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भारत की ट्रेड डील्स से निकला पाकिस्तान का दम... कॉटन एक्सपोर्ट पर मंडराया संकट, चिंता में शहबाज सरकार

भारत की यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुई नई ट्रेड डील्स से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगने के संकेत हैं. इन समझौतों के चलते भारत के निर्यात पर टैरिफ घटा है, जबकि पाकिस्तान को अब भी ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ रहा है.

भारत की दो डील से चिंता में पाकिस्तान
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भारत की लगातार मजबूत होती वैश्विक व्यापार नीति का असर अब पड़ोसी पाकिस्तान पर साफ दिखाई देने लगा है. पहले यूरोपीय संघ और अब अमेरिका के साथ हुई अहम ट्रेड डील्स से पाकिस्तान के कॉटन और कपड़ा उद्योग को बड़ा झटका लगने के आसार बन गए हैं. जानकारों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो वैश्विक बाजार में पाकिस्तान की पकड़ और कमजोर हो सकती है.

दो डील से कमजोर होगा पाकिस्तान 

भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ जिस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, उसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है. इस समझौते के तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को यूरोपीय बाजार में बिना किसी इम्पोर्ट ड्यूटी के एंट्री मिलेगी. वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भी भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ में बड़ी कटौती की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इन दोनों फैसलों ने पाकिस्तान के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है.

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क्यों चिंता में आया पाकिस्तान?

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पाकिस्तान की अखबार ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉटन जिनर्स फोरम के अध्यक्ष एहसानुल हक (Ehsanul Haque) ने सरकार को आगाह किया है. उन्होंने कहा है कि यदि कॉटन और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. हक का मानना है कि पॉलिसी में देरी से क्षेत्रीय स्तर पर लागत का अंतर और बढ़ेगा, जिसका सीधा फायदा भारत जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को मिलेगा. उद्योग जगत की चिंता तब और गहरी हो गई, जब यूरोपीय संघ ने भारतीय उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य कर दी. इसके साथ ही अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है.

खराब दौर से गुजर रहा कॉटन और कपड़ा उद्योग

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इसके उलट पाकिस्तान के उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अब भी करीब 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. जानकारों का कहना है कि यह छोटा सा अंतर भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ी भूमिका निभाता है और इससे भारत को कीमत के मोर्चे पर बढ़त मिल जाती है. पाकिस्तान का कॉटन और कपड़ा उद्योग पहले से ही ऊर्जा लागत, टैक्स बोझ और रिफंड में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में भारत को मिलने वाली टैरिफ छूट ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार स्वाभाविक रूप से सस्ते और स्थिर सप्लायरी विकल्प की ओर झुकते हैं, और मौजूदा हालात में भारत यह बढ़त हासिल करता नजर आ रहा है.

नहीं मिल रहा रिफंड 

कॉटन जिनर्स फोरम ने पाकिस्तान सरकार से साफ मांग रखी है कि उत्पादन लागत को पड़ोसी देशों के स्तर पर लाया जाए. इसके लिए लंबित रिफंड तुरंत जारी करने या उन्हें सुपर टैक्स लायबिलिटी के साथ एडजस्ट करने की बात कही गई है. उनका तर्क है कि जब तक लागत और नीतिगत माहौल प्रतिस्पर्धी नहीं बनेगा, तब तक निर्यात में सुधार मुश्किल है. उधर भारत के लिए यह दौर अवसरों से भरा माना जा रहा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत पहले से ही यूरोपीय संघ के साथ व्यापार अधिशेष की स्थिति में है. एफटीए लागू होते ही भारतीय निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और अगले पांच वर्षों में निर्यात के दोगुना होने की संभावना जताई जा रही है.

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बताते चलें कि भारत की मजबूत होती ट्रेड डील्स ने वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ किया है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह एक चेतावनी की घंटी साबित हो रही है. अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो पड़ोसी मुल्क को इसका लंबा और गहरा असर झेलना पड़ सकता है.

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