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ट्रंप-मोदी और भारत-अमेरिका पर बोले जयशंकर, बता दिया अमेरिका दोस्त है या दुश्मन
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बन गए है, अब भारतीयों के मन में सवाल है कि ट्रंप भाकत के दोस्त है या दुश्मन। इस सवाल का जनाब अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दे दिया है।
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप अक बार फिर से राष्ट्रपति बन चुके हैं। 20 जनवरी को उन्होंने शपथ ले ली है। ऐसे में भारत के लोगों के मन में अब ये सवाल लगातार उठ रहें है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन। इस कड़ी में इस सवाल का जवाब अब मिल गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के बीच मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों के बारे में बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बड़ी अहम बात कही। जयशंकर ने ट्रंप को एक 'अमेरिकी राष्ट्रवादी' बताया। दरअसल विदेश मंत्री दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में एक कार्यक्रम में मौजूद थे जहां उन्होंने वैश्विक कूटनीति की उभरती प्रकृति और इसके प्रति भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन?
मौके पर ट्जयशंकर से पूछा गया की ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन, तब जयशंकर ने कहा कि मैंने हाल ही में उनके शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था और हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया गया। मेरा मानना है कि वह एक अमेरिकी राष्ट्रवादी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि ट्रंप की नीतियां वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हित से निर्देशित होती रहेगी।
ट्रंप बहुत सी चीजें बदल देंगे- जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि हां, ट्रंप बहुत सी चीजें बदलेंगे, हो सकता है कि कुछ चीजें उम्मीद के अनुरूप नहीं हों, लेकिन हमें देश के हित में विदेश नीतियों के संदर्भ में खुला रहना होगा। उन्होंने आगे कहा कि कुछ मुद्दे हो सकते हैं जिसका हम समर्थन न करें, लेकिन कई क्षेत्र ऐसे होंगे जहां चीजें हमारे दायरे में होंगी। जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ट्रंप के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों पर भी जोर देते हुए कहा, ‘‘अमेरिका के साथ हमारे संबंध मजबूत हैं और मोदी के ट्रंप के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं।
राजनीति में आने के बारे में जयशंकर की बातें
जयशंकर ने कहा कि राजनीति में मैं अचानक आ गया, या तो इसे भाग्य कहें, या इसे मोदी कहें। प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे इस तरह से आगे बढ़ाया कि कोई भी मना नहीं कर सका। उन्होंने रेखांकित किया कि विदेश में रहने वाले भारतीय अभी भी समर्थन के लिए अपनी मातृभूमि पर निर्भर हैं और कहा कि जो भी देश के बाहर जाते हैं, वे हमारे पास ही आते हैं। बाहर हम ही रखवाले हैं।’
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