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नाटो से दूरी बनाना मजबूरी या रणनीति? जेलेंस्की के बयान से मचा बवाल

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाटो सदस्यता को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी दूत स्टीवन विटकॉफ के अनुसार, जेलेंस्की ने मान लिया है कि यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं हो पाएगा। इस खुलासे के बाद राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच, यूक्रेन के नाटो में शामिल होने को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्य पूर्व के दूत स्टीवन विटकॉफ ने यह दावा किया है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को अब इस सच्चाई का एहसास हो चुका है कि उनका देश नाटो का सदस्य नहीं बन सकता।

यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर विराम

विटकॉफ ने अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक और जेलेंस्की ने 'काफी हद तक स्वीकार कर लिया है कि वे नाटो के सदस्य नहीं बनने जा रहे हैं।' उनके अनुसार, यदि भविष्य में रूस और यूक्रेन के बीच कोई शांति समझौता होता है, तो यूक्रेन को नाटो से बाहर रहना होगा।

विटकॉफ ने यह भी कहा कि यूक्रेनी नेतृत्व ने चुनाव कराने पर भी सहमति जता दी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। जब कार्लसन ने पूछा कि "क्या यूक्रेन में चुनाव होंगे?" तो विटकॉफ ने स्पष्ट जवाब दिया, "हां। वे इसके लिए सहमत हो गए हैं। यूक्रेन में चुनाव होंगे।"

यूक्रेन में चुनाव को लेकर बढ़ती चर्चाएं

यूक्रेन में 2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने थे, लेकिन रूस के साथ युद्ध के कारण वहां मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था, जिससे चुनाव स्थगित कर दिए गए। लेकिन अब, जब विटकॉफ के बयान सामने आए हैं, तो यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यूक्रेन के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई नया रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

याद दिला दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने एक महीने पहले जेलेंस्की को "बिना चुनाव वाला तानाशाह" करार दिया था, जिससे यूक्रेनी नेतृत्व की वैश्विक छवि पर असर पड़ा था। इस बयान के बाद अब जेलेंस्की के चुनाव को लेकर दिए गए संकेतों को एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच बातचीत: नया समीकरण?

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच फोन पर एक घंटे तक बातचीत हुई। यह बातचीत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ट्रंप की चर्चा के ठीक एक दिन बाद हुई थी। इस कॉल के बाद जेलेंस्की ने कहा कि "मुझे विश्वास है कि ट्रंप के नेतृत्व में इस साल स्थायी शांति हासिल की जा सकती है।"

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर संभावित अमेरिकी स्वामित्व को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि, बाद में जेलेंस्की ने इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह चर्चा सिर्फ रूस के कब्जे वाले जापोरिज्जिया प्लांट के संदर्भ में हुई थी।

यूक्रेन-रूस युद्ध विराम पर बड़ा फैसला?

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई बातचीत का लहजा पिछले महीने व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस से अलग था। इससे पहले, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बैठक की थी, जिसमें कई मुद्दों पर असहमति देखी गई थी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि दोनों देशों के बीच नए समझौते की संभावनाएं बन रही हैं।

गौरतलब है कि यूक्रेन और अमेरिका सऊदी अरब में 30-दिवसीय युद्ध विराम पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, व्लादिमीर पुतिन ने इसे तुरंत लागू करने से इनकार कर दिया है और सिर्फ यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने पर सहमति दी है।

क्या जेलेंस्की आंशिक युद्धविराम के लिए तैयार हैं?
ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान, जेलेंस्की ने संकेत दिया कि वह आंशिक युद्धविराम के लिए तैयार हो सकते हैं। इसमें ऊर्जा ढांचे, रेलवे और बंदरगाहों पर हमले रोकना शामिल होगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर रूस युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो यूक्रेन जवाबी कार्रवाई करेगा। ड्रोन और मिसाइलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जब तक रूस से कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।"

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यूक्रेन को नाटो से बाहर रखने का सौदा किया जाएगा? रूस पहले से ही यूक्रेन की नाटो सदस्यता का कड़ा विरोध करता आया है। अगर जेलेंस्की ने नाटो सदस्यता की उम्मीद छोड़ दी है, तो यह रूस के लिए एक कूटनीतिक जीत हो सकती है। इस बीच, अमेरिका की बाइडेन सरकार भी यूक्रेन पर भारी खर्च को लेकर दबाव में है। अगर ट्रंप फिर से सत्ता में आते हैं, तो वे यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता में कटौती कर सकते हैं।

यूक्रेन के लिए यह समय नाजुक और निर्णायक साबित हो सकता है। जेलेंस्की ने अब तक रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था, लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह युद्धविराम और राजनीतिक समझौते के लिए तैयार हो रहे हैं। अगर यूक्रेन वास्तव में नाटो की सदस्यता की दौड़ से बाहर होता है, तो यह युद्ध के भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में क्या जेलेंस्की और रूस के बीच कोई नया समझौता होता है या फिर युद्ध का सिलसिला जारी रहता है?
Source- IANS
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