खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा बने ईरान के सुप्रीम लीडर, जानें कैसी है पिता के मुकाबले उनकी शख़्सियत
Israel Iran War Live: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों में मारे गए. इसने इस्लामी शासन की नींव हिला दी है. अब उनके दूसरे बेटे मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी चुन लिया गया है.
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ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की बीते दिन हुए अमेरिका और इजरायल के साझा हमले में मौत के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है. इसने शियाओं के सबसे बड़े और अगुआ देश ईरान में इस्लामी शासन या खामेनेई रिजीम की नींव हिला दी है. कहा जा रहा कि इसके बाद क्लेर्जी या में धार्मिक शासन के लिए पहले की तरह काम करना मुश्किल होगा. खामेनेई के निधन के बाद अब उनका वारिस भी चुन लिया गया है. उनके दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है. कहा जा रहा है कि उनका चयन खामेनेई के जीते जी किया गया था.
आपको बता दें कि खामेनेई ने जिस ईरान पर करीब तीन दशकों से अधिक समय तक शासन किया अब उसके लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है. हालांकि IRGC पहले से मौजूद है, जो कि ईरानी सेना से ज्यादा ताकतवर, फ्रंट लाइन फोर्स और खामेनेई के वफादार फौज है, लेकिन सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी में वह कितना कारगर होगा ये देखने वाली बात होगी.
खामेनेई के दूसरे बेटे मुजतबा को चुना गया सुप्रीम लीडर
खामेनेई और उनके गुरु, मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के शासनकाल में सर्वोच्च नेता को राज्य के सभी मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार था, लेकिन इस व्यवस्था को पहले कभी ऐसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा था. खामेनेई का प्रभाव अक्सर उनके करीबी सलाहकारों के माध्यम से ही रहा है, लेकिन शनिवार के हमलों के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि उनके करीबी और वरिष्ठ सलाहकार में से कितने व्यक्ति जीवित बचे हैं.
कौन हैं अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्तराधिकारी मुजतबा हुसैनी खामेनेई?
• ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं मुजतबा हुसैनी खामेनेई.
• जन्म: 8 सितंबर 1969, मशहद, ईरान की पैदाइश.
• पत्नी: ज़हरा हद्दाद-आदेल (निधन 2026)
• सैन्य पृष्ठभूमि: ईरान-इराक युद्ध में भी सक्रिय रहे थे.
• छवि: लो-प्रोफाइल रहने और पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले लीडर की छवि.
• सरकारी पद: अब तक कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं लिया, जैसा कि खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति तक रह चुके थे.
• अमेरिकी प्रतिबंध: 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाया था.
• कैसे हुआ चयन: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 88 मौलवियों वाली एक्सपर्ट्स असेंबली ने उन्हें चुना है.
• वोटिंग तरीका: सुरक्षा कारणों से असेंबली का कोई औपचारिक सत्र नहीं हुआ, बल्कि ऑनलाइन वोटिंग कराई गई.
• पहले की खबर: इससे पहले कहा गया था कि नए सुप्रीम लीडर का चयन अगले हफ्ते किया जाएगा.
• 2024 में नाम आगे बढ़ा: रिपोर्ट्स के अनुसार अयातुल्लाह अली खामेनेई ने 2024 में ही अपने दूसरे बेटे मुजतबा को उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाया था.
• बीमारी की वजह: बताया गया कि खामेनेई ने अपनी तबीयत खराब होने के चलते यह फैसला लिया था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई.
• गोपनीय बैठक: रिपोर्ट्स के मुताबिक 26 सितंबर 2024 को एक्सपर्ट्स असेंबली ने नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया था.
• 60 सदस्यों को बुलाया: खामेनेई ने असेंबली के 60 सदस्यों को बुलाकर गोपनीय तरीके से उत्तराधिकारी पर फैसला लेने को कहा था.
• धार्मिक पकड़: मुजतबा अपने पिता की तरह इस्लामिक मामलों के जानकार माने जाते हैं.
• 2009 में चर्चा में आए: वे पहली बार 2009 में दुनिया की नजरों में आए.
• विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई: 2009 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने में उनकी भूमिका बताई जाती है.
• राजनीतिक संदर्भ: उस चुनाव में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को सुधारवादी नेता मीर होसैन मौसवी पर जीत मिली थी, जिसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे.
ईरान में सर्वोच्च लीडर का होना अनिवार्य!
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के संविधान में विलायत-ए-फकीह (इस्लामी न्यायविद का संरक्षण) के सिद्धांत के तहत सर्वोच्च नेता का धर्मगुरु होना अनिवार्य है. इस सिद्धांत के अनुसार, नौवीं शताब्दी में गुम हो चुके शिया मुस्लिम बारहवें इमाम के लौटने तक, सत्ता एक वरिष्ठ धार्मिक विद्वान के पास होनी चाहिए.
हसन खुमैनी का नाम भी था चर्चा में!
खामेनेई के उत्तराधिकारी के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो उनके बेटे मुजतबा खामेनेई के अलावा इससे पहले इस्लामी गणराज्य के संस्थापक के पोते हसन खुमैनी का नाम भी कई मामले के जानकार और शिया धर्मगुरुओं द्वारा लिया गया था. इतना ही नहीं खामेनेई की विरासत को संभालने के लिए कई अन्य वरिष्ठ धर्मगुरुओं के नाम भी सामने आ रहे थे, लेकिन मौलवियों ने खामनेई के बेटे पर ही आखिरी भरोसा जताया.
रॉयटर्स की मानें तो वर्तमान में किसी भी शख्स के पास खामेनेई के समान अधिकार नहीं हैं. उनके उत्तराधिकारी को IRGC और वरिष्ठ धार्मिक निकायों जैसे शक्तिशाली संस्थानों पर नियंत्रण स्थापित करने में कठिनाई हो सकती है.
कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई, GFX के माध्यम से समझिए.#Iran #iranvsisrael #AyatollahKhamenei pic.twitter.com/Ggj6rJKgLP
— NMF NEWS (@nmfnewsofficial) March 1, 2026
क्या ईरान में धार्मिक शासन कायम रहेगा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान का धार्मिक शासन देश के उन शक्तिशाली संस्थानों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है जो राजनीतिक व्यवस्था के लगभग हर स्तर को प्रभावित करते हैं. इसमें सबसे टॉप में है ईरानी शासन के विशेषज्ञों की काउंसिल, जो वरिष्ठ अयातुल्लाहों का एक निकाय है और हर आठ साल में निर्वाचित होता है. संवैधानिक रूप से इस सभा को सर्वोच्च नेता की नियुक्ति का दायित्व सौंपा गया है. सैद्धांतिक रूप से उसे प्रश्न पूछने या बर्खास्त करने का अधिकार है, हालांकि खामेनेई के रहते इसने कभी भी इस शक्ति का प्रयोग नहीं किया.
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खामेनेई के उत्तराधिकार के संबंध में कोई भी निर्णय संभवतः इस्लामी गणराज्य के सबसे वरिष्ठ लोगों द्वारा लिया जाएगा. इसे औपचारिक रूप से सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा. IRGC के कई शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में किसका अमल-दखल होगा.
गार्जियन काउंसिल का ईरान में दबदबा!
ईरान की गार्जियन काउंसिल जिसमें आधे सदस्य सर्वोच्च नेता और आधे न्यायपालिका प्रमुख द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, संसदीय कानून को वीटो कर सकती है और उम्मीदवारों को चुनाव से अयोग्य घोषित कर सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिकार का अक्सर अली खामेनेई के आलोचकों को दरकिनार करने के लिए इस्तेमाल किया गया जाता था, उसकी भी भूमिका अहम होगी.
ईरान की न्यायपालिका इस्लामी कानून की शिया व्याख्याओं के तहत काम करती है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च नेता द्वारा की जाती है. वर्तमान प्रमुख, गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई, 2009 में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं.
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रॉयटर्स ने पूर्व न्यायपालिका प्रमुख सादिक लारीजानी, विशेषज्ञों की सभा के सदस्य मोहसेन अराकी और तेहरान के शुक्रवार की नमाज के अगुवा अहमद खातमी सहित अन्य प्रभावशाली धर्मगुरुओं को भी सत्ता परिवर्तन में संभावित भूमिका निभाने वालों के रूप में पहचाना है.
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