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जापान में बदला इतिहास! सबसे ताकतवर पद पर पहली बार काबिज होगी महिला, जानें कैसे होता है PM का चुनाव

साने ताकाइची जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी मानी जाती हैं. वह चीन की धुर विरोधी नेता हैं. उन्होंने हाल ही में जापान में ट्रंप की ट्रेड डील का भी विरोध किया था.

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जापान की राजनीति इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है. यहां पहली बार प्रधानमंत्री का ताज किसी महिला के सिर पर सजेगा. सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री साने ताकाइची को नया अध्यक्ष चुना है. इस तरह से जापान को पहली बार कोई प्रधानमंत्री मिलने जा रही है. 

दक्षिणपंथी विचारधारा वाली साने ताकाइची ने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइजुमी को कड़े मुकाबले में हराया है. इस जीत के बाद उन्होंने मजबूत और समृद्ध जापान का नारा दिया है. साने ताकाइची जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी मानी जाती हैं. वह चीन की धुर विरोधी नेता हैं. 

कौन हैं जापान की साने ताकाइची?

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साने ताकाइची की पहचान रूढ़ीवादी और दक्षिणपंथी नेता की रही है. वह जापान में पुरुष राजा के शासन की समर्थक हैं. हालांकि वह रानी के शासन के खिलाफ रही हैं. साल 2012 से 2020 तक ताकाइची आर्थिक सुरक्षा मंत्री रहीं. साल 2024 में दूसरे राउंड में वह शिगेरु इशिबा से हार गई थीं. अब उन्हें इशिबा की ही जगह ली है. ताकाइची ने साल 2004 में साथी सांसद ताकू यामामोटो से शादी की थी. साल 2017 में राजनीतिक मतभेदों के दोनों अलग हो गए. साल 2021 में दोनों फिर साथ आ गए. 

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जापान की पहली प्रधानमंत्री बनने जा रही ताकाइची ने क्या कहा? 

साने ताकाइची जापान के मौजूदा PM शिगेरु इशिबा की जगह लेंगी. शिगेरु इशिबा को शिंजो आबे की हत्या के बाद PM बनाया गया था. पार्टी में इशिबा के खिलाफ विरोध की आवाज उठ रही थी. LDP ने ताकाइची को ऐसे समय में चुना है जब देश में लोग महंगाई से परेशान हैं और पार्टी से नाराज हैं. ताकाइची ने जीत के बाद कहा, मैं खुश होने के बजाय यह सोच रही हूं कि आगे का रास्ता कितना मुश्किल होने वाला है. 

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ट्रंप की कौनसी नीति की विरोधी हैं ताकाइची? 

ताकाइची ने अमेरिका के साथ हुई ट्रंप की ट्रेड डील की विरोधी रहीं. उन्होंने कहा था कि, इस पर फिर से बातचीत की जानी चाहिए. दरअसल, जापान और अमेरिका के बीच अगस्त में ट्रेड डील हुई थी. इसमें जापान ने अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया था. 

समलैंगिक विवाह की विरोधी 

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साने ताकाइची वोक कल्चर और समलैंगिक विवाह की विरोधी रही हैं. वह मानती हैं कि, इससे पारिवारिक मूल्य कम होते हैं.  इसके साथ ही वह जापान में बढ़ती प्रवासियों की संख्या पर भी चिंता जताती हैं. वह कई बार जापान में वीजा नियमों को सख्त करने की मांग कर चुकी हैं. साथ अवैध रूप से जापान में आने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग भी कर चुकी हैं. 

जापान में कैसे होते हैं चुनाव?

जापान में बहुमत वाली पार्टी में पहले अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होता है. फिर वही अध्यक्ष प्रधानमंत्री पद के लिए फाइनल किया जाता है. पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों के अलावा पार्टी के सदस्य भी मतदान करते हैं. अध्यक्ष पद जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत यानी 51 फीसदी वोटों की जरूरत होती है. अगर किसी उम्मीदवार को पहली बार में स्पष्ट बहुमत न मिले तो दूसरे दौर का मुकाबला होता है. इसमें जिस कैंडिडेट को बहुमत मिलता है वह अध्यक्ष बनता है. वही PM पद के लिए चुना जाता है. संसद में बहुमत हासिल करने के बाद वह PM पद की शपथ लेता है.

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जापान में असली शक्ति प्रधानमंत्री के पास ही होती है. यह पद सबसे ताकतवर है. हालांकि जापान में सम्राट की परंपरा भी है, लेकिन वह भी PM से ज्यादा पावरफुल नहीं होता. ये पहली बार है जब जापान में इस पावरफुल पद पर कोई महिला काबिज होगी. जापानी राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ताकाइची की जीत सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि वैचारिक दिशा परिवर्तन का संकेत है.

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