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'...लेकिन कहानी हम खत्म करेंगे', ईरान का इजरायल पर जोरदार पलटवार, 100 ड्रोन्स से किया अटैक

इजरायल की कार्रवाई के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने जवाबी हमला बोल दिया. ईरान की ओर से इजरायल पर दर्जनों मिसाइलें दागी गई हैं. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन मिसाइलों ने इजरायल के किन शहरों को निशाना बनाया और कितना नुकसान हुआ है. ईरानी सरकार से जुड़े एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर लिखा गया कि, "याद रखना, हमने शुरुआत नहीं की."

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मध्य पूर्व में युद्ध के बादल अब हकीकत में बदल गए हैं. लंबे समय से जिस टकराव की आशंका जताई जा रही थी, वह शुक्रवार की सुबह युद्ध के रूप में सामने आ गई. इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमला करते हुए सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया. हमले के तुरंत बाद ईरान में अफरातफरी मच गई और देश ने आपात कदम उठाते हुए तेहरान के एयरस्पेस को बंद कर दिया.

ईरान ने की जवाबी कार्रवाई 
इजरायली हमले में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसकी पुष्टि ईरान की सरकारी मीडिया ने भी की है. हमले के बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इसे "सीधी आक्रामकता" बताया और साक्ष्य पेश किए. इजरायल की कार्रवाई के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने जवाबी हमला बोल दिया. ईरान की ओर से इजरायल पर दर्जनों मिसाइलें दागी गई हैं. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन मिसाइलों ने इजरायल के किन शहरों को निशाना बनाया और कितना नुकसान हुआ है. ईरान ने पलटवार से पहले एक चेतावनी भी जारी की. ईरानी सरकार से जुड़े एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पोस्ट कर लिखा गया कि, "याद रखना, हमने शुरुआत नहीं की."

इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया है. ईरान नें अपने शक्तिशाली ड्रोन से इजरायल पर हमला बोला. जानकारी के मुताबिक ने अपने शाहेद-136 ड्रोन का इस्तेमाल किया है. ईरान की आक्रामकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने एक साथ 100 अधिक ड्रोन से इजरायल पर बम बरसाने की कोशिश की है. इजरायल ने भी इन हमलों को रोकने के लिए अपने डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिए हैं.

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ईरान ने दिखाई सख्ती, कहा- अब पीछे नहीं हटेंगे
मध्य-पूर्व में शुक्रवार को जो कुछ हुआ, उसने दुनिया को एक नए युद्ध की दहलीज़ पर ला खड़ा किया है.  इजरायल द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान पर किए गए हमले के बाद अब ईरान ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है, अब वो पीछे नहीं हटेगा. ईरान की सेना ने एक और तीखा संदेश जारी किया है. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सेना ने लिखा, "कभी भी किसी को युद्ध के लिए आमंत्रित ना करें, लेकिन यदि कोई आपको युद्ध के लिए बुलाता है, तो उसका उत्तर दें. क्योंकि जो लड़ने के लिए आमंत्रित करता है वह अत्याचारी होता है और अत्याचारी हमेशा पराजित होता है." यह बयान साफ बताता है कि ईरान अब संघर्ष को रोकने के मूड में नहीं है.

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युद्ध की घोषणा जैसी स्थिति
तेहरान में शुक्रवार तड़के हुए हमले के बाद ईरान ने आपातकाल की घोषणा कर दी है. वहीं, इजरायली मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है, जिससे यह साफ है कि इजरायल भी किसी जवाबी हमले की पूरी तैयारी कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, इजरायल के हमले में ईरानी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल मोहम्मद बाघेरी और IRGC कमांडर हुसैन सलामी मारे जा चुके हैं. यह ईरान के सैन्य ढांचे पर एक बड़ी चोट मानी जा रही है. अब तक इजरायल का सामना ईरान समर्थित गुटों जैसे हमास और हौती विद्रोहियों से होता रहा था, लेकिन अब पहली बार दोनों देश सीधे आमने-सामने आ गए हैं. यह संघर्ष अब सिर्फ मिडिल ईस्ट की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, इसके वैश्विक प्रभाव की संभावना है.

अब जंग होगी और तेज
ईरान की ओर से इजरायल पर की गई जवाबी कार्रवाई को महज़ पहला चरण माना जा रहा है. वहीं, इजरायल ने भी संकेत दे दिया है कि यह लड़ाई एक दिन में खत्म नहीं होने वाली. एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि, "हमला जारी रहेगा. यह कोई एकदिनी ऑपरेशन नहीं है." वही मौजूदा समय में ईरान की जवाबी कार्रवाई भले ही अभी सीमित हो, लेकिन उसकी तीव्रता और भाषा ने यह साफ कर दिया है कि वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है. ईरान की सैन्य कमान ने कहा है कि यह तो केवल शुरुआत है "अब हम पीछे नहीं हटेंगे."

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बताते चलें कि इस स्थिति के बाद दुनिया की निगाहें अब तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं. दोनों देशों की सेनाएं युद्ध की स्थिति में हैं, और अगर जल्द कोई डिप्लोमैटिक समाधान नहीं निकला, तो यह जंग पूरे क्षेत्र को भस्म कर सकती है. फिलहाल पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज़ हो गई है और वैश्विक बाजार पर भी इसके गंभीर असर के संकेत मिल रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित व्यापक युद्ध की आशंका से चिंतित है. यह संघर्ष सिर्फ इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता. जानकारों की माने तो अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह युद्ध एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन सकता है.

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