×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ चाल से भारत को मिला करोड़ों का बाजार

डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी ने भारत के खिलौना उद्योग को एक बड़ा मौका दे दिया है। अमेरिका ने चीन, वियतनाम, बांग्लादेश जैसे देशों से आने वाले खिलौनों पर भारी टैरिफ लगा दिया है, जबकि भारत को कम शुल्क पर मौका दिया गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ चाल से भारत को मिला करोड़ों का बाजार
Advertisement
क्या आपने कभी सोचा है कि अमेरिका और चीन के बीच की आर्थिक जंग भारत में बैठे एक छोटे से खिलौना निर्माता के भाग्य को बदल सकती है? शायद नहीं! लेकिन एक बड़ी वैश्विक नीति ने भारत के खिलौना उद्योग के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी ने दुनिया की सप्लाई चेन में हलचल मचा दी है, और इस हलचल का सीधा लाभ अब भारत को मिलने लगा है।

जहां पूरी दुनिया डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को लेकर मिली-जुली राय रखती है, वहीं भारतीय खिलौना उद्योग के लिए ये नीति किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही। दरअसल, अमेरिका ने चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से आने वाले खिलौनों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिए हैं। चीन पर 54%, वियतनाम पर 46%, बांग्लादेश पर 37%, इंडोनेशिया पर 32% और थाईलैंड पर 36% का आयात शुल्क लगाया गया है। जबकि भारत से आने वाले खिलौनों पर महज 26% का शुल्क रखा गया है। अब जरा सोचिए, जब एक ही प्रोडक्ट चीन से 54% टैरिफ पर और भारत से 26% टैरिफ पर अमेरिका पहुंचेगा, तो अमेरिकी कंपनियां किसे प्राथमिकता देंगी?

भारत बन रहा है नया हब

इस फैसले के बाद भारतीय खिलौना निर्माता उम्मीदों से भरे हुए हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में फैक्ट्रियों में काम की रफ्तार तेज हो चुकी है। छोटे शहरों और कस्बों में खिलौनों की यूनिटें खुल रही हैं और MSME सेक्टर इस बदलाव को सुनहरे भविष्य के रूप में देख रहा है। सरकार ने भी इसे लेकर “मेक इन इंडिया” के तहत कई अहम फैसले लिए हैं, जैसे कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (Quality Control Order) लागू करना और चाइनीज खिलौनों के आयात पर सीमाएं लगाना।

आपको बता दें कि पिछले तीन वर्षों में भारत का खिलौना निर्यात 32.6 करोड़ डॉलर से बढ़कर 34.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है। यह ग्रोथ मामूली लग सकती है, लेकिन जब आप इसे इस पृष्ठभूमि में देखते हैं कि पहले भारत पूरी तरह चीन से आयात पर निर्भर था, तो यह एक क्रांतिकारी बदलाव लगता है।

2012-13 में भारत ने चीन से 21.4 करोड़ डॉलर के खिलौने आयात किए थे। तब चीन का भारत के खिलौना बाजार में 94% हिस्सा था। लेकिन 2023-24 में यह आयात घटकर 4.16 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया और चीन की हिस्सेदारी भी घटकर 64% पर आ गई है। यह दिखाता है कि भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभर रहा है।

अमेरिकी बाजार की भूख और भारत की आपूर्ति

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है, खासकर बच्चों के प्रोडक्ट्स के लिए। वहां की कंपनियां अब ऐसे देशों की तलाश में हैं जहां से वे सस्ते, सुरक्षित और टिकाऊ खिलौने मंगवा सकें। चीन पर भरोसा टूटने के बाद भारत स्वाभाविक विकल्प बन रहा है। ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी ने भारत को सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धी बढ़त दी है। अमेरिकी कंपनियां अब भारत की ओर रुख कर रही हैं, और कई बड़ी अमेरिकी रिटेल चेन जैसे Walmart और Target भारतीय खिलौना निर्माताओं से करार करने की दिशा में कदम उठा रही हैं। इससे न सिर्फ भारतीय इकॉनमी को बल मिलेगा, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

हालांकि, यह सफर आसान नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी और प्रोडक्शन कैपेसिटी पर गंभीरता से काम करना होगा। अमेरिका और यूरोप के बाजारों की गुणवत्ता अपेक्षाएं बहुत ऊंची होती हैं। भारत को न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनानी होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और इनोवेशन में भी निवेश करना होगा। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने खिलौना उद्योग के लिए खास क्लस्टर्स बनाने की योजना बनाई है। इन क्लस्टर्स में ट्रेनिंग, तकनीक, फाइनेंस और मार्केटिंग से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई जाएंगी।

आज की दुनिया में जब हर देश अपनी आर्थिक रणनीति को दोबारा लिख रहा है, भारत के लिए यह समय 'सोने की खान' साबित हो सकता है। अमेरिका और चीन के व्यापार युद्ध में भारत को जो मौका मिला है, वह शायद दशक में एक बार ही आता है। यदि भारत इसे समझदारी से संभालता है, तो आने वाले 5 वर्षों में न सिर्फ खिलौनों के बाजार में, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में भी भारत ग्लोबल लीडर बन सकता है। भारत के लिए यह सिर्फ एक सेक्टर की बात नहीं है यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

यह भी पढ़ें

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें