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घुटनों पर आए ट्रंप! दुनिया का बदलता पावर सेंटर देख मारी पलटी, जापान पर घटाया टैरिफ, अब भारत की बारी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को नए अमेरिका-जापान व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने इसे दोनों देशों के व्यापार संबंधों के नए युग की शुरुआत बताया. इस समझौते के तहत जापानी आयातों पर 15 फीसदी बेसलाइन टैरिफ लगाया जाएगा, जबकि ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, जेनेरिक दवाओं और कुछ प्राकृतिक संसाधनों को छूट दी गई है.

Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के तमाम देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ बम फोड़ा था. उन्हें लगा कि अब हर देश मजबूरी में उनकी शर्तों और व्यापार नीतियों को मानने पर मजबूर हो जाएगा. लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. वैश्विक स्तर पर ट्रंप के फैसलों की आलोचना हुई और अमेरिका के भीतर भी उनके फैसलों का विरोध शुरू हो गया. हालात ऐसे बने कि अब ट्रंप अपने ही फैसलों से पीछे हटने लगे हैं. इसकी पहली झलक जापान के साथ देखने को मिली, जब उन्होंने टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया.

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए नए अमेरिका-जापान व्यापार समझौते को लागू करने वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. ट्रंप ने इसे अमेरिका-जापान व्यापार संबंधों के “एक नए युग की शुरुआत” बताया. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्रंप लगातार अपनी टैरिफ नीतियों को लेकर वैश्विक आलोचना का सामना कर रहे हैं और अमेरिका के भीतर भी उनके फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं.

क्या है ट्रंप का नया आदेश?

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इस आदेश के तहत अमेरिका में आने वाले लगभग सभी जापानी आयातों पर अब 15 फीसदी का बेसलाइन टैरिफ लगाया जाएगा. हालांकि कुछ सेक्टरों को इससे छूट दी गई है. इनमें ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, एयरोस्पेस उत्पाद, जेनेरिक दवाएं और घरेलू स्तर पर उपलब्ध न होने वाले प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं. व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि यह समझौता “पारस्परिकता के सिद्धांतों और साझा राष्ट्रीय हितों” पर आधारित है. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस डील से न सिर्फ व्यापार घाटा घटेगा, बल्कि अमेरिकी उत्पादन और निर्यात को भी नई गति मिलेगी.

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कैसे हुआ 25 से 15 फीसदी टैरिफ

गौरतलब है कि शुरुआती दौर में ट्रंप प्रशासन ने जापान और दक्षिण कोरिया पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. इस फैसले से अमेरिका और जापान के बीच बातचीत कई बार अटक गई. लेकिन लंबे खींचतान के बाद आखिरकार 15 फीसदी बेसलाइन टैरिफ पर सहमति बनी. यह बदलाव बताता है कि ट्रंप अब अपने पुराने कठोर रुख से पीछे हटने को तैयार दिख रहे हैं. इस समझौते की सबसे अहम बात जापान का अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा है. व्हाइट हाउस ने इसे “अमेरिकी इतिहास में किसी भी अन्य समझौते से अलग” बताया है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन निवेशों से लाखों रोजगार पैदा होंगे, मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी. साथ ही जापान ने अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. टोक्यो न्यूनतम पहुंच योजना के तहत अपने चावल आयात में 75 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा. अनुमान है कि जापान को अमेरिकी कृषि निर्यात हर साल करीब 8 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. इसके अलावा सोयाबीन, मक्का, उर्वरक और बायोएथेनॉल जैसे उत्पादों की खरीद में भी इजाफा होगा.

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भारत के लिए क्या मायने?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह कदम भारत के लिए भी संकेत है. अभी हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया था, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में खटास डाल दी. यह फैसला उस वक्त चौंकाने वाला था क्योंकि मोदी और ट्रंप की दोस्ती को लेकर लंबे समय तक सकारात्मक माहौल बना रहा था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और पूर्व राजदूत निक्की हेली जैसे कई जानकार ट्रंप को पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि भारत के साथ रिश्ते खराब करना अमेरिका के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. यही वजह है कि अब उम्मीद जताई जा रही है कि जापान की तरह भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को भी आने वाले दिनों में घटाया जा सकता है.

ट्रंप पर बढ़ता दबाव

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ट्रंप ने जब वैश्विक स्तर पर “टैरिफ बम” फोड़े थे, तो उन्हें भरोसा था कि बाकी देश दबाव में आकर उनकी शर्तें मान लेंगे. लेकिन हुआ इसके उलट. यूरोप, एशिया और यहां तक कि अमेरिका के भीतर भी इन नीतियों की आलोचना होने लगी. कारोबारी जगत और विपक्ष ने ट्रंप के फैसलों पर लगातार सवाल उठाए. विशेषज्ञों का कहना है कि अब ट्रंप अपने फैसलों से पलटी मारने लगे हैं और जापान डील उसकी पहली मिसाल है. व्हाइट हाउस ने भी माना है कि यह ढांचा “अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए बराबरी का मौका देगा और अमेरिकी निर्यात-आधारित उत्पादन को बढ़ावा देगा.”

एशिया में नया समीकरण

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि ट्रंप के कठोर फैसलों ने भारत, चीन और रूस जैसे देशों को और करीब ला दिया है. हाल ही में चीन में हुए शिखर सम्मेलन में इन तीनों देशों के बीच डॉलर पर निर्भरता घटाने और वैकल्पिक भुगतान प्रणाली बनाने पर सहमति बनी थी. ऐसे में ट्रंप का जापान को लेकर नरम होना इस डर की ओर इशारा करता है कि अगर एशिया एकजुट हुआ तो अमेरिका का दबदबा कमजोर हो सकता है.

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बताते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जापान के साथ किया गया यह व्यापार समझौता केवल दो देशों के बीच की डील नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी है. 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी किया गया टैरिफ बताता है कि ट्रंप अब दबाव में हैं और अपनी नीतियों में लचीलापन दिखाने लगे हैं. भारत के लिए यह एक अहम संदेश है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप जापान की तरह भारत पर भी नरमी दिखाते हैं या फिर रिश्तों की खाई और गहरी होती है.

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