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'ट्रंप होते तो कोई युद्ध नहीं होता...', अलास्का में बैठक के बाद पुतिन ने बांधे अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफों के पुल, जानें इस बयान के मायने

Trump Putin Alaska meeting: अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात खत्म हो गई. किसी शांति समझौते पर सहमति नहीं बनी लेकिन दोनों नेताओं ने सकारात्मक रुख दिखाया. इस बैठक के बाद पुतिन ने कहा कि अगर 2022 में ट्रंप राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता. दोनों ने बातचीत को शांति की दिशा में एक कदम बताया.

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दुनिया के शक्तिशाली देशों में अमेरिका और रूस दो ऐसी ताकतें जिनकी हर गतिविधि पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुप्रतीक्षित मुलाकात अलास्का में हुई. रूस-यूक्रेन के युद्ध को खत्म करने के प्रयासों वाली यह मीटिंग तीन घंटे से अधिक चली. भले ही इस बातचीत में किसी ठोस शांति समझौते पर सहमति नहीं बन पाई हो, लेकिन दोनों नेताओं का लहजा यह साफ़ कर गया कि भविष्य में सहयोग और समझदारी की नई राहें खुल सकती हैं.

पुतिन के शब्दों में ट्रंप की तारीफ

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने ट्रंप के शांति पूर्ण और मित्रवत रवैये की सराहना की. पुतिन का कहना था कि अगर 2022 की शुरुआत में ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो शायद यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता. यह बयान अपने आप में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पुतिन ने पहली बार इतनी स्पष्टता से अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना बाइडन से की. पुतिन ने उम्मीद जताई कि इस बातचीत से जो भी बुनियादी सहमतियां बनी हैं, वे आने वाले समय में रूस–अमेरिका संबंधों को नए रास्ते पर ले जाएंगी और साथ ही यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में भी मददगार साबित होंगी।

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ट्रंप का जवाब 

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ट्रंप ने अपने बयान में इस युद्ध को “बाइडन का युद्ध” बताया. उनका कहना था कि अगर वे 2022 में राष्ट्रपति रहते तो यह संघर्ष कभी शुरू नहीं होता. ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका पुतिन के साथ रिश्ता हमेशा ही अच्छा रहा है और इसी रिश्ते की वजह से बातचीत का माहौल सकारात्मक बना. ट्रंप ने आगे कहा कि वे नाटो और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को इस मीटिंग के बारे में जानकारी देंगे. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शांति केवल बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है.

अलास्का में ताकत का प्रदर्शन

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अमेरिका ने इस मीटिंग के दौरान अपनी सैन्य ताक़त का प्रदर्शन भी किया. जब पुतिन अलास्का के एंकरेज एयरबेस पर उतरे, उसी समय अमेरिकी B-2 स्टील्थ बॉम्बर और F-22, F-35 फाइटर जेट्स ने आसमान में फ्लाई–ओवर किया. इसे अमेरिका का संदेश माना गया कि वह केवल बातचीत ही नहीं बल्कि अपनी सैन्य शक्ति के ज़रिए भी दुनिया को अपनी ताकत दिखा सकता है. इसके बाद पुतिन और ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति की बख्तरबंद गाड़ी “द बीस्ट” में समिट स्थल तक पहुंचे. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए बातचीत शुरू की.

वार्ता की 5 बड़ी बातें

  • युद्धविराम पर सहमति नहीं बनी – तीन घंटे की बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन शांति प्रक्रिया की शुरुआत जरूर हुई.
  • बातचीत सकारात्मक रही – पुतिन ने इसे रचनात्मक और सम्मानजनक बताया. ट्रंप ने भी प्रगति का दावा किया.
  • अगली बैठक का प्रस्ताव – पुतिन ने मॉस्को में मुलाक़ात का निमंत्रण दिया.
  • यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर चर्चा – ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस पर विचार करेंगे.
  • वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बात – बैठक में सिर्फ यूक्रेन नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा और शांति एजेंडा पर चर्चा हुई.

पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि शांति का कोई भी हल तभी निकलेगा जब युद्ध के मूल कारणों पर ध्यान दिया जाएगा और रूस की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाएगा. उनका कहना था कि यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना ज़रूरी है लेकिन साथ ही रूस की सुरक्षा चिंताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

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क्या मिली कोई ठोस सहमति?

मीटिंग के बाद दोनों नेताओं की कॉन्फ्रेंस केवल 12 मिनट चली. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप केवल 3.3 मिनट ही बोले .जबकि आमतौर पर वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज़्यादा समय बोलते हैं और सवालों के जवाब देने में सक्रिय रहते हैं. यही वजह रही कि अमेरिकी मीडिया और विपक्ष ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर पुतिन के सामने ट्रंप क्यों चुप रहे? हालांकि दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताया और कहा कि बातचीत आगे भी जारी रहेगी. लेकिन किसी भी समझौते पर दस्तखत न होने के कारण अभी यह कहना मुश्किल है कि इसका यूक्रेन युद्ध पर तुरंत क्या असर पड़ेगा.

पुतिन को अगली मुलाककात की उम्मीद 

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पुतिन ने उम्मीद जताई कि अगली मुलाकात मॉस्को में होगी. उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि यूरोप और यूक्रेन इस मीटिंग से निकले संदेशों को कमजोर करने की कोशिश न करें. उनका विश्वास है कि अगर सभी पक्ष समझदारी दिखाएं तो यूक्रेन में स्थायी शांति लाना संभव है. दूसरी तरफ ट्रंप ने यह साफ किया कि वे नाटो और यूक्रेनी राष्ट्रपति से लगातार संवाद में रहेंगे. उनका कहना था कि बातचीत रुकनी नहीं चाहिए क्योंकि हर संवाद एक नए अवसर का दरवाज़ा खोलता है.

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बता दें कि अलास्का में हुई यह मुलाकात किसी बड़े समझौते तक तो नहीं पहुंची, लेकिन इसके संकेत साफ हैं कि रूस और अमेरिका दोनों ही शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.दुनिया की नज़रें अब आने वाले महीनों में इन दोनों देशों की अगली मीटिंग और उससे निकलने वाले फैसलों पर टिकी रहेंगी.

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