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'पावर प्लांट्स पर अटैक हुआ तो तबाह कर देंगे...', ट्रंप की धमकी पर ईरान का दो टूक जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला तो ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला होगा. जवाब में ईरान ने कहा कि ऐसा हुआ तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर देगा और अमेरिकी ठिकानों वाले देशों के ऊर्जा केंद्र निशाने पर होंगे.

'पावर प्लांट्स पर अटैक हुआ तो तबाह कर देंगे...', ट्रंप की धमकी पर ईरान का दो टूक जवाब
Mojtaba Khamenei (File Photo)
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मिडिल ईस्ट में बीते 28 फरवरी से चल रही जंग दिन पर दिन खतरनाक स्तर पर पहुंचती जा रही है. इस बीच ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके ऊर्जा केंद्रों पर हमला करते हैं, तो वह दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देंगे. इस बयान के बाद पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिक गई हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लेकर बड़ी वैश्विक चिंता 

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) सिर्फ एक जलसंधि नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा मानी जाती है. यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है. ऐसे में अगर यह रास्ता बंद होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ईरान ने 28 फरवरी को इस जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिसके बाद से ही तेल की कीमतों में उछाल और बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है.

ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का जवाब

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इस पूरे विवाद की शुरुआत तब और तेज हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर हॉर्मुज जलसंधि को बिना किसी बाधा के नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करेगा. इस चेतावनी ने हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया. जवाब में ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों की परियोजनाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का सख्त रुख

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी साफ कर दिया है कि जब तक उनके नष्ट हुए ऊर्जा केंद्रों का पुनर्निर्माण नहीं होता, तब तक हॉर्मुज जलसंधि बंद ही रहेगी. इसके साथ ही उन्होंने इस बात के भी अहम  संकेत दिए हैं कि वे गल्फ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़े ऊर्जा और तकनीकी संसाधनों को निशाना बना सकते हैं.

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हवाई हमलों से बिगड़ते हालात

वहीं, जमीनी हालात भी लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. 21 मार्च को हमलों की तीव्रता बढ़ गई, जिसमें अमेरिकी और इजरायली हमले तेहरान समेत मध्य और दक्षिण ईरान के इलाकों पर केंद्रित रहे. इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हमले किए. इजरायली डिफेंस फोर्स के अनुसार, अब तक ईरान 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है, हालांकि उसकी रक्षा प्रणाली ने करीब 92 प्रतिशत मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया.

बहरहाल, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और जिद्द वाले व्यवहार ने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है. जानकरों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संघर्ष वैश्विक संकट का रूप ले सकता है. फिलहाल, दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति इस तनाव को कम कर पाती है या नहीं.

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