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'भारत को भूखा मारने चला था चीन', मुश्किल में भारत के साथ खड़े हुए दो पुराने मित्र, ड्रैगन की दादागिरी की उल्टी गिनती शुरू

भारत ने चीन द्वारा उर्वरक निर्यात रोकने की चुनौती का कूटनीतिक रूप से सामना किया. खरीफ सीजन की शुरुआत में चीन ने डीएपी की सप्लाई रोक दी, जिससे भारत को इसकी भारी कमी का सामना करना पड़ा. इस संकट से उबरने के लिए भारत को दो मित्र देशों का साथ मिला है. ड्रैगन की दादागिरी खत्म करने की दिशा में ये मील का पत्थर साबित होगा.

'भारत को भूखा मारने चला था चीन', मुश्किल में भारत के साथ खड़े हुए दो पुराने मित्र, ड्रैगन की दादागिरी की उल्टी गिनती शुरू
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भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेतों तक जा पहुंचा. खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले चीन ने भारत को डायमोनियम फॉस्फेट (DAP) खाद की आपूर्ति रोक दी. यह फैसला भारत के लिए एक गंभीर संकट बनकर उभरा, क्योंकि खेती के इस संवेदनशील समय में DAP की जरूरत सबसे ज्यादा होती है. कृषि आधारित देश होने के नाते, भारत को तत्काल उपाय करने की आवश्यकता थी. ऐसे समय में जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे सामरिक कदम उठाए थे, चीन ने अप्रत्यक्ष तौर पर दबाव बनाने की कोशिश की.

साथ आए सऊदी अरब और मोरक्को

चीन की आपूर्ति बंद करने के फैसले ने भले ही परेशानी बढ़ाई हो, लेकिन भारत ने इसे चुनौती की तरह लिया और एक मजबूत कूटनीतिक रणनीति बनाई. भारत ने सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों से संपर्क साधा, जो वैश्विक उर्वरक बाजार में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. सऊदी अरब से बातचीत के बाद भारत को 31 लाख मीट्रिक टन DAP की आपूर्ति का आश्वासन मिला, वहीं मोरक्को से 5 लाख मीट्रिक टन खाद आने की सहमति बनी. यह निर्णय भारत की तत्परता और वैश्विक संबंधों की मजबूत बुनियाद का प्रमाण है.

घरेलू स्टॉक और रूस से बढ़ी उम्मीदें

चीन की तरफ से खाद आपूर्ति रुकने के बाद भी भारत ने अपने किसानों को निराश नहीं होने दिया. सरकार ने न केवल वैकल्पिक देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की, बल्कि घरेलू स्टॉक से 7 लाख मीट्रिक टन की कमी को पूरा करने की योजना पर भी काम शुरू किया. इसके साथ ही रूस से भी बातचीत जारी है, जिससे भारत को उर्वरक की एक और स्थिर सप्लाई लाइन मिल सकती है. चूंकि उर्वरक पर कोई वैश्विक प्रतिबंध नहीं है, ऐसे में यह सौदा दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

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चीन के खिलाफ एक सधी हुई चाल

भारत और चीन के बीच खाद आपूर्ति को लेकर 2023 से ही खींचतान जारी है. चीन ने धीरे-धीरे भारत के साथ नए अनुबंधों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी. ऐसे में भारत की कंपनियों पर समय रहते वैकल्पिक स्रोतों की तलाश का दबाव था. हालांकि चीन की सप्लाई कीमत के लिहाज से सस्ती थी, लेकिन भारत ने रणनीतिक रूप से अपने मित्र देशों से संबंध मज़बूत करते हुए सप्लाई चेन को स्थिर किया. रबी सीजन की शुरुआत से पहले भारत पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके पास अब पर्याप्त DAP का भंडार है और आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहेगी. इसके साथ ही भारत ने मिस्र, नाइजीरिया, टोगो, मॉरिटानिया और ट्यूनीशिया जैसे देशों से भी संवाद शुरू कर दिया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के आपूर्ति संकट से निपटा जा सके. चीन द्वारा खाद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश को भारत ने अपनी सूझबूझ और रणनीतिक रिश्तों की बदौलत फ़ेल कर दिया है.

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बताते चलें कि भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह संकट को अवसर में बदलने की कला में माहिर है. चीन की खाद आपूर्ति रोकने की चाल को मात देकर भारत ने न केवल अपने किसानों की जरूरत पूरी की, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक ताकत का भी परिचय दिया. आने वाले दिनों में भारत का यह अनुभव उसे खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर और सशक्त बनाएगा.

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