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सबसे तेज दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी… अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश भी रह जाएंगे पीछे!

एक बार फिर इंडियन GDP अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ने को तैयार है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में ये बड़ा खुलासा हुआ है.रिपोर्ट के अनुसार चुनौतीपूर्ण ग्‍लोबल इकोनॉमिक नजरिए के बीच, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.3 प्रतिशत की ग्रोथ होगी. भारत का इकोनॉमिक परफॉर्मेंश अन्‍य प्रमुख इकोनॉमी वाली देशों की तुलना में अलग है.

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17 May 2025
( Updated: 10 Dec 2025
11:38 PM )
सबसे तेज दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी… अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश भी रह जाएंगे पीछे!
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भारत की इकोनॉमी तेजी से ग्रो करने वाली है. संयुक्त राष्ट्र  का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा. चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ सभी इसके पीछे रहने वाले हैं. बाकी देशों की इकोनॉमी भी भारत से धीमी गति से आगे बढ़ेगी करेगी. संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे वक्‍त पर आई है, जब भारत-पाकिस्‍तान में जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ा हुआ है. इसके अलावा टैरिफ की वहज से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी मंडरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से जारी विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाओं पर मिड ईयर रिपोर्ट में ये बड़ा अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार चुनौतीपूर्ण ग्‍लोबल इकोनॉमिक नजरिए के बीच, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.3 प्रतिशत की ग्रोथ होगी. भारत का इकोनॉमिक परफॉर्मेंश अन्‍य प्रमुख इकोनॉमी वाली देशों की तुलना में अलग है. 

अमेरिका और चीन की इकोनॉमी में कितनी ग्रोथ?
इस रिपोर्ट में अमेरिका और चीन का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुमान से पता चलता है कि चीन 4.6 फीसदी और अमेरिका 1.6 फीसदी के साथ ग्रो करेगा, वहीं जापान 0.7 फीसदी और यूरोपीय संघ की मामूली 1 फीसदी की दर से इकोनॉमी में ग्रोथ देखने को मिलेगा. इधर जर्मनी में -01% की निगेटिव ग्रोथ होने का अनुमान है. फिर भी डेवलपमेंट अनुमानों को पहले के आंकड़ों की तुलना में 30 बेसिस पॉइंट से नीचे संशोधित किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्‍लोबल इकोनॉमी में धीमी ग्रोथ का संकेत दिखाई दे रहा है, जिसका कारण बढ़ते व्‍यापार तनाव और नीतिगत अन‍िश्चितताएं हैं.

भारत की इकोनॉमी में तेजी की वजह क्या है? 
WESP ने हाल ही में अपने 2026 के अनुमान को 30 बेसिस पॉइंट से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है. इसके बावजूद, भारत कंजम्‍प्‍शन और सरकारी एक्‍सपेंडेचर की बदौलत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है. 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाओं की रिपोर्ट के अपडेट ने बढ़ते व्यापार तनाव और नीति अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर सतर्क नजरिए रखा है. 

टैरिफ का पड़ रहा असर 
रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत निजी खपत, ठोस पब्लिक निवेश और मजबूत सर्विस एक्‍सपोर्ट आर्थिक विकास के प्रमुख रोल प्ले करेंगे. जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के बढ़ते टैरिफ से व्यापारिक निर्यात पर दबाव पड़ रहा है, वर्तमान में छूट प्राप्त क्षेत्र - जैसे फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और तांबा - आर्थिक प्रभाव को सीमित कर सकते हैं, हालांकि ये छूट स्थायी नहीं हो सकती हैं. 
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्थिर आर्थिक स्थितियों के कारण नौकरी बाजार में बेरोजगारी का स्तर स्थिर बना हुआ है. भारत में नौकरी का डेटा गुरुवार (15 मई, 2025) को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहली बार मासिक आधार पर गणना की गई देश की बेरोजगारी दर इस साल अप्रैल में 5.1% दर्ज की गई. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने वास्तविक समय में पात्र कार्यबल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत की अधिक बारीकी से निगरानी करने के लिए मासिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) की शुरुआत की है.

बता दें कि इससे पहले, श्रम बल सर्वेक्षण केवल तिमाही और वार्षिक आधार पर जारी किया जाता था. वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) के नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल 2025 में सभी आयु समूहों के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 5.1% होगी.मेल में बेरोजगारी दर 5.2% पर थोड़ी ज़्यादा रही, जो महिलाओं की 5% दर से थोड़ी ज्‍यादा है. 15-29 आयु वर्ग के व्यक्तियों में बेरोजगारी दर देश भर में 13.8% दर्ज की गई, शहरी क्षेत्रों में यह दर 17.2% रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 12.3% रही.

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