिया इस युद्ध के जल्द खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रही है.

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