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जो बाइडेन की मध्यस्थता से हुआ इजरायल-हिजबुल्लाह समझौता, जानें प्रमुख बिंदु
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष आखिरकार एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते के जरिए समाप्त हो गया है। यह युद्धविराम लेबनान में बुधवार सुबह 4 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे) से प्रभावी हुआ। समझौते के तहत, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना धीरे-धीरे वापस बुलाएंगे, जबकि लेबनानी सेना लिटानी नदी के दक्षिण में तैनात होगी।
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27 नवंबर 2024 को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष का अंत करने के लिए एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौता लागू हुआ है। यह समझौता एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है, जो संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
समझौते के अनुसार, स्थानीय समयानुसार बुधवार सुबह 4 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे) से युद्धविराम लागू हो गया। यह युद्धविराम 60 दिनों की संक्रमण अवधि के साथ शुरू हुआ है, जिसके तहत इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाएंगे। इसके बदले में लेबनानी सेना लिटानी नदी के दक्षिण में 5,000 सैनिकों को तैनात करेगी।
समझौते के प्रमुख बिंदु
इजरायल का सेना वापसी का वादा: इजरायल 60 दिनों के भीतर अपनी सेना को वापस बुलाएगा।
लेबनानी सेना की तैनाती: लेबनान की सेना अपनी सीमा पर 33 चौकियों को सुरक्षित करने के लिए तैनात होगी।
हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया: इस्लामिक मिलिशिया हिजबुल्लाह और इसके समर्थक ईरान ने समझौते का स्वागत किया।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन: अमेरिका, फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों ने इस समझौते को लागू करने के लिए सहयोग देने का वादा किया है।
जो बाइडेन की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस समझौते की सफलता को 'शत्रुता समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम' बताया। उन्होंने जोर दिया कि यह युद्धविराम लेबनान की संप्रभुता को मजबूत करेगा। इजरायल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार होगा, अगर हिजबुल्लाह या अन्य संगठनों ने समझौते का उल्लंघन किया। इस समझौते के तहत कोई भी अमेरिकी सैनिक दक्षिणी लेबनान में तैनात नहीं होगा। बाइडेन ने लेबनान के लोगों के लिए इसे एक नई शुरुआत का संकेत बताते हुए कहा कि इस समझौते का पूरा क्रियान्वयन लेबनान के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकता है।
ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख
ईरान ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे 'इजरायल की आक्रामकता के अंत' की शुरुआत बताया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इसे स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है। हालांकि, इस युद्धविराम को एक कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों को विश्वास बहाली और दीर्घकालिक समझौतों पर काम करना होगा।
इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले 60 दिनों में यह समझौता कैसे लागू होता है और क्या यह संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त कर पाएगा।
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