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अफगानिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराया संकट, महिलाओं के नर्सिंग की पढ़ाई पर लगी पाबंदी

तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं पर एक और पाबंदी लगाते हुए नर्सिंग की पढ़ाई पर रोक लगा दी है। इस फैसले ने महिलाओं के शिक्षा और करियर के सपनों को बर्बाद कर दिया है और देश की पहले से बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

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अफगानिस्तान में तालिबान के शासन ने महिलाओं के अधिकारों पर एक और हमला किया है। देश में महिलाओं पर पहले ही अनगिनत पाबंदियां लगा दी गई हैं, लेकिन हाल ही में तालिबान ने नर्सिंग की पढ़ाई पर भी रोक लगा दी है। इस नए फैसले ने न केवल महिलाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, बल्कि अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।
क्या है नई पाबंदी?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तालिबान ने महिलाओं के नर्सिंग और मेडिकल ट्रेनिंग में भाग लेने पर रोक लगा दी है। भले ही इस फैसले को आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है, लेकिन काबुल में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के डायरेक्टर्स को यह निर्देश मौखिक रूप से दिया गया है। इन संस्थानों के प्रबंधकों से कहा गया है कि वे महिलाओं को पढ़ाई से रोकें और सर्वोच्च नेता के आदेश को लागू करें।

बीबीसी अफगान द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, नर्सिंग की पढ़ाई कर रहीं छात्राओं को यह खबर सुनने के बाद रोते हुए देखा गया। ये लड़कियां अपने सपनों और करियर को बर्बाद होता देख बेहद आहत हैं। शिक्षा से वंचित किए जाने पर उनमें गुस्सा और दुख का मिला-जुला माहौल है। संस्थानों के डायरेक्टर्स ने बताया कि महिलाओं को अब संस्थानों में पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, कई प्रबंधकों ने इस आदेश पर लिखित निर्देश की मांग की है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट
अफगानिस्तान का स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही बेहद कमजोर है। दवाइयों की कमी और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की भारी किल्लत के चलते स्थिति बेहद गंभीर है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि महिलाओं को नर्सिंग से रोकने के इस कदम से देश को और भी ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। देश में पहले से ही पेशेवर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है, और इस फैसले के बाद यह समस्या और विकराल हो जाएगी।

तालिबान ने सत्ता संभालने के बाद महिलाओं के अधिकारों को लगभग खत्म कर दिया है। पहले उन्हें सरकारी नौकरियों से हटाया गया, फिर शिक्षा से वंचित किया गया और अब नर्सिंग जैसे जरूरी पेशे से भी बाहर कर दिया गया। तालिबान का यह तानाशाही रवैया न केवल महिलाओं के जीवन पर, बल्कि पूरे समाज पर गहरा असर डाल रहा है। इस पाबंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरी चिंता जताई है। यूनाइटेड नेशन्स और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने तालिबान पर महिलाओं के अधिकार बहाल करने का दबाव डाला है। हालांकि, अफगानिस्तान के भीतर विरोध की आवाजें कमजोर हैं, क्योंकि तालिबान का शासन दमनकारी है और लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की आजादी नहीं है।

तालिबान का यह फैसला न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन है, बल्कि अफगानिस्तान की पहले से ही बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक और बड़ा झटका है। ऐसे समय में जब देश को योग्य और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सबसे ज्यादा जरूरत है, इस तरह के फैसले से स्थिति और गंभीर हो सकती है। महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अधिकार से वंचित करना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक पूरे समाज के विकास को भी रोकने जैसा है।
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