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ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बीच रूस भाग सकते हैं खामेनेई! परिवार समेत 20 लोगों की टीम तैयार, जानें पूरा प्लान

ईरान में हिंसक प्रदर्शनों में 35 लोगों की मौत हो गई है. सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच खामेनेई देश छोड़कर भागने की फिराक में हैं.

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ईरान (Iran) में सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) देश छोड़ने की फिराक में हैं. इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई है. बताया जा रहा है खामेनेई ने रूस में सुरक्षित ठिकाना तलाश लिया है. जहां वो परिवार के साथ शिफ्ट हो जाएंगे. 

खामेनेई के देश छोड़ने का दावा ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ को मिली एक खुफिया रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान में प्रदर्शन नहीं थमे तो खामेनेई अपने उत्तराधिकारी समेत 20 लोगों के साथ रूस चले जाएंगे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि खामेनेई के साथ-साथ दूसरे नेताओं के रिश्तेदार भी अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में शिफ्ट हैं. 

खामेनेई के पास अरबों की दौलत 

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अली खामेनेई की कई चैरिटेबल संस्थाएं हैं. इनमें से सेताद का नाम प्रमुख है. इन फाउंडेशन की वैल्यू अरबों में आंकी गई है. रिपोर्ट में खुफिया तौर पर दावा किया गया है कि खामेनेई और अन्य नेताओं ने अपनी संपत्तियों को पहले ही सुरक्षित कर लिया है. ताकि, तुरंत देश छोड़ने की स्थिति में कोई प्रॉब्लम न हो.

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ईरान में क्यों हो रहे हिंसक प्रदर्शन? 

ईरान में आर्थिक बदहाली, गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं. ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. यानी रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है. महंगाई चरम पर पहुंच गई है, खाने पीने के सामान की कीमत आसमान छू रही हैं यहां तक कि दवाओं की कीमत भी 50% तक की बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ-साथ विरोध का कारण 62% टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव भी है.

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ईरान में आठ दिन से ये विरोध प्रदर्शन जारी हैं. जिसमें करीब 35 लोगों की मौत हो चुकी है. 78 शहरों की 200 से ज्यादा जगहों पर ये प्रदर्शन हो रहे हैं. जिसमें एक हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सख्त बयान सामने आया है, जिसने ईरानी शासन की चिंता और बढ़ा दी है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा. दरअसल, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं.

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