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सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन कर अमेरिका के सामने छवि साफ कर रहे PM शहबाज शरीफ

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम समझौता हुआ, जिसमें अमेरिका की मध्यस्थता बताई गई. लेकिन पाक सेना ने तुरंत सीजफायर का उल्लंघन कर दिया. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका और अन्य देशों को धन्यवाद देते रहे, वहीं LOC पर गोलियों की बौछार होती रही.

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भारत और पाकिस्तान के बीच जिस सीजफायर समझौते को लेकर दुनिया को उम्मीद की किरण दिखाई दी थी, वह चंद घंटों में ही हकीकत की धरातल पर दरक गया. जहां एक ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों का बार-बार धन्यवाद दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर उसी वक्त पाकिस्तान की सेना नियंत्रण रेखा (LoC) पर सीजफायर का उल्लंघन कर रही थी. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान की राजनीतिक मंशा और सैन्य नीतियों में कोई तालमेल है?

शांति की बातों के बीच बारूद की गंध

10 मई की शाम 5 बजे दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच हॉटलाइन पर हुई बातचीत के बाद संघर्षविराम की घोषणा की गई. अमेरिकी मध्यस्थता से बने इस समझौते की जानकारी सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक की. कुछ ही देर बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व ट्विटर) पर अमेरिका, चीन और तुर्की को धन्यवाद देते हुए इसे "शांति की ओर एक नई शुरुआत" बताया. उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भूमिका की भी खुलकर सराहना की.

शब्दों से शांति, धरातल पर धोखा

शहबाज शरीफ ने अपने बयान में कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस इलाके में शांति के लिए नेतृत्व किया और सक्रिय भूमिका निभाई. पाकिस्तान इसे क्षेत्रीय स्थिरता और प्रगति की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानता है." लेकिन इन शब्दों का असर जमीन पर नजर नहीं आया। संघर्षविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान की ओर से राजौरी, पुंछ और सांबा सेक्टरों में भारी गोलाबारी शुरू हो गई. श्रीनगर, उधमपुर और जम्मू में धमाकों की आवाजें गूंजीं। भारत ने इसे सीजफायर समझौते का खुला उल्लंघन करार दिया.

इससे पहले 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी. इसके जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई की रात 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद 9 बड़े आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान के भीतर और LoC के पास स्थिति तनावपूर्ण हो गई. ऐसे माहौल में संघर्षविराम की घोषणा एक सकारात्मक कदम माना गया, लेकिन वह भरोसा पाकिस्तान की हरकतों ने एक बार फिर तोड़ दिया.

क्या अमेरिका की मध्यस्थता से बनेगा हल?

अमेरिका ने दावा किया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ बातचीत कर इस संघर्षविराम को संभव बनाया. यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता की कोशिश की है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या इस बार उसका प्रभाव स्थायी साबित होगा। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा.

भारत की कड़ी चेतावनी और सतर्कता

सीजफायर उल्लंघन के बाद भारतीय सेना ने सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है. सभी अग्रिम चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और विशेष बलों की तैनाती की गई है. खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया और आतंकी नेटवर्क पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, भारत की नीति स्पष्ट है शांति में सहयोग करेंगे, लेकिन आक्रामकता का करारा जवाब भी देंगे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का अमेरिकी नेताओं को धन्यवाद देना एक राजनयिक औपचारिकता हो सकती है, लेकिन उसके ठीक बाद सीमा पर हुई गोलाबारी यह साबित करती है कि पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य सोच में भारी विरोधाभास है. भारत को यह समझना होगा कि संघर्षविराम केवल समझौते से नहीं, विश्वास से चलता है, और यह विश्वास तभी टिकता है जब हर पक्ष अपने वादों पर कायम रहे.
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