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गाजा में शांति के लिए ट्रंप ने मांगा PM मोदी का साथ, अमेरिका ने भारत को दिया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का न्योता

अमेरिका ने इजरायल-हमास युद्ध खत्म करने की पहल के तहत भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. यह बोर्ड राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना का दूसरा चरण है.

Donald Trump/ Narendra Modi (File Photo)
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अमेरिका ने इजरायल-हमास युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. यह बोर्ड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना का दूसरा चरण है, जिसे वे गाजा क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए निर्णायक मानते हैं. खास बात यह है कि यह निमंत्रण ऐसे समय आया है, जब युद्धविराम के बावजूद गाजा में तनाव और हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं.

क्या है गाजा बोर्ड ऑफ पीस?

गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस के दूसरे चरण के गठन की घोषणा की. इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा के रोजमर्रा के प्रशासनिक मामलों पर नजर रखना और वहां के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को सही दिशा देना है. यह बोर्ड एक तकनीकी समिति के कामकाज का ऑब्जर्वेशन करेगा, जो युद्धविराम फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करेगी. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि बिना मजबूत प्रशासनिक ढांचे के गाजा में शांति टिकाऊ नहीं हो सकती. इस योजना के तहत गाजा को दोबारा रहने योग्य बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी. इसमें बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को बेहतर करना, और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना शामिल है. ट्रंप की योजना का एक अहम पहलू यह भी है कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक धनराशि जुटाई जाए, ताकि क्षेत्र की स्थिति हर स्तर पर सुधर सके.

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बोर्ड के स्थायी सदस्यता के लिए करना होगा भुगतान 

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अमेरिका ने भारत के अलावा कम से कम चार अन्य देशों को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है. योजना से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, यदि कोई देश स्थायी सदस्यता चाहता है तो उसे 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा. हालांकि, तीन साल के लिए सदस्यता प्राप्त करने के लिए किसी तरह की अनिवार्य वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं रखी गई है. यह व्यवस्था इस बोर्ड को ज्यादा समावेशी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. भारत को मिला यह निमंत्रण वैश्विक राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को साफ तौर पर दर्शाता है. वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है, जो संतुलित दृष्टिकोण के साथ शांति और संवाद को प्राथमिकता देता है. गाजा बोर्ड ऑफ पीस में भारत की संभावित भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.

अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा?

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इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोरे ने भी इस पहल को लेकर अहम संदेश दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में कहा कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोर्ड ऑफ पीस में भाग लेने का आमंत्रण देते हुए गर्व महसूस हो रहा है. उनके अनुसार, यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने के साथ-साथ प्रभावी शासन को बढ़ावा देगा, जिससे स्थिरता और समृद्धि का रास्ता खुलेगा.

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बताते चलें कि गाजा बोर्ड ऑफ पीस को लेकर ट्रंप की यह पहल मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक गंभीर प्रयास मानी जा रही है. भारत जैसे जिम्मेदार और प्रभावशाली देश की भागीदारी से इस योजना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बोर्ड गाजा में वास्तविक शांति और विकास लाने में कितना सफल साबित होता है.

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