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'हर अमेरिकी नागरिक और मिलिट्री बेस हमारा टार्गेट..', परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद ईरान की धमकी, ऐसे ले सकता है बदला!
ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों फोर्डो, नतांज, और इस्फहान पर हवाई हमले के बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कड़ी चेतावनी दी और कहा कि मध्य पूर्व में मौजूद हर अमेरिकी नागरिक और सैन्यकर्मी अब उसके निशाने पर हैं. ये समझना जरूरी है कि अमेरिका को ईरान से किस प्रकार का खतरा हो सकता है?
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ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हवाई हमले के बाद मिडिल ईस्ट और पर्शियन रीजन में जंग गहराती जा रही है. ईरान के तीन परमाणु परिसरों 'फोर्डो, नतांज और इस्फहान' पर हमले के बाद ईरान के सरकारी टीवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'अब क्षेत्र में मौजूद हर अमेरिकी नागरिक या सैन्यकर्मी ईरान के टार्गेट पर है. यह धमकी अमेरिका की ओर से बंकर बस्टर बम के इस्तेमाल के जवाब में आई है. इससे पहले ईरानी रक्षा मंत्री ने भी अमेरिका को हमले करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी.
22 जून 2025 को अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों (फोर्डो, नतांज, और इस्फहान) पर किए गए हवाई हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन हमलों को "सैन्य रूप से शानदार सफलता" करार देते हुए दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है.
'हर अमेरिकी नागरिक और बेस हमारे निशाने पर'
12 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए. इसके पीछे तेल अवीव ने दलील दी कि ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की कथित कोशिशों को रोकने के लिए ये जरूरी बताया. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न केवल इजरायल, बल्कि वैश्विक शांति के लिए खतरा है. इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया. लड़ाई 10वें दिन पहुंच चुकी है और ये और भीषण हो सकती है क्योंकि अमेरिका ने भी आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ जंग में एंट्री कर ली है. शुरुआत में वॉशिंगटन ने इस संघर्ष से दूरी बनाए रखी, लेकिन ट्रंप ने 22 जून को भारतीय समयानुसार 4.30 बजे ऐलान किया कि यूएस एयर फोर्स ने तेहरान में मौजूद न्यूक्लियर साइट्स पर सटीक हमले किए, जिसके बाद धमकी दी गई है कि अब यूएस मिलिट्री, बेस और नागरिक उसके निशाने पर होंगे.
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ईरान की धमकी के बाद अलर्ट अमेरिका
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हालांकि ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि अगर ईरान ने अमेरिकी सैनिकों या नागरिकों पर हमला किया, तो जवाबी कार्रवाई और भी भीषण होगी. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें अतिरिक्त युद्धपोत, एफ-22, एफ-16, और एफ-35 लड़ाकू विमान, और हवाई ईंधन भरने वाले विमान शामिल हैं. ट्रंप ने अपने हालिया ट्वीट में ईरान से शांति की अपील भी की.
खाड़ी देशों में मौजूद हैं बेस और अमेरिकी सैनिक
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मध्य पूर्व में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति दशकों से है. अलजजीरा की एक रिपोर्ट की मानें तो वर्तमान में 19 से अधिक देशों और स्थानों पर करीब 40,000 से 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ये अड्डे वॉशिंगटन की सैन्य, विदेश और सामरिक नीति के लिए काफी महत्वपूर्ण रहे हैं. अफगानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ाई, ईराक युद्ध, और वॉर अगेंस्ट टेरर के वक्त भी इनकी खूब भूमिका रही है. मिलिट्री और सैन्य बेस की स्थापना का मकसद अमेरिकी हितों की रक्षा, आतंकवाद के खिलाफ अभियान, और ईरान जैसे देशों पर नजर रखने के लिए रहा है. फिलहाल अमेरिका के कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, इराक और सीरिया में विभिन्न प्रकार के सैन्य अड्डे हैं. अगर देखें तो ये बेस अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए सबसे अहम भी हैं और ईरान के प्राइम टार्गेट भी.
अमेरिका के लिए ईरान की धमकी कितनी गंभीर?
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी हस्तक्षेप को को लेकर कई बार चेतावनी दी है. सामरिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी पर्याप्त बलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं, जिन्हें वह उपरोक्त अड्डों पर हमले के लिए इस्तेमाल कर सकता है. ईरान के पास सैन्य हमले के अलाव कई विकल्प हैं, मसलन वो बहरीन, कतर, और कुवैत सहित अन्य अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल या ड्रोन हमले कर सकता है. वहीं ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूह भी फिर से अमेरिका के खिलाफ एक्टिव हो सकते हैं और 'लोन वुल्फ' के तौर पर अमेरिकी ठिकानों और नागरिकों को निशाना बना सकते हैं.
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इराक में कताइब हिजबुल्लाह या यमन में हूती, अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. लेबनान में भी हिजबुल्ला, फिलिस्तीन में हमास फिर से उठने की कोशिश करेगा, उन्हें फिर से खड़े होने की वजह मिलेगी और लोकल-रिलीजियस सपोर्ट भी. इसके अलावा तेहरान के पास एक और विकल्प बचता है समुद्री मार्गों पर हमला और ऑयल रूट पर हमला. ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों या अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले, जो वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं.
हालांकि, इजरायल और अमेरिका के लगातार हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया है. हालांकि इजरायली हमलों ने ईरान के 50% से अधिक मिसाइल लांचरों को नष्ट कर दिया, जिससे उसकी जवाबी कार्रवाई की क्षमता सीमित हो गई है.
मौजूदा हालत में देखें तो ईरान के सामने कठिन विकल्प हैं. अगर वह प्रत्यक्ष हमला करता है तो ये अमेरिका और इजरायल के और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है और ये पूरे खित्ते में लड़ाई को बढ़ा सकता है. अन्य पश्चिमी देश भी ईरान के खिलाफ लड़ाई में कूद सकते हैं वहीं, मुस्लिम देश की खामोशी ने भी सबको परेशान कर दिया है. अगर ईरान अमेरिकी हमले पर भी चुप रह जाता है तो इस से पहले से कमजोर और विरोध झेल रही खामनेई रिजीम के खिलाफ आंतरिक विरोध बढ़ेगा और सत्ता जा भी सकती है, इससे उसकी घरेलू विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर जानकारों की मानें तो ईरान तत्काल हमले के बजाय प्रॉक्सी समूहों के जरिए या लंबी अवधि की रणनीति के तहत जवाब दे सकता है.
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मिडिल ईस्ट में बढ़ेगी लड़ाई
ईरान की धमकी और अमेरिकी सैन्य अड्डों की व्यापक उपस्थिति मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को बढ़ा रही है. कतर, बहरीन, कुवैत, और यूएई जैसे देशों में अमेरिकी सैनिकों की भारी तैनाती ईरान के लिए रणनीतिक चुनौती है, लेकिन उसकी सीमित सैन्य क्षमता उसकी जवाबी कार्रवाई को मुश्किल बना रही हैं. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विभिन्न देशों की शांति की अपीलों के बावजूद, तनाव कम होने की संभावना कम है.