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भारत-पाकिस्तान सीजफायर 18 मई तक, इशाक डार ने किया दावा, क्या फिर बढ़ेगा तनाव?

भारत के साथ हुए संघर्ष विराम को लेकर पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक बड़ा दावा किया है. डार ने कहा कि दोनों देशों के बीच 'अमेरिका की मध्यस्थता से हुए संघर्ष विराम' को अब 18 मई तक बढ़ा दिया गया है.

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भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद और सैन्य तनातनी के बीच गुरुवार को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने सीमा पर चल रहे सीजफायर को 18 मई 2025 तक के लिए आगे बढ़ा दिया है. इस घोषणा ने एक ओर सीमावर्ती इलाकों में राहत की सांस दी है, वहीं दूसरी ओर इससे कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं कि आखिर 18 मई के बाद क्या होगा? क्या दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने होंगे या कूटनीति के जरिए समाधान की दिशा में बढ़ेंगे?

इशाक डार का बयान 

इशाक डार ने अपने भाषण में भारत को परोक्ष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत ने सिंधु जल समझौते को बहाल नहीं किया, तो सीजफायर को रद्द किया जा सकता है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार आंतरिक अस्थिरता और वैश्विक कूटनीतिक दबाव से गुजर रही है. सिंधु जल संधि, जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, आज भी एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. भारत इस संधि के अंतर्गत पाकिस्तान को सालाना 33 मिलियन एकड़ फीट पानी देता है, लेकिन बीते वर्षों में पाकिस्तान की ओर से लगातार इसका राजनीतिकरण होता आया है.

शांति की उम्मीद या फिर से युद्ध की आहट?

सीजफायर को 18 मई तक बढ़ाने की घोषणा एक अस्थायी राहत की तरह है, लेकिन इसके बाद की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है. भारत जहां अपने रुख पर स्पष्ट है कि वह आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चलने देगा, वहीं पाकिस्तान की तरफ से बार-बार चेतावनी भरे बयानों ने हालात को और भी संवेदनशील बना दिया है. दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की संवाद प्रक्रिया फिलहाल बंद है और कूटनीतिक स्तर पर भी कोई विशेष पहल नहीं हुई है.

भारत-पाक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी निगरानी रखता है. अमेरिका, रूस, चीन और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं दक्षिण एशिया में शांति की पैरवी करती आई हैं, लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा. बीते वर्षों में भारत की विदेश नीति पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और राष्ट्रहित आधारित रही है.

18 मई के बाद क्या हो सकता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 18 मई के बाद सीमा पर फिर से तनाव बढ़ेगा या दोनों देश शांति बनाए रखने की ओर कदम बढ़ाएंगे? पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, कूटनीतिक अलगाव और आतंकी गतिविधियों पर वैश्विक दबाव को देखते हुए यह संभव है कि वह फिलहाल टकराव से बचे. वहीं भारत की रणनीति स्पष्ट है अगर कोई उकसावे की कार्रवाई होती है, तो जवाब पहले से भी कड़ा होगा.

इसके अलावा, यह भी देखा जाना होगा कि पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व एक राय से चल रहे हैं या नहीं, क्योंकि पाकिस्तान की विदेश नीति में अक्सर सेना का दखल रहता है.

ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय रणनीति
आपको बता दें कि भारत की ओर से पिछले महीने "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत सीमापार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था. यह कार्रवाई पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी लॉंच पैड्स को निशाना बनाकर की गई थी. इसके बाद ही सीमा पर अस्थायी शांति बनी रही. यह दिखाता है कि भारत अब आतंकी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा और आवश्यकता पड़ने पर सर्जिकल एक्शन की रणनीति को आगे भी अपनाएगा.

सीजफायर को बढ़ाकर फिलहाल एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन यह अस्थायी है. भारत की ओर से आतंकवाद को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई जा रही, और यह नीति आने वाले समय में भी जारी रहेगी. पाकिस्तान के लिए यह समय आत्मविश्लेषण का है कि क्या उसे भारत के साथ अपने संबंधों को स्थायी शांति की ओर ले जाना है या फिर पुराने रास्ते पर चलकर खुद को और दुनिया को जोखिम में डालना है.
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