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भारत उभरती अर्थव्यवस्था...पुतिन के दिल्ली दौरे पर आया चीन का बयान, हिंदुस्तान से संबंध सुधारना चाहता है ड्रैगन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर चीन का बड़ा बयान सामने आया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत को उभरती इकोनॉमी बताते हुए दो टूक कहा कि वो दोनों देशों के साथ संबंधों को परस्पर एक साथ नई ऊंचाईयों पर ले जाने को उत्सुक है. उसका ये बयान उसके हिंदुस्तान के प्रति बदले रुख का परिचायक है.

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के बाद वैश्विक राजनीति बदलती हुई नजर आ रही है. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, वहीं चीन का इस पर बड़ा बयान सामने आया है. चीन ने न सिर्फ भारत-रूस और चीन को ग्लोबल साउथ का हिस्सा बताया बल्कि तीनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लाभकारी करार दिया.

भारत उभरती अर्थव्यवस्था, ग्लोबल साउथ का सदस्य: चीन

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस दौरान माना कि भारत उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक दक्षिण के अहम सदस्यों में शामिल है. उन्होंने चीन-रूस को भी इमर्जिंग इकोनॉमी बताया और खुद को बड़ा दिखाने या सुपर पावर बनने का दावा करने से परहेज किया. इस लिहाज से देखें तो ड्रैगन ने रूस-भारत के बीच बढ़ती दोस्ती पर संतुलित और सधी हुई प्रतिक्रिया दी है.

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चीन ने भारत से संबंध सुधारने की जताई इच्छा!

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2020 के गलवान झड़प के बाद से भारत-चीन संबंधों में आई गिरावट के फिर से पटरी पर लौटने को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत के साथ निरंतर, मजबूत और स्थिर संबंधों को बढ़ावा देना चाहता है. गुओ जियाकुन ने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने और हर स्तर पर सहयोग को गहरा करने के लिए तैयार हैं. चीन ने यह भी कहा कि उसकी कोशिश रहेगी कि भारत के साथ मिलकर ऐसे संबंध स्थापित किए जाएं जो आम लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचाएं और क्षेत्रीय शांति को मजबूत करें.

चीन-रूस के बीच गहरे संबंध की वजह क्या है?

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मालूम रहे कि बीजिंग के साथ भी मॉस्को के गहरे संबंध हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक आइसोलेशन के कारण मॉस्को की चीन पर निर्भरता पहले से काफी बढ़ी है. तेल और गैस खरीद के मामले में बीजिंग आज रूस का सबसे बड़ा खरीदार है. ऐसे में यह माना जा रहा था कि पुतिन भारत के साथ संबंधों को किस तरह आगे ले जाएंगे और क्या वे चीन की चिंताओं को ध्यान में रखेंगे. इसलिए पुतिन की दिल्ली यात्रा पर चीन की पैनी नजर थी.

पुतिन की दिल्ली यात्रा पर थी चीन की पैनी नजर!

रूसी राष्ट्रपति के दौरे से पहले ही चीन साफ कर चुका था कि वह रूस और भारत, दोनों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. वहीं पुतिन ने भी दो टूक कहा था कि रूस एक की कीमत पर दूसरे के साथ संबंध न तो बनाएगा और न बिगाड़ेगा. अपने दौरे से पहले पुतिन ने कहा था कि भारत और चीन रूस के सबसे करीबी मित्र हैं और मॉस्को इन रिश्तों को बहुत महत्व देता है.

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भारत-चीन विवाद पर क्या बोले पुतिन?

इतना ही नहीं, एक निजी भारतीय चैनल से बातचीत में पुतिन ने कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत और चीन का नेतृत्व आपसी विवादों का समाधान स्वयं निकालने में सक्षम है. उन्होंने आगे कहा कि रूस को दोनों देशों के द्विपक्षीय मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. चीनी सरकारी मीडिया ने उनकी इस टिप्पणी को प्रमुखता से जगह दी. जैसा कि ऊपर भी बताया गया है, रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार देशों में चीन शीर्ष पर है और उसने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर लगे प्रतिबंधों और अमेरिकी धमकियों को दरकिनार करते हुए आयात जारी रखा है.

पुतिन के भारत के दौरे पर क्या बोली अमेरिकी मीडिया?

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वहीं अमेरिकी मीडिया हाउसों ने पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात को भारत द्वारा अपनी रणनीतिक जरूरतों को साधने के एक अहम प्रदर्शन के रूप में पेश किया. अमेरिकी मीडिया ने कहा कि अमेरिका की ओर से किए जा रहे भौगोलिक दबावों ने रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे को संभव बनाया. 

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात ऐसे समय में हुई जब अमेरिका रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगा रहा है, जिसकी वजह से भारत कम कीमत पर कच्चा तेल खरीद पा रहा है.भारत-रूस की ऊर्जा साझेदारी, जिसे 2022 से द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य आधार माना जा रहा है, इस समय दबाव में है.

चार साल बाद भारत दौरे पर आए थे पुतिन

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को चार साल बाद अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए थे. यहां दोनों नेताओं के बीच 23वीं वार्षिक बैठक हुई. इस मुलाकात का उद्देश्य रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करना था. इस दौरान दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान पर भारत और रूस के बीच घनिष्ठ समन्वय की सराहना की, जिसमें दोनों देशों की सुरक्षा परिषदों के बीच संवाद तंत्र भी शामिल है. उन्होंने मॉस्को फॉर्मेट बैठकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया.

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