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अमेरिका और ईरान के बीच नई शुरुआत? परमाणु समझौते पर ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत
ईरान और इजरायल के बीच हुए सीजफायर के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अगले सप्ताह ईरान से गंभीर बातचीत की संभावना जताई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इशारा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर डील हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह डील जरूरी नहीं है.
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भले ही ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद युद्धविराम हो गया हो, लेकिन मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अगले सप्ताह ईरान से गंभीर बातचीत की संभावना जताई है.
बातचीत करेंगे, समझौता भी संभव: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इशारा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर डील हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह डील जरूरी नहीं है. ट्रंप बोले - “हम बात करेंगे, शायद समझौता भी हो” नीदरलैंड्स में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “जिस तरह से मैं इसे देखता हूं, ईरान और इजरायल ने युद्ध लड़ा और अब यह समाप्त हो चुका है. मुझे उनका यह बयान मिल सकता है कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाने जा रहे हैं. हम शायद इसके लिए कहेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं करने जा रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “हम अगले सप्ताह ईरान से बात करने जा रहे हैं. हम एक समझौते पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं, हालांकि मुझे नहीं लगता कि यह आवश्यक है.”
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इजरायल-ईरान युद्धविराम के ठीक बाद आया बयान
राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम की घोषणा को महज एक दिन ही बीता है. इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का समर्थन करते हुए ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. युद्धविराम के बावजूद मिडिल ईस्ट में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है. ईरान और अमेरिका के बीच आगामी बातचीत इस क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, बशर्ते दोनों पक्ष कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ें.
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अमेरिका ने कूटनीति के साथ विश्वासघात: खामेनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के हालिया सैन्य गठजोड़ को लेकर तीखा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले में इजरायल का साथ देकर अमेरिका ने कूटनीति के साथ विश्वासघात किया है. खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि अब वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह की बातचीत की कोई संभावना नहीं बची है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात अत्यंत तनावपूर्ण हैं. जानकारी देते चलें कि अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु साइट्स पर की गई एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया है. अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले को अमेरिका के खिलाफ ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है. यह स्पष्ट संकेत है कि ईरान अब किसी भी सैन्य या कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है.
ईरान की परमाणु साइट्स पर हमले जरूरी थे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात को दोहराया कि ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हाल में किए गए अमेरिकी हमले "आवश्यक" थे. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों ने तेहरान की परमाणु हथियार प्राप्त करने की महत्वाकांक्षाओं को एक करारा झटका दिया है. ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया है कि हमलों से केवल मामूली क्षति हुई है और ईरान की परमाणु क्षमता पर लंबी अवधि का प्रभाव नहीं पड़ा है. वही अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि खुफिया रिपोर्टों में जो कहा गया है, वह अभी प्रारंभिक और आंशिक मूल्यांकन पर आधारित है. उन्होंने कहा, “लीक हुए आकलनों के मुताबिक ईरान को परमाणु कार्यक्रम में कुछ महीनों की देरी का सामना करना पड़ा है। यह शुरुआती अनुमान है और इसकी पुष्टि में अभी समय लगेगा.” हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई ने ईरान की यूरेनियम संवर्धन प्रक्रिया को बाधित किया है, वहीं खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह असर सीमित और अस्थायी हो सकता है.
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ईरान में गायब यूरेनियम की तलाश में जुटे अमेरिका और इजरायल
अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियां इस समय ईरान में 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम की तलाश कर रही हैं, जो कथित तौर पर कम से कम 10 परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, यह संवर्धित यूरेनियम 60% तक परिष्कृत किया गया है, और यदि इसे 90% तक संवर्धित कर लिया जाए तो यह परमाणु हथियार निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकता है. इस स्तर की संवृद्धि परमाणु ऊर्जा उत्पादन की तुलना में हथियारों के निर्माण के लिए अधिक चिंताजनक मानी जाती है.
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बताते चलें कि यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका ने ईरान की परमाणु साइट्स पर एयरस्ट्राइक की थी और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. गायब यूरेनियम के भंडार को लेकर अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर संदेह और गहरा गया है.