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पत्रकार शहीन सहबाई की पोस्ट ने खोल दी पाकिस्तान की पोल, बांग्लादेश से भी बुरे हालात

वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार शहीन सहबाई ने अपने बयान के ज़रिए देश की गिरती साख, सैन्य वर्चस्व, भ्रष्ट शासन और अयोग्यता को उजागर किया है। उन्होंने पाकिस्तान की तुलना बांग्लादेश से करते हुए बताया कि कैसे बांग्लादेश आज शिक्षा, विज्ञान और प्रशासन में पाकिस्तान से कई गुना आगे निकल चुका है।

पत्रकार शहीन सहबाई की पोस्ट ने खोल दी पाकिस्तान की पोल, बांग्लादेश से भी बुरे हालात
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इस्लामाबाद की सड़कों पर सन्नाटा है, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में एक पोस्ट ने भूचाल ला दिया. पोस्ट किसी आम नागरिक की नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार शहीन सहबाई की थी. बीते 50 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय सहबाई ने जो बातें एक्स (Twitter) पर लिखीं, उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान की मौजूदा हकीकत को उजागर किया, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से उसकी तुलना कर डाली. और ये तुलना कोई साधारण तुलना नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान के शासनतंत्र, योग्यता और सोच को बौना साबित करने वाली थी.

बांग्लादेश की तारीफ और पाकिस्तान की बुराई

शहीन सहबाई ने लिखा कि बांग्लादेश की वर्तमान सरकार में ऐसे विशेषज्ञ काम कर रहे हैं जिन्होंने ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और अमेरिका जैसे शीर्ष संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है. वहां की नौकरशाही में नोबेल पुरस्कार विजेता तक शामिल हैं. बांग्लादेश बैंक से लेकर ढाका विश्वविद्यालय तक, वहां के प्रमुख संस्थान योग्य और अनुभवी हाथों में हैं.

इसके ठीक उलट उन्होंने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वहाँ सरकार सिफारिश, रिश्तेदारी और सैन्य पृष्ठभूमि वालों के भरोसे चल रही है. कोई नेता का भतीजा है, कोई बेटी है, कोई ससुराल वाला है. शहीन सहबाई ने साफ कहा कि अब योग्यता का कोई मूल्य नहीं, सिर्फ रसूख और खानदानी पहचान ही सबकुछ है.

लोकतंत्र की चादर में लिपटा सैन्य तानाशाही का सच

पाकिस्तान हमेशा खुद को लोकतांत्रिक देश कहता है, लेकिन अंदरखाने हकीकत कुछ और ही है. पिछले कई दशकों से वहाँ की राजनीति सेना के इशारों पर चलती रही है. निर्वाचित नेताओं की सरकारें गिरती रही हैं, पत्रकारों को डराया गया है, और जनता को सिर्फ वोट देने का हक मिला है, निर्णय लेने का नहीं. शहीन सहबाई की इस पोस्ट ने इसी लोकतंत्र के मुखौटे को उतार फेंका. उन्होंने बताया कि आज पाकिस्तान का सिस्टम उन लोगों के हाथों में है जिन्हें न तो जनता की परवाह है, न ही देश के भविष्य की. वह केवल अपनी कुर्सी, अपने फायदे और अपने खानदान की सत्ता के लिए काम कर रहे हैं.

भारत और बांग्लादेश की तुलना में पिछड़ता पाकिस्तान

जहां भारत और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश शिक्षा, तकनीक, नवाचार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में ऊँचाईयों को छू रहे हैं, वहीं पाकिस्तान 1970 के दशक की मानसिकता में जी रहा है. भारत ने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मिशन चंद्रयान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे बड़े कदम उठाए हैं. बांग्लादेश ने भी टेक्सटाइल, डिजिटल पेमेंट्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रभावशाली सुधार किए हैं.

वहीं पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों, चीन के कर्ज, और राजनीतिक अस्थिरता में जकड़ा हुआ है. महंगाई आसमान छू रही है, बेरोजगारी नई ऊंचाइयों पर है, और आम आदमी का जीवन दिन-ब-दिन बदतर होता जा रहा है.

क्या पाकिस्तान खुद अपना दुश्मन बन चुका है? यह सवाल अब हर आम पाकिस्तानी की जुबान पर है. शहीन सहबाई जैसे वरिष्ठ पत्रकारों की पोस्ट अब दर्शाती है कि वहां के बुद्धिजीवी और जागरूक वर्ग सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने लगा है. मीडिया पर सेंसरशिप के बावजूद सच्चाई अब बाहर आ रही है. जब कोई देश अपने ही नागरिकों की बातों को दबाने लगे, जब कोई शासन योग्यता से ज्यादा भाई-भतीजावाद और सैन्य वर्चस्व को महत्व दे, तो वह देश खुद ही अपनी बर्बादी का रास्ता तैयार करता है. शहीन सहबाई ने वही आईना पाकिस्तान को दिखा दिया है.

शहीन सहबाई की एक पोस्ट ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है. यह सिर्फ एक पत्रकार की नाराजगी नहीं है, बल्कि वह अंदर से सड़ चुके सिस्टम की गवाही है. बांग्लादेश से तुलना करना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा तमाचा है, क्योंकि जो देश कभी उसका हिस्सा था, वही अब उससे आगे निकल गया है.

पाकिस्तान अब केवल भारत का दुश्मन देश नहीं रहा, बल्कि वह अपने भविष्य का भी दुश्मन बन चुका है. यदि पाकिस्तान की जनता, मीडिया और नौकरशाही अभी भी चुप रही, तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया उसे केवल अस्थिरता, आतंक और अराजकता का पर्याय मान लेगी.

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