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डी-डॉलराइजेशन पर भारत का रुख साफ, जानिए डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर जयशंकर ने क्या कहा

दोहा फोरम 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी डॉलर पर भारत के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत डी-डॉलराइजेशन का समर्थक नहीं है और ब्रिक्स की साझा मुद्रा पर फिलहाल कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बीच जयशंकर ने भारत की संतुलित कूटनीति का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की जटिल वास्तविकताओं को समझते हुए भारत नवोन्मेषी और स्वतंत्र कूटनीति को बढ़ावा दे रहा है।

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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 7 दिसंबर 2024 को दोहा फोरम में एक महत्वपूर्ण बयान देकर वैश्विक कूटनीति और 'डी-डॉलराइजेशन' पर भारत के रुख को स्पष्ट किया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच साझा मुद्रा की संभावना और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत अमेरिकी डॉलर को सीमित करने के किसी भी प्रयास का समर्थक नहीं है और न ही ब्रिक्स के साझा मुद्रा पर कोई ठोस प्रस्ताव है।
डॉलर के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट
दोहा फोरम में जयशंकर ने अपने विचारों को खुलकर साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत का उद्देश्य कभी भी अमेरिकी डॉलर को कमजोर करना या उसे सीमित करना नहीं रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स के अन्य देशों के साथ इस मुद्दे पर भारत का रुख समान नहीं है और अभी तक साझा मुद्रा का कोई ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आया है।

जयशंकर ने डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के बारे में भी टिप्पणी की। ट्रंप ने अमेरिका की आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देने वाले किसी भी प्रयास के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया देने की बात कही थी। इस पर जयशंकर ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत डी-डॉलराइजेशन का समर्थक नहीं है।
कूटनीति में नवाचार और भारत का नेतृत्व
जयशंकर ने अपने भाषण में भारत की कूटनीतिक सोच को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में कूटनीति को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखना सही नहीं है। उन्होंने नवोन्मेषी और भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उनके अनुसार, दुनिया में बढ़ते तनाव और संघर्षों को देखते हुए, देशों को पश्चिमी शक्तियों पर निर्भरता कम करने और अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का दृष्टिकोण वैश्विक शक्ति संतुलन को समायोजित करने में मदद करना है। जयशंकर के मुताबिक, भारत इस दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।

ब्रिक्स के साझा मुद्रा की चर्चा कई सालों से चल रही है, लेकिन यह अब तक केवल एक विचार ही रहा है। जयशंकर ने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच इस मुद्दे पर विचारधारा में स्पष्ट मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं, और ये हित ब्रिक्स जैसे समूहों के भीतर भी भिन्न हो सकते हैं। जयशंकर का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत साझा मुद्रा जैसे मुद्दों पर तटस्थ रुख अपना रहा है और इस विषय पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहता।
ट्रंप की चेतावनी और भारत का जवाब
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी को लेकर जयशंकर ने कोई आक्रामक रुख नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के पीछे का मकसद स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत का दृष्टिकोण हमेशा संतुलित और तर्कसंगत रहा है। जयशंकर के इस बयान से यह साफ हो गया कि भारत अमेरिकी डॉलर की मौजूदा स्थिति को चुनौती देने की मंशा नहीं रखता। इसके बजाय, भारत का ध्यान अधिक व्यापक और वैश्विक कूटनीति पर केंद्रित है। दोहा फोरम के दौरान जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया बहुत जटिल और बारीक है। हर देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी रणनीति बनाता है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी एक ही देश अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग संयोजनों के साथ काम करता है।

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अपनी कूटनीति में पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई रणनीतियों को अपना रहा है। भारत की यह सोच न केवल उसकी स्वतंत्रता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका का भी संकेत देती है।

जयशंकर के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका को लेकर बेहद सतर्क और विवेकपूर्ण है। डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और ब्रिक्स की साझा मुद्रा पर चर्चा के बीच भारत का रुख दिखाता है कि वह संतुलन बनाए रखने और अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने में विश्वास करता है।
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