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ट्रंप युग की शुरुआत के बीच अमेरिका में अप्रवासियों की उलटी गिनती शुरू, ट्रंप सरकार सख्त

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक अवैध अप्रवासियों को देश से बाहर निकालना है। उन्होंने अपने चुनावी वादों में 1.1 करोड़ अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने का संकल्प लिया था। अब जब वह सत्ता में हैं, तो इस नीति को लागू करने में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनमें सुरक्षा, विरोध प्रदर्शन और कानूनी बाधाएं शामिल हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के साथ ही एक बड़े राजनीतिक भूचाल की नींव रख दी है। उनकी निर्वासन नीति को लेकर न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में वादा किया था कि वह लगभग 1.1 करोड़ अवैध अप्रवासियों को देश से बाहर निकाल फेंकेंगे। उन्होंने अपने भाषणों में कई बार यह बात दोहराई थी और 2016 के चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि उनकी सरकार अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कठोर कदम उठाएगी। लेकिन अब जब वह सत्ता में आ चुके हैं, तो इस नीति को लागू करने को लेकर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।

हाल ही में, अमेरिका में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ चलाए जाने वाले इस अभियान की गोपनीय जानकारी लीक होने की खबरें सामने आई हैं। इस कारण ट्रंप प्रशासन ने अपनी योजना को लेकर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। इस योजना की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहती। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी इस मुद्दे पर सतर्क हैं और संभावित विरोध तथा सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया में लगी हैं।

ट्रंप का रुख और उनकी प्राथमिकताएं

ट्रंप ने एक टेलीविज़न साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि उनका सर्वोच्च लक्ष्य देश से अवैध अप्रवासियों को बाहर निकालना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निर्वासन अभियान कब और किन क्षेत्रों में शुरू होगा, यह बताना फिलहाल मुनासिब नहीं है। राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने इस विषय पर बार-बार जोर दिया है कि अवैध अप्रवासियों से निपटने के लिए अमेरिका का सबसे कठोर अभियान शुरू किया जाएगा।

इस योजना के पहले चरण में शिकागो, इलिनॉय, न्यूयॉर्क और मियामी जैसे शहरों को टारगेट किया जाएगा। इन शहरों को चुनने के पीछे मुख्य कारण यह हैं कि यहां बड़ी संख्या में अप्रवासी समुदाय निवास करते हैं और स्थानीय प्रशासन द्वारा अप्रवासियों को समर्थन भी प्राप्त है। इसके अलावा, इन शहरों में ट्रंप प्रशासन की नीतियों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। बताया जा रहा है कि शिकागो में पहले चरण के दौरान करीब 200 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस बात को लेकर भी चिंतित है कि ऐसी नीतियों को लागू करने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

नीतियों के लागू होने में आ रही दुविधा

इस अभियान को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसे लागू करने में अनेक चुनौतियाँ आ रही हैं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती है - सुरक्षा। ट्रंप की इस योजना से न केवल प्रवासी समुदाय में डर और तनाव का माहौल है, बल्कि सरकार के भीतर भी कई अधिकारियों को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। टॉम होमन, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने बॉर्डर जार नियुक्त किया है, वह पूर्व में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के निदेशक रह चुके हैं और उनके पास बॉर्डर सुरक्षा और प्रवासन नीतियों को लागू करने का व्यापक अनुभव है, खुद कह चुके हैं कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।

इसके अलावा, कई मानवाधिकार संगठनों ने इस अभियान का कड़ा विरोध किया है। वे इसे अमानवीय करार दे रहे हैं और इसे ट्रंप की कठोर नीतियों का हिस्सा बता रहे हैं। शिकागो जैसे शहरों में अप्रवासी समुदायों के लिए काम करने वाले संगठनों ने कहा है कि वे किसी भी तरह से इस अभियान के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।

विपक्ष का विरोध

अवैध अप्रवासियों के खिलाफ इस अभियान को लेकर ट्रंप प्रशासन को अमेरिका के विभिन्न राज्यों से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा शासित राज्यों में इस नीति के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है। शिकागो के मेयर ब्रैंडन जान्सन और इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने खुले तौर पर ट्रंप की निर्वासन नीति का विरोध किया है। उन्होंने अपने राज्यों की पुलिस को आदेश दिया है कि वे इस अभियान में कोई सहयोग न करें।

राज्यों का मानना है कि अवैध अप्रवासी उनकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यदि उन्हें इस तरह बाहर निकाला गया तो इससे व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वहीं, डेमोक्रेटिक नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप प्रशासन निर्दोष अप्रवासियों के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो वे कानूनी कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

क्या होगा ट्रंप का अगला कदम?

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी योजनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप लॉस एंजेलेस जाएंगे, जहां वे जंगल में लगी आग की स्थिति का जायजा लेंगे। इस बीच व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन फिलहाल निर्वासन नीति को लागू करने में कोई जल्दबाजी नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप पहले अपनी नीति को लेकर विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों को समझाने की कोशिश करेंगे, जिससे किसी भी प्रकार के बड़े विवाद से बचा जा सके। इस निर्वासन अभियान का अमेरिका की अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कानून व्यवस्था मजबूत होगी। लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह नीति देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है और अमेरिका की विविधता व समावेशी संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप की निर्वासन नीति को लेकर अमेरिका में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां ट्रंप प्रशासन इसे लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने सरकार को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप प्रशासन किस तरह से इस योजना को लागू करता है और क्या इस नीति से अमेरिका की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ता है।
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