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America के वॉशिंगटन में भारतीय छात्र को गोलिंयों से भूना, क्या ट्रंप काम पर लग गए !
ग्रीन हिल्स कॉलोनी, आरके पुरम, हैदराबाद के निवासी रवि तेजा मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए मार्च 2022 में अमेरिका गए थे. रवि तेजा ने हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी की थी और जॉब की तलाश में थे. स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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अमेरिकी सरकार ने भारत पर गैर-मददगार होने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में कहा था कि अवैध प्रवासियों को बाहर निकालकर फेंकेंगे। डेढ लाख लोगों की लिस्ट बनकर तैयार है। जिनमें से 18 हजार लोगों को अमेरिकी सरकार बाहर करने की तैयारी पूरी कर चुकी है। H1B वीजा को लेकर अमेरका पहले ही भारत को झटका दे चुका है। साथ ही अमेरिका में रंग भेद बहुत ज्यादा है। तो एक तो रंग भेद दुसरा अवैध प्रवास और तीसरा ट्रंप का अवैध प्रवास को लेकर कड़ा रुख। इस सबसे कारण अमेरिका में लगातार भारतीयों की हत्या की जा रही है।
ट्रंप वॉशिंगटन में शपथ लेंगे और इसी वॉशिंगटन एवेन्यू में एक भारतीय छात्र को गोलिंयों से भून दिया गया। ट्रंप की शपथ से पहले भारतीय छात्र की हत्या से हिंदुस्तान स्तब्द है। क्योंकि भारतीय छात्रों पर ये पहला हमला नहीं है।भारतीय छात्र रवि तेजा हैदराबाद के निवासी थे, मास्टर की डिग्री हासिल करने के लिए अमेरिका गए थे, डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी की तलाश में थे। लेकिन इसी बीच ये हमला हो गया। रवि तेजा के परिवार का कहना है कि बेटा कैसे गया था और कैसे आ रहा है। परिवार ने बताया कि उन्हें सोमवार सुबह सूचना मिली कि अज्ञात हमलावरों ने उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। तेजा की हत्या क्यों की गई किसने की। इस बारे में अभी तक किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। तेजा की मौत के बारे में हैदराबाद के स्थानीय अधिकारियों की तरफ से भी अब तक कोई स्पस्ट जानकारी नहीं दी गई है।
रवि तेजा की अचानक हुई मौत से परिवार गहरे सदमे और शोक में डूब गया है।तो ये तो रहा रवि तेजा का मामला, जो उसी दिन हुआ है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेंगे। और उनकी नीतियां क्या है उसे हर कोई जानता है। लेकिन भारत के लिए बेहद चिंता की बात ये है कि ये पहली हत्या नहीं है। इससे पहले शिकागो के पास तेलंगाना के एक और छात्र की हत्या कर दी गई थी। ये युवक मात्र 22 साल का था। ये छात्र गैस स्टेशन पर काम करता था, भारत में बीबीए करने के बाद एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए थे, वहीं डिग्री लेकर नौकरी करने लगे थे। अभी रुकिए ये सिर्फ दो मामले नहीं है। इस साल अमेरिका में अब तक 11 भारतीय या भारतीय मूल के छात्रों की मौत हो चुकी है। फिर भी भारतीय छात्र अमेरिकी डिग्री की तरफ ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे है। जबकि ट्रंप का मानना है कि पहले अमेरिकी को नौकरी मिलनी चाहिए उसके बाद उस पर किसी और का हक है, एक आंकड़े के मुताबिक साल 2022-23 में करीब 267,000 भारतीयों ने अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ में दाखिला लिया।
इस आंकड़े के साल 2030 तक दस लाख तक पहुंचने का अनुमान है। ये तो रहा अमेरिका का मामला, लेकिन दुनिया की स्थिति भी भारतीयों के लिए कोई बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में बताया था कि पिछले तीन सालों में दुनिया भर में 86 भारतीयों की मौत हुई है। 2021 में 29, 2022 में 57 और 2023 में 86 ऐसे मामले हुए। यानी तीन सालों में मौतों के मामले बढ़े।साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में सामने आए कुल 86 मामलों में से अमेरिका में 12 जबकि कनाडा, ब्रिटेन और सऊदी अरब में 10-10 मामले सामने आए थे।लेकिन फिर भी भारतीय विदेशों का रुख ज्यादा कर रहे है।लेकिन शायद ट्रंप के आने के बाद भारतीय़ों को समझना होगा कि अमेरिका का कोई भी राष्ट्रपति हो। वो भारत का करीबी हो या कम करीबी हो। सबसे लिए सबसे पहले अमेरिका है। ट्रंप ने भी कमस खाई है कि Make America great Again बनाना है। तो अमेरिका शायद भारतीयों के लिए अब उतना सुरक्षित नहीं रह गया है। इस पर भारत सरकार और भारतीय दोनों को गौर करना होगा।
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