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मध्यस्थता नहीं आतंकिस्तान की मदद कर रहा था ड्रैगन...भारत ने चीन के फर्जी दावों की निकाली हवा, कर दी बोलती बंद

ट्रंप के बाद अब चीन ने भी भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य जंग में मध्यस्थता का दावा किया है. भारत ने ट्रंप को दिए बयान का ही हवाला देकर चीन की बोलती बंद कर दी है.

PM Modi And Xi Jinping (File Photo)
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भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाली और सीजफायर कराने के चीन के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने साफ कहा है कि उसने कभी भी द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप, एंट्री और रोल को न कभी स्वीकार किया था और न ही कभी करेगा. इतना ही नहीं, जहां तक युद्धविराम की बात है, तो यह पाकिस्तान के अनुरोध पर किया गया था.

आपको बता दें कि इस साल मई की शुरुआत में हुए भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य जंग में मध्यस्थता का चीन ने दावा किया है. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन ने इस साल कई मुद्दों पर मध्यस्थता की, जिनमें भारत-पाकिस्तान का युद्ध भी शामिल था.

चीनी विदेश मंत्री ने क्या झूठा दावा किया?

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बीजिंग में ‘अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और चीन के विदेश संबंधों’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि, “दूसरे विश्व युद्ध के बाद से 2025 में किसी भी समय की तुलना में सीमा-पार संघर्ष ज्यादा बार हुए हैं. भू-राजनीतिक उथल-पुथल फैलती रही. लंबे समय तक चलने वाली शांति के लिए हमने एक निष्पक्ष और सही रुख अपनाया है.”

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वांग यी ने आगे कहा, “विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए हमने निष्पक्ष और सही रुख अपनाते हुए उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच मुद्दों और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच हालिया संघर्षों में मध्यस्थता की.” भारत ने खारिज किया चीन का दावा

इसी को भारत सरकार ने ट्रंप के बयान का हवाला देकर खारिज कर दिया. सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत इस तरह के दावों को पहले भी खारिज कर चुका है और कई मौकों पर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने कहा कि, “हम पहले ही ऐसे दावों का खंडन कर चुके हैं. हमारा रुख बार-बार साफ किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था. इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी.”

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ट्रंप ने भी किया था इसी तरह का दावा

वहीं जहां तक ट्रंप के दावे की बात है, भारत ने ट्रंप के बयान को भी हर स्तर पर खारिज किया था. चाहे वह द्विपक्षीय बातचीत हो या फिर संसद, सरकार ने दो टूक कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. पीएम मोदी ने उस वक्त भी पाकिस्तान के साथ सीजफायर पर सहमति के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता करने के दावों को खारिज किया था. 

पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने रोकी थी सैन्य कार्रवाई

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“पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कभी भी, किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील या भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता जैसे विषयों पर बात नहीं हुई थी. सैन्य कार्रवाई रोकने की बात सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, और वह भी पाकिस्तान के आग्रह पर हुई थी.” ट्रंप के साथ हुई करीब 35 मिनट की बातचीत में पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत ने न कभी मध्यस्थता स्वीकार की है, न करता है और न ही कभी करेगा.

चीन ने भारत की पीठ में घोंपा छुरा

चीन भले ही ऑपरेशन सिंदूर में शांति बहाली का दावा कर रहा हो और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की बात कर रहा हो, लेकिन ड्रैगन की भारत-विरोधी साजिश और पाकिस्तान को गुप्त रूप से दी गई मदद भी एक सच्चाई है. चीन ने छिप-छिपकर पाकिस्तान की मदद की. चाहे सैन्य हो, सैटेलाइट हो, सिविल हो, इंटेलिजेंस हो, खुफिया हो या फिर कूटनीतिक हर तरह से उसकी मदद की गई.

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ड्रैगन ने आतंकिस्तान की हर तरह से की मदद

चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को आधुनिक हथियार जैसे HQ-9, PL-15 मिसाइल और J-10 फाइटर जेट सप्लाई किए. जहां तक हथियारों की बात है, तो पाकिस्तान को सबसे ज्यादा सैन्य उपकरण चीन ही देता रहा है, ताकि उनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सके. चीन पाकिस्तान को अपनी प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करता है.

जहां तक आधुनिक हथियारों के प्रयोग की बात है, तो यह पहली बार था जब चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और J-10 फाइटर जेट जैसे आधुनिक हथियारों का वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल किया गया. इतना ही नहीं, चीन ने सैटेलाइट कवरेज, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और साइबर गतिविधियों के जरिए पाकिस्तान को खुफिया जानकारी और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन में मदद की. दोनों देशों के DGMO की बातचीत के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि चीन भारतीय सेना की मौजूदगी की रियल-टाइम जानकारी पाकिस्तान को दे रहा था. मध्यस्थता नहीं पाकिस्तान की छिपकर मदद कर रहा था चीन

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जहां तक चीन के मध्यस्थता के दावे की बात है, तो वह सरासर झूठ है. जबकि पाकिस्तान को युद्ध के लिए तैयार करने और उकसाने का काम भी चीन ने ही किया, और उसकी पूरी सैन्य कार्रवाई के दौरान भूमिका संदिग्ध रही.

पाकिस्तान को अपने हथियारों के लैब की तरह इस्तेमाल करता है चीन

चीन के बारे में कहा जाता है कि वह पाकिस्तान को अपनी वेपन टेस्टिंग लैब की तरह इस्तेमाल करता है. वह न सिर्फ अपने यहां बने हथियारों की पाकिस्तान में लैब-टेस्टिंग करता है, बल्कि उसका पैसा भी पाकिस्तान से ही लेता है. कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान को सैन्य और खुफिया सहायता देकर उसकी मदद की, जिससे युद्ध में चीन की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई. भारत ने चीन के हथियारों का जोरदार मुकाबला किया और ऐसी मार मारी कि चीनी मिसाइल कंपनियों और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़ी कंपनियों के स्टॉक्स बिल्कुल क्रैश हो गए.

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उल्लेखनीय है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) और पाकिस्तान स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया था. इसके बाद पाकिस्तान के नाकाम हमलों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. बाद में पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर हुआ. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों से दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने का दावा करते नजर आए, जबकि भारत इसे लगातार नकारता रहा.

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