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खामेनेई का विदाई समारोह अचानक रद्द! क्या इजरायली हमलों के डर से ईरान ने बदला फैसला?

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद उनके अंतिम विदाई समारोह को फिलहाल रद्द कर दिया गया है. सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर सामने आई चुनौतियों को इसकी मुख्य वजह बताया गया है.

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ईरान की राजधानी तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए बुधवार रात प्रस्तावित समारोह को टाल दिया गया है. ईरानी स्टेट मीडिया ने पुष्टि की है कि तेहरान में इमाम खुमैनी प्रेयर हॉल में आज (4 मार्च 2026) शाम से शुरू होने वाला तीन दिवसीय विदाई समारोह स्थगित कर दिया गया है.

बुधवार रात 10 बजे से शुरू होना था कार्यक्रम

तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक आयोजन से जुड़ी लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि समारोह की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार यह कार्यक्रम बुधवार रात 10 बजे शुरू होना था और इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी.

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सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों के मद्देनजर टला कार्यक्रम

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एक अधिकारी ने कहा कि कई प्रांतों से नागरिकों ने कार्यक्रम में भाग लेने की इच्छा जताई थी, जिससे आयोजन की व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा. सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर सामने आई चुनौतियों के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियातन इसे टालने का निर्णय लिया.

इजरायल-अमेरिका के संयुक्त एयरस्ट्राइक में खामेनेई की मौत

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बीते शनिवार यूएस-इजरायल के संयुक्त एयरस्ट्राइक में खामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारियों की मौत हो गई थी. हवाई हमले में सर्वोच्च धार्मिक नेता के परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए थे. उनकी मौत के लगभग पांच दिन बाद स्टेट मीडिया ने बताया है कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने चुना है. फिलहाल इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री का एक बयान भी सुर्खियों में है जिसमें उन्होंने कहा है कि खामेनेई की जगह चुने गए किसी भी शख्स को इजरायल ढूंढ कर मार देगा.

अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता थे

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अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे. 1989 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने ईरान की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और क्षेत्रीय रुख को आकार देने में अहम प्रभाव डाला था.

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