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सुपर पावर की भूमिका में भारत, पुतिन गए, अब जेलेंस्की आएंगे दिल्ली! PM मोदी के एक दांव से ट्रंप-यूरोप चित्त!

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ऐतिहासिक दिल्ली दौरे के बाद भारत ने एक जबरदस्त सधी हुई चाल चल दी है. एक वैश्विक ताकत होने के नाते वह जेलेंस्की को अगले महीने वह करने वाला है, जिसके बाद कूटनीति ही बदल जाएगी.

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पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के बाद भारत ने कूटनीति की दूसरी सधी हुई चाल चली है. भारत अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को दिल्ली में होस्ट करने की योजना पर काम कर रहा है. कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की विदेश नीति का बैलेंसिंग एक्ट माना जा रहा है. माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जेलेंस्की का दिल्ली दौरा हो सकता है, हालांकि अभी इस दौरे की तारीख तय नहीं हो सकी है.

बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका बढ़ गई है. ग्लोबल साउथ का लीडर, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते हिंदुस्तान अपने आपको तटस्थ नहीं रख सकता, हां वह किसी एक का पक्ष भी नहीं ले सकता. यह बात उसने अपने वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड और विश्वसनीयता के जरिए दुनियाभर के देशों को बता दी है. इसी वजह से भारत की वकालत फिलिस्तीन और इज़रायल दोनों करते हैं. उसकी ईरान-सऊदी अरब से भी बराबर की दोस्ती है. यही कुछ वह फिर करने जा रहा है. दरअसल, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे के बाद अगले महीने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की भी दिल्ली आ सकते हैं. इसके लिए तैयारी की जा रही है. कहा जा रहा है कि अगर ऐसा होता है तो रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध के खात्मे की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा.

पीएम मोदी के दांव से पूरी तरह चित्त यूरोप!

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आपको बता दें कि भारत ने इसी बीच एक सधा हुआ, लेकिन जबरदस्त कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं. जानकारी के मुताबिक पुतिन के दौरे के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी भारत आ सकते हैं और उनका दौरा गणतंत्र दिवस के आस-पास हो सकता है. हालांकि, इसकी तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है. इसे विदेश और कूटनीति की भाषा में बैलेंसिंग एक्ट माना जाता है.

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अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत द्वारा यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क साधा गया है. ये प्रयास कई हफ़्तों से जारी है, टर्म्स पर बातचीत चल रही है. हालांकि खबर यह भी है कि नई दिल्ली की यह कोशिश आज से नहीं, बल्कि पुतिन के दौरे के पहले से ही चल रही है. दोनों देशों के अधिकारियों की इस पर उच्च स्तरीय बातचीत भी हुई है. जानकारी के मुताबिक इस मामले में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है.

क्यों जेलेंस्की को दिल्ली बुलाना चाह रहा है भारत?

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विदेश मामलों के जानकारों की मानें तो जेलेंस्की की यात्रा से न सिर्फ भारत को अपना पक्ष रखने, यूक्रेन की बात सुनने का मौका मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत होगी. जेलेंस्की की भारत यात्रा की संभावना इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि जब जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉस्को गए थे, तो इसके ठीक एक महीने बाद यानी अगस्त में पीएम मोदी ने यूक्रेन का दौरा किया और बड़ा संदेश दिया था.

कब हो सकती है जेलेंस्की की यात्रा?

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की संभावित यात्रा कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी. पहला यह कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप के पीस प्लान का क्या होता है और उसकी सफलता किस ओर जाती है. वहीं उनकी घरेलू राजनीति की स्थिति भी बड़ी महत्वपूर्ण है. जानकारी के मुताबिक जेलेंस्की सरकार युद्ध के बीच लगे भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों के कारण दबाव में है.

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इससे पहले कब-कब आए यूक्रेनी राष्ट्रपति?

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अगर तमाम दबावों और आरोपों के बावजूद दिल्ली आते हैं, तो यह चौथा मौका होगा जब यूक्रेनी राष्ट्राध्यक्ष भारत का दौरा करेगा. इससे पहले 1992, 2002 और 2012 में यूक्रेन के राष्ट्रपति भारत आए थे.

पुतिन की भारत यात्रा ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत किसी के दबाव में नहीं झुकता. पुतिन ने भी कहा कि जो यह सोचते हैं कि भारत 77 साल पहले वाला कमजोर देश है, तो यह उनकी भूल है. यूरोप सहित कई देश यह कहते आए हैं कि भारत मॉस्को पर युद्ध खत्म करने का दबाव डाले. पुतिन की यात्रा से पहले पोलैंड के विदेश मंत्री भी भारत के दौरे पर आए थे. उन्होंने यह भी कहा था कि पीएम मोदी की बात पुतिन गंभीरता से सुनते हैं. वह जो कहेंगे, पुतिन उसे गंभीरता से सुनेंगे. ऐसे में उन्हें उनसे युद्ध खत्म करने के बारे में कहना चाहिए.

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8 से ज़्यादा बार हुई जेलेंस्की-मोदी की फोन पर बात

आपको बता दें कि फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार पुतिन और जेलेंस्की दोनों से संपर्क बनाए हुए है. प्रधानमंत्री मोदी अब तक कम से कम आठ बार जेलेंस्की से फोन पर बात कर चुके हैं. वहीं दोनों नेताओं की अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों और साइडलाइंस पर चार-चार बार आमने-सामने मुलाक़ात हो चुकी है. अगस्त 2024 में जब पीएम मोदी यूक्रेन दौरे पर गए थे, तब उन्होंने जेलेंस्की से साफ कहा था—“हम युद्ध से दूर रहे हैं, लेकिन हम न्यूट्रल नहीं हैं. हम शांति के पक्ष में हैं. हम बुद्ध और गांधी की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं.”

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भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर चल रही यह लड़ाई सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रही है. रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने का फायदा तो भारत को मिला, लेकिन इसी वजह से अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया है. ऐसे में भारत चाहेगा कि जल्द से जल्द युद्ध खत्म हो, ताकि उस पर से दबाव कम हो और तेल की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रहे.

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