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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं रुके ट्रंप, ग्लोबल टैरिफ 10 से बढ़ाकर 15% किया; जानें भारत पर क्या होगा असर

ट्रंप ने शनिवार को ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया किया, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में ट्रंप ने अदालत और कुछ जजों की आलोचना की, जबकि तीन जजों की तारीफ की.

Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की न्यायपालिका के बीच चल रहा टकराव अब वैश्विक आर्थिक संकट की शक्ल लेने लगा है. शनिवार को ट्रंप ने एक बड़ा और विवादित कदम उठाते हुए घोषणा किया है कि वह वैश्विक स्तर पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर देंगे. यह फैसला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पहले के निर्णय को असंवैधानिक ठहराए जाने के महज 24 घंटे बाद आया. ट्रंप का मानना है कि कई देशों में लंबे समय तक अमेरिका का फ़ायदा उठाया है इसलिए अब यह फैसला उसी का एक जवाब है. 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह आदेश दिया कि राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार सीमित है. अदालत ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत ट्रंप द्वारा लगाया गया अतिरिक्त शुल्क असंवैधानिक करार दिया. इसका सीधा मतलब यह था कि भारत और अन्य देशों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को वापस लेकर पहले की तरह लगभग 3.5% पर लाया जाना चाहिए था.

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ट्रंप की प्रतिक्रिया

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ट्रंप ने इस फैसले को सोशल मीडिया के जरिए कड़ा विरोध जताया. उन्होंने इसे हास्यास्पद, खराब तरीके से लिखा गया और अमेरिका विरोधी करार दिया. उन्होंने उन जजों की तीखी आलोचना की जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला सुनाया, जबकि असहमति जताने वाले तीन जजों ब्रेट कवाना, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो की जमकर तारीफ की.

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नया टैरिफ: 15 प्रतिशत

कोर्ट के फैसले के बाद को दरकिनार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 10% शुल्क लगा दिया. अब इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया है. यह कदम वैश्विक व्यापार जगत में चिंता का विषय बन गया है क्योंकि अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को अब अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है.

भारत पर कैसा होगा असर?

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भारत के लिए स्थिति मिश्रित है. पिछले साल भारत को अमेरिका से 25% टैरिफ का सामना करना पड़ा था, जो रूस से तेल आयात करने के कारण बढ़कर 50% तक पहुंच गया था. फरवरी 2026 में अंतरिम व्यापार समझौते के बाद राहत मिली और ट्रंप ने भारत के लिए शुल्क को घटाकर 18% कर दिया. यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू होता, तो यह दर गिरकर 3.5% हो जाती. लेकिन नए 15% वैश्विक टैरिफ के बाद भारत पर प्रभावी टैरिफ दर अब लगभग 18.5% रहेगी, जो इस महीने की शुरुआत में तय 18% के मुकाबले केवल 0.5% अतिरिक्त बोझ है.

150 दिनों का अल्टीमेटम

ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ये नए टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए वैध हैं. यदि इन्हें बढ़ाना है तो अमेरिकी कांग्रेस से नया कानून पारित करना होगा. वाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि जिन देशों के साथ अमेरिका के व्यापार समझौते हैं, उन्हें फिलहाल इस वैश्विक टैरिफ के दायरे में संतुलित रखा जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तत्काल राहत देने के प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन वैश्विक व्यापार पर इसके लंबे समय तक गंभीर असर पड़ सकता है. भारत सहित कई देशों की कंपनियों को इन टैरिफों के चलते अपनी योजना और निवेश रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है.

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बताते चलें कि यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में राजनीतिक और न्यायिक टकराव किस हद तक वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकते हैं. आने वाले महीनों में व्यापार विशेषज्ञ और नीति निर्माता इसी पर नजर बनाए रखेंगे कि ट्रंप प्रशासन इस टैरिफ नीति को आगे कैसे लागू करता है और इसके असर को संतुलित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं.

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