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'युद्ध में पाकिस्तान का साथ मत देना...', अपने ही देश के खिलाफ खड़े हुए पाकिस्तानी इमाम, मुस्लिमों से की यह अपील

इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलाना और इमाम अब्दुल्ला अजीज गाजी ने पाकिस्तान और उसकी सेना पर बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि "सभी मुसलमानों से मेरी अपील है कि अगर भारत के साथ संभावित युद्ध की स्थिति बनी. तो पाकिस्तान का समर्थन न करें."

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को हर रोज कोई ना कोई झटका दे रहा है. लेकिन अब ऐसे हालात बन गए हैं कि पाकिस्तान के लोग ही अपने देश के खिलाफ खड़े हो गए हैं. वह खुद भारत से युद्ध नहीं चाहते हैं. क्योंकि उन्हें अब तक के हुए युद्ध पर गहरा विचार विमर्श किया है. उन्हें अपनी हार का डर अभी से सताने लगा है. भारत ने युद्ध की हर एक रणनीति तैयार कर ली है. केंद्र की मोदी सरकार 7 मई को देश भर में मॉकड्रिल करने जा रही है. ताकि किसी भी हमले में देश के नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर ठहरने व उन्हें खुद के बचाव की ट्रेनिंग दी जा सके. इस बीच पाकिस्तान से एक ऐसी वीडियो वायरल हो रही है. जहां पाकिस्तान के कई बड़े इमाम देश के हर एक मुसलमानों से भारत से युद्ध की नौबत आने पर पाकिस्तान का साथ न देने की अपील कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस वीडियो में इस्लामाबाद के लाल मस्जिद के मौलाना और इमाम अब्दुल्ला अजीज गाजी नजर आ रहे हैं. यही नहीं उन्होंने पाकिस्तान की आर्मी पर भी जमकर निशाना साधा है. 

"अगर युद्ध हुआ, तो साथ मत देना...," - पाकिस्तानी इमाम

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलाना और इमाम अब्दुल्ला अजीज गाजी ने पाकिस्तान और उसकी सेना पर बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि किसी और देश से ज्यादा पाकिस्तान में ही मुसलमानों के ऊपर अत्याचार हो रहे हैं. जो वीडियो वायरल हो रहा है. उसमें वह अन्य मुसलमानों से हाथ उठाने के लिए कहते हैं. जो युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करना चाहते हैं. इसके बाद बहुत कम लोगों ने अपने हाथ उठाएं.  उन्होंने लोगों से खास अपील की है कि "अगर जंग के हालात बने. तो आप संभावित युद्ध में पाकिस्तान का समर्थन न करें."


अपने ही लोगों पर बम फेंकती है पाकिस्तान सरकार

इसके अलावा मौलाना इमाम अब्दुल्ला अजीज गाजी ने यह भी कहा कि "भारत और पाकिस्तान के बीच का युद्ध धर्म का युद्ध नहीं है. यह पाकिस्तान के समुदाय का युद्ध है. पाकिस्तान में इस समय भारत से ज्यादा क्रूरता और बुरे हालात बने हुए हैं. मुसलमानों की प्रति जितनी क्रूरता यहां पर है. उतना भारत में नहीं है. पाकिस्तान सरकार अपने ही लोगों पर बम फेंकती है. क्या भारत में भी ऐसे ही लोग गुम होते हैं ? जैसे यहां हो रहे हैं ? पश्तून, बलोच, पत्रकार, पीटीआई और कार्यकर्ता मौलवी गायब हो रहे हैं. इनके साथ अन्याय हो रहा है. इसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान है. हम भारत से जंग की बात करते हैं. जबकि हमारे यहां से अच्छा इस्लाम की स्थिति भारत में है. यहां की लाल मस्जिद लंबे समय से कट्टरपंथी विचारधारा और तालिबान जैसे संगठनों के समर्थन के लिए पहचानी जाती है. भारत की सेना ने कभी लाल मस्जिद या वजीरिस्तान पर बमबारी नहीं की है." 

लाल मस्जिद का इतिहास 

बता दें कि इस्लामाबाद की जिस लाल मस्जिद से मौलाना और  इमाम अब्दुल्ला अजीज गाजी ने यह बयान दिया है. उस मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है. यह मस्जिद साल 1960 में स्थापित हुई थी. पाकिस्तान के मुस्लिम समाज के ऊपर इस मस्जिद और इमाम का गहरा प्रभाव है. लाल मस्जिद अपनी कट्टरपंथी विचारधारा के लिए हमेशा से जानी जाती है. यह कई बार चर्चाओं में आ चुकी है. साल 2007 में भी यह मस्जिद विवादों में थी. उस दौरान मस्जिद और उसके सहयोगी मदरसे जामिया हफ्सा कट्टरपंथी गतिविधि में शामिल रही थी. यहां के छात्रों ने पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने की मांग की थी. उस दौरान सेना ने बड़ा एक्शन लिया था. इसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद बने युद्ध के हालात

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे. आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था. भारत सरकार ने इसके बाद कई  बड़े फैसले लेकर पाकिस्तान को हिला कर रख दिया. अपने दुश्मन से बदला लेने के लिए भारत पूरी तरीके से बेचैन नजर आ रहा है. यही वजह है कि इस हफ्ते भारत पाकिस्तान पर कोई बड़ा हमला कर सकता है. इसके लिए सेना ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है.
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