×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

'भारत यूनिक, टेक पावर, आत्मनिर्भर देश', US सांसदों ने ट्रंप को चेताया, कहा- PM मोदी वर्ल्ड के सबसे लोकप्रिय लीडर

अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को भारत के साथ संबंधों को लेकर चेता दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से भारत की तुलना नहीं कर सकते हैं. भारत आपको यहां निवेश लाता भी है, सिर्फ लेता नहीं. भारत टेक पावर है, $80 मिलियन में चांद पर पहुंच गया, इतने में तो बिल्डिंग नहीं बना सकता अमेरिका.

Author
13 Jan 2026
( Updated: 13 Jan 2026
04:34 AM )
'भारत यूनिक, टेक पावर, आत्मनिर्भर देश', US सांसदों ने ट्रंप को चेताया, कहा- PM मोदी वर्ल्ड के सबसे लोकप्रिय लीडर
Ami Bera, Rich McCormick / CSIS (Screengrab)
Advertisement

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार व्हाइट हाउस में आने के बाद से भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव देखे जा रहे हैं. टैरिफ-ट्रेड डील ऐसे फैक्टर्स हैं जिस पर तो मतभेद हैं हीं, लेकिन ट्रंप के बड़बोले बयान, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में अपमानजनक स्टेंटमेंट्स और द्विपक्षीय मुद्दों में हस्तक्षेप की कोशिश ने दिल्ली-वॉशिंगटन के बीच रिश्तों में दरार पैदा कर दी है. इसी बीच अमेरिकी कांग्रेसमैन्स ने खुलकर दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की वकालत की है. मसलन भारत की टेक पावर की बात करते हुए कांग्रेसमैन रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत ने बहुत कम लागत में चंद्रमा के उस हिस्से पर अंतरिक्ष यान भेज दिया, जहां पहले कोई नहीं पहुंचा था. यह भारत की कुशल तकनीक को दिखाता है.

अमेरिकी कांग्रेसमैन्स ने माना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ समय से मतभेद बने हुए हैं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इन छोटे-मोटे विवादों के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते लंबी अवधि में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर ही टिके हुए हैं. उनका कहना है कि शुल्क, वीजा और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे अस्थायी हैं. 

भारत-अमेरिका संबंधों में बनी हुई है मजबूती:  अमी बेरा

सीएसआईएस के एक इवेंट में बोलते हुए, रिप्रेजेंटेटिव अमी बेरा ने कहा कि बीच-बीच में तनाव ज़रूर आता है, लेकिन भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा मजबूत बनी हुई है. उन्होंने बताया कि कारोबारी वर्ग लंबी सोच के साथ काम करता है और हालात को अच्छी तरह समझता है.

Advertisement

अमी बेरा ने भारत यात्रा के दौरान की एक घटना याद करते हुए कहा कि उस समय वीजा और शुल्क को लेकर कई समस्याएं सामने आई थीं. एच-वन-बी वीजा और भारी शुल्क जैसे मुद्दों से तनाव बढ़ा था, लेकिन इसके बावजूद सच्चाई यही है कि दोनों पक्ष बड़ी तस्वीर को समझते हैं.

भारत निवेश के लिए यूएस कंपनियों की पहली पसंद: अमी बेरा

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिकी कंपनियां निवेश के लिए भारत को ही अपनी पहली पसंद मानती हैं. उनका कहना था कि अमेरिका की बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश भारत में कर रही हैं, न कि किसी दूसरे पड़ोसी देश में.

वहीं दूसरे अमेरिकी प्रतिनिधि रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि आर्थिक मतभेदों को केवल झगड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि व्यापक रणनीतिक दृष्टि से समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि संतुलन जरूरी है, लेकिन हर मामले में पूरी बराबरी संभव नहीं होती, जैसे वैवाहिक जीवन में भी पूरी समानता नहीं होती.

Advertisement

टैरिफ पेनाल्टी गलत है: रिच मैककॉर्मिक

रिच मैककॉर्मिक ने बताया कि वे व्यापार के समर्थक हैं और दंडात्मक शुल्कों के पक्ष में नहीं हैं. उनके अनुसार ज्यादा शुल्क पूंजी के विकास में बाधा बनते हैं. उन्होंने कहा कि खुले व्यापार से अंततः समाज को लाभ होता है. जब व्यापार अच्छा होता है तो लोगों की जिंदगी बेहतर होती है और तरक्की के अवसर बढ़ते हैं.

भारत निवेश लाता है, पाकिस्तान नहीं, तुलना नहीं कर सकते: रिच मैककॉर्मिक

कृषि के मुद्दे पर भी दोनों सांसदों ने बात की, जो भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में हमेशा संवेदनशील विषय रहा है. मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत जैसी बड़ी आबादी वाला देश कृषि के मामले में आत्मनिर्भर है, जो अपने-आप में बड़ी बात है, हालांकि कुछ विशेष क्षेत्रों में अभी संभावनाएं हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत की पाकिस्तान से तुलना ठीक नहीं हो सकता है. पाकिस्तान आपके यहां इन्वेस्टमेंट नहीं लाता है, भारत जबकि आपके यहां निवेश और जॉब लेकर भी आता है, सिर्फ निवेश लेता ही नहीं है.

अमी बेरा ने कहा कि भारत में कृषि से जुड़े फैसले आसान नहीं होते, क्योंकि बड़ी संख्या में छोटे किसान इससे जुड़े हैं और नीतियों को लेकर विरोध भी होता रहा है. मैककॉर्मिक ने यह भी कहा कि भारत की बड़ी आबादी और विकास की गति उसे लंबे समय में विशेष लाभ देती है. उन्होंने कहा, "भारत दुनिया की सिर्फ़ दो जगहों में से एक है जहां की आबादी अभी भी बढ़ रही है."

Advertisement

भारत बहुत कम में मून के साउथ पोल पर पहुंचा, ये उसकी टेक पावर: मैककॉर्मिक

उन्होंने भारत की तकनीकी क्षमता का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने बहुत कम लागत में चंद्रमा के उस हिस्से पर अंतरिक्ष यान भेज दिया, जहां पहले कोई नहीं पहुंचा था. यह भारत की कुशल तकनीक को दिखाता है.

अमी बेरा ने कहा कि कूटनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यापार और निवेश के आंकड़े लगातार बढ़ोतरी दिखा रहे हैं, जो यह साबित करता है कि आर्थिक सहयोग जारी है. उन्होंने कहा, "आप अभी भी ट्रेड और इन्वेस्टमेंट पर हाई-फ्रीक्वेंसी डाटा देख सकते हैं जो अभी भी असली बढ़ोतरी दिखा रहा है."

ट्रेड डील पर भारत अपनी जरूरतों से आगे समझौता नहीं करेगा: मैककॉर्मिक

Advertisement

अमेरिकी सांसदों ने यह भी माना कि भारत की अपनी घरेलू ज़रूरतें और सीमाएं हैं, खासकर ऊर्जा के मामले में. रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि सस्ता रूसी तेल खरीदना भारत के लिए आर्थिक मजबूरी है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने कहा, "वह यह अपने देश के सबसे अच्छे हित के लिए कर रहे हैं ताकि वह सस्ती एनर्जी से अपनी इकॉनमी को बढ़ा सकें."

यह भी पढ़ें

दोनों सांसदों ने साफ कहा कि तमाम मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच सहयोग का तर्क बहुत मजबूत है. उनका मानना है कि दोनों देश तात्कालिक लाभ नहीं, बल्कि लंबी दूरी की साझेदारी पर ध्यान दे रहे हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें