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भारत ने अमेरिका को दिखाई उसकी औकात, खुल गई ट्रंप की पोल, इस चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिला डाला

भारत का जून महीने में घाटा कम होकर 18.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि मई महीने में 21.88 अरब डॉलर था. इससे देश की इकोनॉमी को जबरदस्त लाभ मिला है और विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.

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टैरिफ दर से पूरी दुनिया में उथल- पुथल मचाने वाले अमेरिका को भारत ने करारा झटका दिया है. ट्रंप जिस टैरिफ के दम पर  अपनी अकड़ दिखा रहे हैं. उसी में भारत ने उनकी पोल खोल कर रख दी है. भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को जो आंकड़े पेश किए हैं. उसने अमेरिका को उसकी औकात याद दिला दी है. अमेरिकी टैरिफ की पोल इस तरह से खुल जाएगी, किसी को भी नहीं पता था. तो चलिए विस्तार से समझते हैं कि कैसे भारत ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. आखिर इस आंकड़े से देश की जीडीपी पर कितना फर्क पड़ता है?

भारत की इकोनॉमी में जबरदस्त लाभ देखने को मिला

बता दें कि भारत का जून महीने में घाटा कम होकर 18.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि मई महीने में 21.88 अरब डॉलर था. इससे देश की इकोनॉमी को जबरदस्त लाभ मिला है और विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी भी देखने को मिली है. 

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जून में कैसा रहा भारत का आयात और निर्यात ? 

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भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़े के मुताबिक, भारत का व्यापारिक निर्यात जून में घटकर 35.14 अरब डॉलर रह गया, वहीं मई महीने में यह आंकड़ा 38.73 अरब डॉलर था. दूसरी तरफ देश का इंपोर्ट घटकर 53.92 अरब डॉलर रह गया, जो मई में 60.61 अरब डॉलर था. वहीं कुल मिलाकर देखा जाए, तो भारत ने जून 2024 में 35.20 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया था, वहीं आयात कुल 56.18 अरब डॉलर का रहा, इससे करीब 21 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ. पिछले महीने व्यापारिक वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 67.98 अरब डॉलर रहा, जबकि वस्तुओं और सेवाओं का आयात 71.50 अरब डॉलर रहा. जून में शुद्ध व्यापार घाटा 3.51 अरब डॉलर रहा.

भारत के निर्यातकों को ग्लोबल टेंशन से बड़ा नुकसान 

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भारत के लिए साल 2025 ट्रेड टेंशन के रूप में दिखा. अब तक के 6 महीने में देश का ग्लोबल ट्रेड टेंशन से प्रभावित रहा है. इसमें भारत के निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ, भारत-पाकिस्तान संघर्ष और जून में ईरान- इजराइल के हमले की संभावनाओं से जूझना पड़ा है. वहीं इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट से होकर शिपिंग को बाधित कर दिया, जो भारत के ऊर्जा और कंटेनर व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव देखने को मिला है.

ट्रंप के टैरिफ से बड़ी अनिश्चितता 

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा प्रस्तावित टैरिफ उपायों ने व्यापार अनिश्चितता को और भी ज्यादा गहरा कर दिया है, जिसकी वजह से लागत बढ़ गई है. कोर मार्केट में भारत के निर्यातकों की मार्केट रीच काफी सीमित हो गई है. भारत सरकार के वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने पिछले महीने बताया था कि वैश्विक संघर्ष और अनिश्चितताएं भारतीय निर्यात को प्रभावित कर रही हैं, हालांकि, सरकार शिपिंग और बीमा से संबंधित निर्यातकों की चिंताओं को दूर करने के लिए काफी सजगता से सक्रिय रूप से काम कर रही है.

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में 

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में हैं, जो भारतीय निर्यात पर हाई अमेरिकी टैरिफ को रोकने में मदद कर सकता है. अमेरिका द्वारा सभी शुल्कों को प्रभावी होने से रोकने के लिए 1 अगस्त तक समझौते पर हस्ताक्षर होना आवश्यक है. हालांकि, डेयरी और कृषि जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र भारत के लिए अभी भी अड़चन बने हुए हैं. वहीं भारत, मार्केट रीच बढ़ाने, टैरिफ में कटौती करने और टेक एवं रिन्युएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को तेज कर रहा है. 

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