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ईरान में फिर सियासी उबाल... ‘मुल्ला देश छोड़ो’ के नारों संग प्रदर्शन, जानें अचानक खामेनेई के खिलाफ क्यों सड़क पर उतरी जनता

ईरान में महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. खामेनेई शासन के खिलाफ हो रही नारेबाजी के बीच पुलिस सख्ती से निपट रही है. झड़पों में अब तक 7 लोगों की मौत हुई है और तेहरान में 30 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए हैं.

ईरान में फिर सियासी उबाल... ‘मुल्ला देश छोड़ो’ के नारों संग प्रदर्शन, जानें अचानक खामेनेई के खिलाफ क्यों सड़क पर उतरी जनता
Ali Khamenei (File Photo)
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ईरान में सर्द मौसम के बीच सियासी और सामाजिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ खुला विरोध जता रहे हैं. राजधानी तेहरान में सुरक्षा सख्त किए जाने के बाद प्रदर्शन कुछ हद तक कम जरूर हुए हैं, लेकिन ईरान के सुदूर इलाकों में गुस्सा और तेज होता दिख रहा है. कई प्रांतों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनकी वजह महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है.

खामेनेई शासन हो रहा बड़ा प्रदर्शन 

इन प्रदर्शनों से निपटने के लिए खामेनेई शासन की पुलिस सख्ती का रास्ता अपना रही है. कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं. अब तक इन घटनाओं में 7 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. तेहरान में प्रशासन ने व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते 30 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार भी किया है. सरकार का कहना है कि ये लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे.

खामेनेई को लेकर हो रही नारेबाजी 

इन प्रदर्शनों की सबसे खास बात है खुलकर लगाए जा रहे नारे. सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में लोग ‘जब तक मुल्ला नहीं भागेंगे, हमारा ईरान आजाद नहीं होगा’ और ‘मुल्लों को जाना होगा’ जैसे नारे लगाते दिख रहे हैं. ईरान जैसे देश में, जहां आमतौर पर इस तरह की खुली नारेबाजी दुर्लभ मानी जाती है, इसे सीधे तौर पर खामेनेई शासन के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. जानकार मानते हैं कि यह गुस्सा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ जमा हुआ असंतोष भी है. दरअसल, इन नए प्रदर्शनों की जड़ें 27 दिसंबर को हुई एक हड़ताल से जुड़ी हैं. तेहरान के कुछ दुकानदारों ने महंगाई और आर्थिक अस्थिरता के विरोध में अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे. यह विरोध धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों तक फैल गया. जब पुलिस ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्ती दिखाई, तो हालात और बिगड़ गए. आम लोगों का गुस्सा सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा.

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2022 में भी चुके हैं ऐसे प्रदर्शन 

ईरान में इससे पहले साल 2022 में भी हालात बेकाबू हो गए थे. उस समय 22 साल की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. महसा अमिनी को कथित तौर पर हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. परिवार और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस की ज्यादती के चलते उसकी मौत हुई. उस घटना ने पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई दी थी. इस बार भी विरोध केवल तेहरान तक सीमित नहीं है. राजधानी से करीब 300 किलोमीटर दूर अजना शहर में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं. वहां से सामने आए वीडियो में लोग आगजनी करते, पत्थरबाजी करते और ‘शर्म करो, शर्म करो’ के नारे लगाते नजर आ रहे हैं. कई वीडियो में फायरिंग की आवाजें भी सुनी जा सकती हैं. ईरान की अर्ध सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने अपनी रिपोर्ट में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है.

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बताते चलें कि सुदूर इलाकों में हालात इसलिए भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि वहां सुरक्षा बलों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना कठिन हो रहा है. कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों पर धावा बोला और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है. कुल मिलाकर ईरान में बढ़ता यह विरोध शासन के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि खामेनेई सरकार इस गुस्से को बातचीत से शांत करती है या सख्ती का रास्ता और तेज होता है.

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