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बड़े खुद्दार निकले प्रवासी भारतीय… ठुकराई सरकारी मदद, खुद के बल पर बनाई शोहरत, ट्रंप की ही रिपोर्ट में खुलासा

भारतीय प्रवासी बोझ नहीं बल्कि Assets हैं. अमेरिका ने हाल ही में रिपोर्ट जारी की है. जिसमें भारतीयों ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते हुए US को मालामाल करने में अहम भूमिका निभाई है.

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भारतीय लोग कमाई खाने वाले नहीं बल्कि कमाई करने और करवाने वाले हैं. इसकी पुष्टि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने की है. उन्होंने एक ऐसी लिस्ट शेयर की. जिसमें भारतीय का नाम नहीं है और ये ही बात भारतीयों के फेवर में जाती है. दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर उन देशों के अप्रवासियों की लिस्ट साझा की है. जो अमेरिका में रहकर यहां की सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाते हैं. 

पाकिस्तान, भूटान, चीन, बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों का नाम इस लिस्ट में है, लेकिन भारत का नहीं. इस लिस्ट को जारी करने का मकसद अमेरिका में अप्रवासियों को मिलने वाली वेलफेयर और सहायता की दरों को उजागर करना है. यानी लिस्ट में जिन देशों का नाम है उनके अप्रवासी अमेरिका में सबसे ज्यादा मदद लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर ये दो पेज की लिस्ट साझा की है. 

40 से 80 फीसदी तक योजनाओं का फायदा उठा रहे प्रवासी

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यह लिस्ट अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है. ये आंकड़े दो टेबल में दिखाए गए हैं, जो अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं. 

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पहले पायदान पर कौनसा देश? 

इस लिस्ट में सबसे ऊपर भूटान है. भूटानी प्रवासियों के अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 फीसदी है. 

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इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी
सोमालिया 71.9 फीसदी 
मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी 
डोमिनिकन रिपब्लिक 68.1 फीसदी
अफगानिस्तान 68.1 फीसदी

जबकि कांगो 66 फीसदी, गिनी 65.8 फीसदी और इराक 60.7 फीसदी पर हैं. इस समूह में खासतौर से कई सेंट्रल अमेरिकन, कैरिबियन और अफ्रीकी देश शामिल हैं. ग्वाटेमाला 56.5 फीसदी, सूडान 56.3 फीसदी और अल साल्वाडोर 55.4 फीसदी पर दिखाए गए हैं. होंडुरास 52.9 फीसदी पर है. 

बांग्लादेश और चीन किस पायदान पर? 

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इस लिस्ट में बांग्लादेश और चीन भी शामिल है. बांग्लादेश 54.8 फीसदी तक अमेरिकी सरकारी सुविधाओं का फायदा लेता है. जबकि चीन 32.9 फीसदी पर लिस्टेड है. इसके अलावा पाकिस्तान (40.2 प्रतिशत), नेपाल (34.8 प्रतिशत), इज़राइल/फिलिस्तीन (25.9 प्रतिशत), यूक्रेन 42.7 प्रतिशत और एशिया (कहीं और वर्गीकृत नहीं/निर्दिष्ट नहीं) 38.8 प्रतिशत. इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं जिनमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है. आइवरी कोस्ट इस लिस्ट में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं. सीरिया 48 फीसदी पर लिस्टेड है. 

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जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8 फीसदी पर हैं. इथियोपिया 47.6 फीसदी, रवांडा 47.1 फीसदी और मोरक्को 46.6 फीसदी पर दिखाए गए हैं जबकि मिस्र 39.3 फीसदी पर शामिल हैं. अमेरिका में प्रवासी और कल्याण के मुख्य राजनीतिक मुद्दे हैं, और भारत इनमें काफी चर्चा में रहता है. इसके बावजूद भी लिस्ट में इसकी गैर-मौजूदगी है. 

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कमाई में सबसे आगे भारतीय 

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पब्लिक रिसर्च से पता चला है कि अमेरिका में भारतीय प्रवासी सभी समूहों में सबसे ज्यादा कमाने वालों में से हैं. वे वर्कफोर्स में ज्यादा भागीदारी और सरकारी मदद पर कम निर्भरता भी दर्ज करते हैं. इंडस्ट्री और एकेडमिक स्टडीज से यह भी पता चला है कि भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में, खासकर तकनीक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग में, एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. वे इनकम टैक्स रेवेन्यू में अहम योगदान देते हैं और सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स शुरू करने में शामिल रहे हैं. 

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