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ब्रिटेन के पूर्व पीएम ऋषि सुनक करने लगे जॉब... जानें किसने दी नौकरी और कितनी मिलेगी सैलरी

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने गोल्डमैन सैक्स में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नई पारी की शुरुआत की है. कंपनी के सीईओ डेविड सोलोमन के अनुसार, सुनक अब आर्थिक और भू-राजनीतिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को रणनीतिक सलाह देंगे. इससे पहले भी वे इस निवेश बैंक में कार्य कर चुके हैं. उनके राजनीतिक अनुभव को वैश्विक वित्तीय परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए इस कदम को सिर्फ पेशेवर बदलाव नहीं, बल्कि उनके करियर का एक नया अध्याय माना जा रहा है.

File Photo
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ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक बार फिर कॉर्पोरेट जगत में कदम रख दिया है. उन्होंने दुनिया की जानी-मानी अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नई भूमिका संभाली है. यह जानकारी कंपनी के सीईओ डेविड सोलोमन ने मंगलवार को साझा की. इस नियुक्ति को केवल एक नौकरी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सुनक के राजनीतिक अनुभव और वैश्विक दृष्टिकोण को वित्तीय दुनिया से जोड़ने के रूप में देखा जा रहा है. खास बात यह है कि सुनक पहले भी इस कंपनी का हिस्सा रह चुके हैं और अब वे नए रोल में कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को रणनीतिक सलाह देंगे.

आर्थिक और भू-राजनीतिक अनुभव की होगी परीक्षा
ऋषि सुनक की यह वापसी केवल एक पेशेवर कदम नहीं है, बल्कि यह उनके करियर का नया अध्याय है. वे अब गोल्डमैन सैक्स के माध्यम से विश्व की आर्थिक और भू-राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाएंगे. डेविड सोलोमन ने बताया कि सुनक खासतौर पर आर्थिक नीतियों, वैश्विक वित्तीय परिवर्तनों और राजनीतिक उतार-चढ़ावों को लेकर ग्राहकों को परामर्श देंगे. ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार अनिश्चितताओं और जियोपॉलिटिकल टेंशन से गुजर रहे हैं, एक अनुभवी राजनेता और पूर्व वित्त मंत्री का सहयोग संस्थानों के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है.

ऋषि सुनक का सफर 
राजनीति और कॉर्पोरेट के बीच संतुलन साधने वाले ऋषि सुनक ने 2015 में ब्रिटिश संसद में कदम रखा था. उन्होंने कुछ ही वर्षों में ब्रिटेन के सबसे अहम पदों को संभाला. 2020 से 2022 तक वे वित्त मंत्री रहे और फिर 2022 से 2024 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे. इस दौरान उन्होंने कोविड महामारी, आर्थिक संकट, और ब्रेग्जिट जैसे जटिल मुद्दों का सामना किया. लेकिन राजनीति में आने से पहले ही उन्होंने निवेश बैंकिंग की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी. न्यूयॉर्क स्थित गोल्डमैन सैक्स में 2001 से 2004 तक विश्लेषक के रूप में कार्य करने के बाद, उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय निवेश फर्म की सह-स्थापना की. यह फर्म दुनियाभर में निवेश और रणनीतिक साझेदारियों के लिए जानी जाती है.

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कितनी हो सकती है उनकी सैलरी?
सुनक की नई भूमिका को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता केवल उनके काम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी संभावित सैलरी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. आम तौर पर गोल्डमैन सैक्स में वरिष्ठ सलाहकार की सालाना सैलरी 1.36 लाख डॉलर से लेकर 2.20 लाख डॉलर के बीच होती है. इसका औसत आंकलन करें तो यह करीब 1.70 लाख डॉलर यानी लगभग 1.7 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होता है. हालांकि, सुनक जैसी वैश्विक पहचान रखने वाले शख्स के लिए यह मानक वेतन अनुमानित ही कहा जा सकता है. वास्तविक आंकड़ा फिलहाल गोपनीय रखा गया है, लेकिन यह निश्चित रूप से आम सलाहकारों से कहीं अधिक हो सकता है.

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संसद से इस्तीफा नहीं देंगे सुनक
हालांकि सुनक अब कॉर्पोरेट भूमिका में लौट आए हैं, लेकिन उन्होंने राजनीति से पूरी तरह किनारा नहीं किया है. वे अभी भी ब्रिटेन के उत्तरी इंग्लैंड स्थित रिचमंड और नॉर्थएलर्टन क्षेत्र से संसद सदस्य हैं. पिछले साल कंजरवेटिव पार्टी की ऐतिहासिक हार के बावजूद, उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान साफ कहा था कि वे अगली संसद की पूरी अवधि तक सांसद बने रहेंगे. इससे यह साफ हो जाता है कि वे राजनीति से खुद को पूरी तरह अलग नहीं कर रहे, बल्कि दोनों क्षेत्रों में संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं.

क्यों खास है यह वापसी?
ऋषि सुनक की गोल्डमैन सैक्स में वापसी एक तरह से उस यात्रा का चक्र पूर्ण होना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने 2000 में एक समर ट्रेनी के रूप में की थी. फिर 2001 से 2004 तक एनालिस्ट के रूप में अपने कैरियर की नींव रखी. अब लगभग दो दशक बाद वे उसी संस्था में सलाहकार बनकर लौटे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे एक पूर्व प्रधानमंत्री, अनुभवी वित्त मंत्री और वैश्विक नेता के तौर पर लौटे हैं. उनकी सलाह न केवल वित्तीय मामलों में अहम होगी, बल्कि कंपनियों को वैश्विक राजनीतिक माहौल समझने में भी मदद करेगी.

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बताते चलें कि ऋषि सुनक की यह नई भूमिका न केवल गोल्डमैन सैक्स के लिए फायदेमंद हो सकती है, बल्कि यह एक संकेत है कि कैसे राजनीति और कॉर्पोरेट की दुनिया एक-दूसरे से जुड़ती जा रही हैं. एक ऐसा नेता जिसने देश का नेतृत्व किया हो, अब वैश्विक कंपनियों को दिशा दिखाने के लिए तैयार है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी रणनीतिक सोच और राजनीतिक अनुभव के दम पर वित्तीय दुनिया में कैसा प्रभाव छोड़ते हैं.

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