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चीन बहाना, भारत पर निशाना... ! अमेरिका ने शुरू की नई जांच, अरबों डॉलर का लग सकता है झटका, PM मोदी की प्राथमिकता में है ये सेक्टर

अमेरिका ने भारत समेत कई देशों की सोलर इंडस्ट्री पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कमिशन (ITC) ने एक नई जांच को मंजूरी दी है, जिसके बाद भारत और अमेरिका के बीच पहले से बिगड़े हुए व्यापारिक रिश्ते और तनावपूर्ण हो सकते हैं. माना जा रहा है कि इस जांच के बाद भारत पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जबकि अमेरिका पहले ही भारतीय सोलर पैनलों पर 50% का शुल्क लगा चुका है.

Image: Donald Trump / PM Modi (File Photo)
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डोनाल्ड ट्रंप ने जब से अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन हिचकोले खाने लगी है. कभी एकतरफा टैरिफ लगा देना, फिर कभी सेंशन लगा देना या तो किसी विशेष सेक्टर और देश से आ रहे निर्यातों पर जांच बैठा देना, ऐसा करके उन्हें लगता है वो यूएस के छोटे उद्योगों को बचा लेंगे और खजाने को भर देंगे. अब कहा जा रहा है कि ट्रंप भारत और चीन के एक और सेक्टर को टार्गेट करने जा रहे हैं.

दरअसल अमेरिका ने भारत समेत कई देशों की सोलर इंडस्ट्री पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कमिशन (ITC) ने एक नई जांच को मंजूरी दी है, जिसके बाद भारत और अमेरिका के बीच पहले से बिगड़े हुए व्यापारिक रिश्ते और तनावपूर्ण हो सकते हैं. माना जा रहा है कि इस जांच के बाद भारत पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जबकि अमेरिका पहले ही भारतीय सोलर पैनलों पर 50% का शुल्क लगा चुका है.

किस बात की जांच कर रहा अमेरिका?

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अमेरिका भारत, लाओस और इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में सोलर पैनल आयात करता है. ITC का दावा है कि चीनी स्वामित्व वाली कंपनियां मौजूदा अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए इन देशों का इस्तेमाल कर रही हैं. यही वजह है कि घरेलू उत्पादन घट रहा है और क्लीन एनर्जी सेक्टर में अरबों डॉलर के निवेश पर खतरा मंडरा रहा है. अमेरिकी ट्रेड कमिशन के मुताबिक अमेरिका जिन चीनी जीजों की सप्लाई और सेक्टर पर रोक लगाता है, टैरिफ लगाता है, उसे वो दूसरे रूट्स के जरिए अमेरिका में निर्यात करता है. एक तरह से ITC भारत पर चीनी प्रॉक्सी का आरोप लगा रहे हैं.

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घरेलू इंडस्ट्री की चिंता या सबक सिखाना मकसद

आपको बता दें कि अमेरिका की सोलर इंडस्ट्री करीब 1.6 अरब डॉलर की है. ITC का कहना है कि भारत और अन्य देशों से आने वाले सस्ते आयात ने घरेलू कारोबार को कमजोर कर दिया है. अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरिंग एलायंस के वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा कि “आज का फैसला हमारी याचिका के आरोपों को सही साबित करता है. चीन समर्थित कंपनियां भारत, लाओस और इंडोनेशिया में अनुचित तरीके से काम कर रही हैं, जिससे अमेरिकी नौकरियां और निवेश प्रभावित हो रहे हैं.”

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आंकड़े बताते हैं कि इन तीनों देशों से अमेरिका को 2022 में जहां सिर्फ 28.9 करोड़ डॉलर का सोलर पैनल आयात हुआ था, वहीं 2023 में यह बढ़कर सीधे 1.6 अरब डॉलर पहुंच गया. इस तेजी ने अमेरिका को चौकन्ना कर दिया है, क्योंकि माना जा रहा है कि असली सप्लाई उन्हीं देशों से हो रही है जिन पर पहले से भारी टैरिफ लागू हैं.

टैरिफ वॉर के बीच भारत के लिए नया संकट
याचिका में कहा गया है कि भारत और बाकी देशों में मौजूद चीनी कंपनियां सरकारी सब्सिडी का फायदा लेकर प्रॉडक्ट को लागत से भी कम कीमत पर बेच रही हैं, जो अमेरिकी व्यापार कानूनों का सीधा उल्लंघन है. हालांकि जांच तीन देशों पर फोकस कर रही है, लेकिन भारत के लिए यह सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. वजह यह है कि वीज़ा प्रतिबंधों और बढ़े हुए टैरिफ की वजह से भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते पहले ही तल्ख हो चुके हैं.

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जांच कब पूरी होगी?
ITC की जांच के साथ-साथ अमेरिकी वाणिज्य विभाग भी अपनी समानांतर जांच कर रहा है. उम्मीद है कि सब्सिडी रोधी टैरिफ पर शुरुआती फैसला 10 अक्टूबर तक आ जाएगा, जबकि अंतिम रिपोर्ट 24 दिसंबर तक पेश की जा सकती है. इसका सीधा असर भारत के सोलर सेक्टर और अरबों डॉलर के निवेश पर पड़ना तय माना जा रहा है.

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