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अफगानिस्तान में भूकंप ने मचाई तबाही! 250 की मौत और 500 से ज्यादा घायल, दिल्ली- NCR तक हिली धरती

अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी इलाके में रविवार- सोमवार की मध्यरात्रि 6.0 तीव्रता का भूकंप आया. झटके भारत के दिल्ली-एनसीआर और पाकिस्तान तक महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र जलालाबाद से 27 किमी दूर और 8 किमी गहराई पर था. नांगरहार प्रांत में 9 लोगों की मौत और 15 घायल हुए. इसके साथ ही दिल्ली- एनसीआर में भी भूकंप की कंपन को लोगों ने महसूस किया.

Source: Social Media
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अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी इलाके में धरती रविवार- सोमवार की मध्यरात्रि अचानक भूकंप के तेज झटकों से कांप उठी. संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई. यह झटका इतना तेज था कि जिसकी धमक भारत के दिल्ली-एनसीआर और पाकिस्तान के कई हिस्सों तक पहुंच गईं. अफगानिस्तान में आए भूकंप में 250 से ज्यादा लोगों के मौत और 500 से अधिक के घायल होने की खबर है.

दरअसल, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के जलालाबाद शहर से करीब 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व में था. यूएसजीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रविवार रात 19:17:34 यूटीसी समय पर आया, जो भारतीय समयानुसार 1 सितंबर की सुबह करीब 12:47 बजे था. गहराई महज 8 किलोमीटर थी, जिस वजह से झटके सतह पर ज्यादा तेज महसूस हुए.अफगानिस्तान के नांगरहार जन स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता नकीबुल्लाह रहीमी ने बताया कि सभी घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. तस्वीरें जो सोशल मीडिया और न्यूज एजेंसियों से सामने आई हैं, वे दिल दहला देने वाली हैं. कई घर पूरी तरह मलबे में बदल गए. रहीमी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "झटके इतने तेज थे कि लोग नींद से जागकर बाहर भागे. कई इलाकों में बिजली गुल हो गई, और सड़कें दरारों से भर गईं." वही दिल्ली एनसीआर में भूकंप के झटके आते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल गए. इस प्राकृतिक आपदा में 250 से ज्यादा लोगों के मौत और 500 से अधिक के घायल होने की खबर है. 

अफगानिस्तान में क्यों आ रहा बार-बार भूकंप? 

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अफगानिस्तान में भूकंप कोई नई बात नहीं है. रेड क्रॉस की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र भूवैज्ञानिक रूप से बेहद सक्रिय है. यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है. एक बड़ी फॉल्ट लाइन सीधे हेरात शहर से होकर गुजरती है, जिससे यहां भूकंप की आशंका लगातार बनी रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में हर साल दर्जनों छोटे-बड़े झटके आते रहते हैं. पिछले महीने ही, 2 अगस्त को 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 87 किलोमीटर थी. इसके चार दिन बाद, 6 अगस्त को 4.2 तीव्रता का झटका महसूस हुआ. ये घटनाएं साफ दिखाती हैं कि यहां टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल लगातार जारी है. वैज्ञानिकों के अनुसार, सतही भूकंप ज्यादा खतरनाक होते हैं, क्योंकि इनकी गहराई कम होती है. ताजा झटका महज 8 किलोमीटर गहरा था, इसलिए इसका असर सतह पर ज्यादा महसूस किया गया.

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सरल शब्दों में भूकंप को समझिए 


वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सतह टेक्टॉनिक प्लेटों से बनी है, जो गर्म लावा पर तैरती रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं तो किनारे मुड़ जाते हैं और दबाव बढ़ने पर टूट जाते हैं. इस दौरान दबाव में दबी ऊर्जा बाहर निकलती है और भूकंप आता है. यह प्रक्रिया करोड़ों सालों से जारी है. हिंदूकुश जैसा इलाका प्लेटों की अधिक सक्रियता के कारण बार-बार भूकंप झेलता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इन पैटर्न को समझकर हम बचाव के उपाय कर सकते हैं. जैसे भूकंप-रोधी इमारतें बनाना और आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग लेना.

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कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की ताकत को रिक्टर स्केल से मापा जाता है. यह एक गणितीय पैमाना है, जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहा जाता है. यह स्केल सामान्यतः 1 से 9 तक होती है और भूकंप के केंद्र यानी एपीसेंटर से निकली ऊर्जा पर आधारित होती है. रिक्टर स्केल भूकंपीय तरंगों की शक्ति को लॉगरिदमिक तरीके से मापता है, यानी स्केल पर हर अगला अंक पिछले की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक ऊर्जा दर्शाता है. उदाहरण के तौर पर, 5.0 तीव्रता का भूकंप 4.0 से करीब 10 गुना अधिक शक्तिशाली होता है. हाल ही में आया यह भूकंप 6.0 तीव्रता का था, जो काफी मजबूत माना जाता है. अच्छी बात यह है कि अगर लोग पहले से तैयार हों, तो ऐसे झटकों से नुकसान को कम किया जा सकता है. कई देशों में सिस्मोग्राफ और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से भूकंप की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, हालांकि इसकी सटीक भविष्यवाणी करना अब भी बड़ी चुनौती है.

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बताते चलें कि अफगानिस्तान में आया यह भूकंप एक बार फिर यह साबित करता है कि प्रकृति कितनी अप्रत्याशित और शक्तिशाली है. हिंदूकुश जैसे भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में लोगों के लिए सतर्क रहना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना बेहद जरूरी है. अच्छी बात यह रही कि भारत जैसे पड़ोसी देशों में भूकंप के झटके तो महसूस हुए, लेकिन किसी तरह की जनहानि की खबर नहीं आई. विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी साधनों और जागरूकता के जरिए हम भूकंप जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

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