×
जिस पर देशकरता है भरोसा

PAK की कठपुतली मोहम्मद यूनुस ने मुंह की खाई, भारत को घेरने की कोशिशों की अमेरिका ने निकाली हवा, दिया तगड़ा झटका

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को अमेरिका ने तगड़ा झटका दिया है. पाकिस्तान के इशारे पर भारत की शिकायत और एक मांग को लेकर ट्रंप के दूत के पास पहुंचे लेकिन अपने मकसद को हासिल करने में फेल रहे. इसके साथ ही अमेरिका ने इशारा दे दिया है कि वो अब भारत को हल्के में नहीं ले सकता.

Author
24 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
07:33 AM )
PAK की कठपुतली मोहम्मद यूनुस ने मुंह की खाई, भारत को घेरने की कोशिशों की अमेरिका ने निकाली हवा, दिया तगड़ा झटका
Image: Mohammed Yunus / Donald Trump (File Photo)
Advertisement

बांग्लादेश की  अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर ऐसा लगता है जैसे उम्र का असर हो रहा है. वो उन चीजों में हाथ डाल रहे हैं, जो उनके, उनकी सरकार, देश और यहां तक कि जिसके पास गुहार लगाते हैं उनके भी वश से बाहर है. दरअसल पाकिस्तान के इशारे पर डांस कर रहे यूनुस को अमेरिका ने तगड़ा झटका दिया है. पाकिस्तान की आतंकी हरकतों और अड़ियल रवैये की वजह से बेजान पड़े दक्षेस यानी कि दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) में जान फूंकने चले यूनुस को उस समय मुंह की खानी पड़ी जब उन्होंने यूएस के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. दरअसल यूनुस ने गोर के समक्ष SAARC की मीटिंग नहीं होने का मुद्दा उठाया और कहा कि 2014 के बाद से ही इस संगठन की एक भी बैठक नहीं हुई है. इसलिए इसे फिर से पुनर्जीवित करने में अमेरिका मदद करे. 

अमेरिका से मुंह की खाकर लौटे यूनुस, लगा झटका

आपको बता दें कि ट्रंप ने अपने सबसे करीबी और MAGA कैंपेन की कमान संभाल रहे गोर को हाल ही में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत नियुक्त किया है. ऐसे में उनकी दक्षिण एशिया के मामलों में भूमिका बड़ी हो गई है. इसी नाते वो दुनियाभर के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. इसी सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महसभा की बैठक में भाग लेने न्यू यॉर्क पहुंचे मोहम्मद यूनुस ने भी महासभा की बैठक से इतर मुलाकात की थी और दक्षेस को फिर से बहाल करने की मांग की लेकिन गोर ने इस मामले का जिक्र तक करने से इनकार कर दिया. जानकारी के मुताबिक यूनुस और सर्जियो गोर की बातचीत के बाद अमेरिका ने एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया कि दोनों के बीच क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा हुई, लेकिन इस बयान में सार्क समूह को लेकर हुई किसी भी चर्चा का कोई उल्लेख नहीं किया गया. 

SAARC: पाक के ढोल को बजा रहे थे यूनुस, खुद बज गए!

कहा जा रहा है कि यह ढाक के लिए झटका है. पहली ही मुलाकात में मंशा का एक्सपोज हो जाना शर्मिंदगी की वजह है. ये उसके लिए किसी करेंट से कम नहीं है जो इस्लामाबाद के इशारे पर नाच रहा था. आपको ज्ञात हो कि पिछले महीने जब किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री के तौर पर इशाक डार बांग्लादेश के दौरे पर गए थे तो इसी तरह का राग अलापा गया था. इस दौरान कहा गया था कि SAARC उनके लिए (PAK-Bangladesh) बेहद अहम है. यूनुस ने डार के साथ इस बैठक में सार्क को फिर से जिंदा करने पर जोर दिया था. इससे पहले पाकिस्तान भी सार्क के मुद्दे पर इसी तरह का राग अलापता रहा है और इसकी बैठकें नहीं होने के लिए नई दिल्ली को जिम्मेदार ठहराता रहा है.

Advertisement

2014 में हुआ SAARC का अंतिम शिखर सम्मेलन 

आपको बताएं कि पहले हर दो साल में SAARC देशों की बैठक या शिखर सम्मेलन होते थे लेकिन 2016 में उरी में हुए आतंकी हमले के बाद उसी साल इस्लामाबाद में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया गया. ये तब हुआ जब पीएम मोदी खुद इससे पहले लाहौर गए थे ताकि रिश्तों में जमी बर्फ पिघल सके. हालांकि इसके ठीक बाद भारत की पीठ में छुरा घोंप दिया गया. इससे पहले SAARC का अंतिम शिखर सम्मेलन 2014 में ही नेपाल के काठमांडू में हुआ था, जहां प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ भी शामिल हुए थे.

उरी हमले के बाद भारत का रुख ये रहा कि पड़ोसी देश द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण यह वार्ता अव्यवहारिक हो गई है. और तो और पाकिस्तान की हर विकास प्रोजेक्ट और प्रस्ताव पर टांग अड़ाने की आदत के कारण सार्क अपने मकसद में न कामयाब हो पा रहा था और ना ही आगे बढ़ पा रहा था. आपको बता दें कि सार्क के चार्टर के अनुसार हर फैसला आम सहमति से होगा और कोई एक देश भी असहमति जताता है तो कोई भी संधि और घोषणापत्र नहीं हो सकता.

Advertisement

SAARC की स्थापना 1985 में हुई, कौन-कौन सदस्य देश?

भले ही SAARC की बैठक नहीं हो रही है लेकिन भारत सार्क के तहत होने वाली विभिन्न गतिविधियों को समर्थन देना जारी रखा है. उसने इस संगठन से खुद को अलग नहीं किया है. इसके अलावा भारत ने बिम्सटेक और ASEAN जैसे समूहों के माध्यम से क्षेत्रीय-समान विचारधारा वाले देशों को सहयोग देना जारी रखा है. इतना ही नहीं पहलगाम हमले के कारण भी पाकिस्तान द्वारा एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मेजबानी का विचार भी फेल हो चुका है. 

यह भी पढ़ें

सार्क (SAARC) की स्थापना 1985 में हुई थी. यह दक्षिण एशिया के आठ देशों का एक आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रीय संगठन है. इसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका समेत कुल आठ सदस्य देश हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें