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सटीक इनपुट, महीनों की प्लानिंग… जब एक जगह जुटे सुप्रीम लीडर और टॉप कमांडर, इजरायल ने दाग दी मिसाइल
ईरान पर हमले से पहले अमेरिका-इजरायल का लंबा इंतजार किया. क्योंकि अमेरिका हमले के लिए उस समय और मौके का इंतजार कर रहा था जब ईरान के टॉप लीडर्स एक साथ बैठे हों.
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Iran Supreme Leader Ali Khamenei Died: इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए. जिससे साफ हो गया अमेरिका ने ये हमला केवल डराने के लिए नहीं किया था, न उसका टारगेट केवल सत्ता परिवर्तन था, अमेरिका का टारगेट खामेनेई के पूरे कुनबे का खात्मा था और ऐसा करने के लिए अमेरिका ने महीनों का इंतजार किया.
ईरान पर हमले से पहले अमेरिका-इजरायल का लंबा इंतजार किया. क्योंकि अमेरिका हमले के लिए उस समय और मौके का इंतजार कर रहा था जब ईरान के टॉप लीडर्स एक साथ बैठे हों. इन टॉप लीडर्स में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, राष्ट्रपति पेजेश्कियन और टॉप मिलिट्री कमांडर शामिल हैं.
दिन में हमला कर ईरान को दिया चकमा
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इजरायल-अमेरिका की हमले की टाइमिंग काफी अहम है. अमूमन कोई भी देश दूसरे देश पर हमले के लिए रात की टाइमिंग चुनता है, लेकिन अमेरिका ने दिन के उजाले में हमला किया. भारतीय समय के अनुसार सुबह 8.15 बजे ये हमला हुआ है. जो ईरान तो क्या कोई भी नहीं सोच सकता. जबकि ईरान की पूरी तैयारी और डिफेंस सिस्टम रात के हमले पर टिका हुआ था. इससे पहले इजरायल ने ईरान पर देर रात और आधी रात को हमला किया था.
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सूत्र बताते हैं कि अमेरिका को तेहरान के अंदरखाने से यह खबर मिली थी कि सुप्रीम लीडर, राष्ट्रपति और टॉप कमांडर एक जगह मीटिंग के लिए बैठे हैं. इजरायल-अमेरिका की सटीक प्लानिंग बनी हुई थी, सटीक सूचना मिलते ही अमेरिका ने सटीक निशाना साधा.
इजरायल के युद्ध हथियार तैयार किए
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ईरान पर हमले के लिए इजरायल ने अपने शक्तिशाली हथियारों को तैयार किया. इसमें ओवदा एयरबेस पर F-22 लड़ाकू विमान, बेन गुरियन पर टैंकर, 270 ट्रांसपोर्ट फ्लाइट्स सब तैयार किए. इजरायल को जानकारी मिल चुकी थी, टॉप लीडर्स कहां और कब हो रही है.
ईरानी सेना के कमांडर, सर्वोच्च लीडर और नेताओं के लिए ये मीटिंग मौत का निमंत्रण बन गई है. इस हमले ने ईरानी सेना में भरोसे को तोड़ दिया. बड़ा सवाल ये उठता है कि इजरायल और अमेरिका को मीटिंग की जानकारी किसने दी. जिस जगह को सबसे सेफ माना जाता है, वह अनसेफ हो गई.
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इस बार अमेरिका की शह पर इजरायल ने महीनों का इंतजार किया. फुल प्लान बनाया और एक साथ ईरान के 30 बड़े पॉइंट्स को निशाना बनाया. अमेरिका-इजरायल को खामेनेई के ठिकाने की सटीक जानकारी मिलना किसी उत्सव की तरह था. जिसे उन्होंने दिन के उजाले में हमला कर मानों सेलिब्रेट किया हो.
डर हमलों का नहीं, खुफिया जासूसी का...
इजरायल के हमले के बाद ईरान ने गुस्से में मिडिल ईस्ट के 8 देशों को धुआं-धुआं कर दिया. ईरान ने एक साथ उन पर हमला किया. जिससे ईरान अब मुस्लिम देशों की रडार पर भी आ गया, लेकिन ईरान के सामने असल डर युद्ध का नहीं बल्कि अंदरखाने जासूसी का है. कौन है ईरान का वो ‘घर का भेदी लंका ढहाए’ वाला शख्स. क्या ईरानी सेना में ही ये हिमाकत की जा रही है. ईरान को अब हर पल डर रहेगा, जिस मीटिंग में मिलिट्री लीडर्स शरीक हुए हैं वो मौत का पैगाम ला सकती है.
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इजरायल के हमलों ने ईरानी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया. असुरक्षा की भावना को जन्म दे दिया. ईरान को अब हर कदम फूंक-फूंककर उठाना होगा. बाहरी हमलों से ज्यादा उसे अंदरुनी दुश्मनों से खतरा है.