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'खामेनेई को निशाना बनाया तो खतरनाक होगा अंजाम...', शियाओं के सबसे बड़े धर्मगुरु की अमेरिका-इजरायल को चेतावनी

इजरायल-ईरान के बीच चल रही जंग में अमेरिका लगातार ईरान और उसके सुप्रीम लीडर खामेनेई को धमकी दे रहा है. इस बीच इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली सिस्तानी ने गंभीर चिंता जताते हुए अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश दिया है.

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ईरान और इजरायल के बीच लगातार गहराते सैन्य संघर्ष ने न केवल मिडल ईस्ट, बल्कि पूरे विश्व को एक नई तरह की राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है. हालात ऐसे हैं कि दुनिया दो धड़ों में बंटती दिखाई दे रही है. एक ओर अमेरिका इज़रायल के साथ, तो दूसरी ओर रूस और चीन जैसे महाशक्ति ईरान के समर्थन में खड़े हैं. अब मौजूदा परिस्थिति को इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली सिस्तानी ने गंभीर चिंता जताते हुए अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश दिया है. 

दरअसल, इस युद्ध के बीच राष्ट्रपति और मौजूदा राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक सख्त संदेश जारी किया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “हमें पता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई कहां छिपे हैं.” ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. ईरानी रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया कि ईरान कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेगा, और यदि अमेरिका या इजरायल ने कोई सैन्य करने की हिमाकत किया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. वहीं, इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली सिस्तानी ने भी इस टकराव को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को जानबूझकर निशाना बनाया गया, तो इसका परिणाम पूरे पश्चिम एशिया में अराजकता के रूप में सामने आ सकता है. 

शिया धर्मगुरु सिस्तानी की चेतावनी 
इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली सिस्तानी ने गुरुवार को एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाया गया, तो इसके बहुत ही भयंकर और दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं. एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक सिस्तानी ने खामेनेई का नाम लिए बिना स्पष्ट रूप से इशारा करते हुए कहा, “अगर इस्लामी गणराज्य के ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इससे पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल जाएगी. आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी और सभी देशों के हितों को गंभीर नुकसान होगा.” सिस्तानी ने इस युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सक्रिय हस्तक्षेप की मांग की है.  उन्होंने कहा, “अब समय है कि वैश्विक शक्तियां हस्तक्षेप करें और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद का एक शांतिपूर्ण समाधान निकालें, युद्ध किसी के हित में नहीं है.”

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कौन हैं अयातुल्ला अली सिस्तानी?
अयातुल्ला अली सिस्तानी न सिर्फ इराक के बल्कि दुनियाभर के करोड़ों शिया मुसलमानों के लिए एक मार्गदर्शक हैं. विशेष रूप से भारत, पाकिस्तान, ईरान, लेबनान और खाड़ी देशों में उन्हें मरजा-ए-तकलीद (अनुकरण के लिए योग्य धर्मगुरु) के तौर पर अत्यधिक ख्याति प्राप्त है. भारत के अधिकांश शिया मुसलमान अली सिस्तानी को अपना धार्मिक नेतृत्वकर्ता मानते हैं. 'मरजा' का अर्थ है वह धर्मगुरु जिसकी शिक्षाओं और आदेशों का शिया अनुयायियों को पालन करना आवश्यक होता है. यही कारण है कि जब सिस्तानी कोई धार्मिक या राजनीतिक दिशा निर्देश देते हैं, तो उसका असर सीमाओं से परे जाकर वैश्विक स्तर पर होता है. 

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प्रभावशाली कदम उठा चुके हैं सिस्तानी
सिस्तानी अपनी सार्वजनिक उपस्थिति बहुत कम रखते हैं, लेकिन उनका हर बयान बड़ी राजनीतिक घटनाओं को प्रभावित कर सकता है. साल 2014 में उन्होंने आईएसआईएस के खिलाफ फतवा जारी कर इराकियों से देश की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की थी, जिसने देशभर में भारी जन समर्थन जुटाया और कई स्वयंसेवी सेनाएं गठित हुईं. वही इसको लेकर बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन के साथ सिस्तानी के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे. उन्हें लंबे समय तक नजरबंद भी रहना पड़ा. बावजूद इसके, उन्होंने राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखी और केवल धार्मिक, नैतिक और मानवीय मार्गदर्शन तक सीमित रहे. साल 2023 में अमेरिका की ओर से इराकी गवर्नमेंट काउंसिल के गठन की पहल की गई थी, जिसे सिस्तानी ने साफ तौर पर ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि इराक के भविष्य का फैसला सिर्फ इराकी जनता को करना चाहिए, बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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बताते चलें कि इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली सिस्तानी का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर तीखा पलटवार किया है. ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई करने की कोशिश की, तो उसके परिणाम बहुत गंभीर और दूरगामी होंगे. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी प्रकार की आक्रामकता का माकूल और कठोर जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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