Advertisement
अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नहीं पड़ेगी दुनिया की नज़र, IAEA से सहयोग किया समाप्त, संसद से बिल हुआ पास
Iran Nuclear Programme: अमेरिका, इजरायल के बाद अब UN के काबू से बाहर हुआ ईरान, IAEA से सहयोग किया समाप्त, संसद से बिल हुआ पास, अब परमाणु कार्यक्रम की निगरानी मुश्किल होगी.
Advertisement
परमाणु हथियारों को लेकर बीते 12 जून को शुरू हुए ईरान और इजरायल के बीच सैन्य तनाव में फिलहाल विराम लग गया है, लेकिन इसके कभी भी एक्सप्लोड करने की संभावना है. अपने परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले और संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) की कथित तौर पर US-Israel के साथ संलिप्तता से तिलमिलाए तेहरान ने बड़ा फैसला लिया है. बताया जा रहा है कि ईरानी संसद ने IAEA के साथ अपने सहयोग को खत्म करने के लिए बुधवार को एक बिल को मंजूरी दे दी है. यानी कि अब न्यूक्लियर वॉचडॉग कही जाने वाली ये संस्था ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी नहीं कर पाएगी.
ईरानी संसद ने IAEA के साथ सहयोग निलंबित करने वाला बिल पास किया
ईरानी संसद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ अपने सहयोग को निलंबित कर देगा. यह कदम हाल ही में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए हमलों के जवाब में उठाया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने बताया कि विधेयक के तहत IAEA को ईरान की परमाणु साइटों पर निगरानी कैमरे लगाने, निरीक्षण करने या रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति नहीं होगी. यह निलंबन तब तक लागू रहेगा, जब तक ईरान को उसकी परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती. विधेयक को अब संरक्षक परिषद (Guardian Council) की मंजूरी का इंतजार है. संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबफ ने कहा, "जब तक IAEA हमारी सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता, हम सहयोग नहीं करेंगे." उन्होंने यह भी घोषणा की कि ईरान अपने असैन्य परमाणु कार्यक्रम को और तेज करेगा. जानकारी के मुताबिक 223 सदस्यों वाली संसद में बिल के पक्ष में करीब 221 वोट पड़े बल्कि 1 सदस्य ने वोट नहीं किया.
Advertisement
ईरान ने अमेरिकी हमलों के बाद उठाया कदम
Advertisement
ईरान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब इजरायल और अमेरिका ने नतांज, फोर्डो, इस्फहान और अरक जैसे ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले किए. इजरायल का दावा है कि ये हमले ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए थे, जबकि ईरान ने इन हमलों को "आतंकवादी कृत्य" करार दिया और कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. IAEA ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के पास 60% तक संवर्धित यूरेनियम है, जो कथित तौर पर 9 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है. हालांकि, IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि परमाणु हथियार बनाने का कोई ठोस सबूत नहीं है. ईरान ने IAEA पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी ने हमलों की निंदा नहीं की.
ईरान द्वारा उठाए गए कदम के बाद अब माना जा रहा है कि यह फैसला मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है. IAEA के निरीक्षण और कैमरे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता का प्रमुख स्रोत थे. सहयोग निलंबित होने से वैश्विक समुदाय के लिए ईरान की गतिविधियों की निगरानी मुश्किल हो जाएगी. विधेयक के लागू होने के बाद IAEA निरीक्षकों को नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसी साइटों तक पहुंच नहीं मिलेगी. भविष्य में किसी भी निरीक्षण के लिए ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की अनुमति जरूरी होगी. यह कदम ओबामा शासन काल में हुए 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के भविष्य को और जटिल बना सकता है.
Advertisement
Iran Nuclear Programme पर नहीं हुआ अमेरिकी हमलों का कोई विशेष असर
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर किए गए हालिया हमलों का शुरुआती खुफिया आकलन किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह नहीं हुआ है, सिर्फ कुछ महीनों के लिए पीछे ज़रूर चला गया है.
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA), जो अमेरिका की एक खुफिया एजेंसी है, उससे जुड़े सूत्रों ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि इस बमबारी में ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार भी पूरी तरह नष्ट नहीं हो पाया.
Advertisement
यह भी पढ़ें
हालांकि, इस रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस ने कड़ी आपत्ति जताई है. व्हाइट हाउस का कहना है कि यह शुरुआती आकलन पूरी तरह गलत है और इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि खराब करने के एक प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए.