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भारत के खिलाफ़ विरोध को हवा दे रहा चीन! बांग्लादेश-PAK के साथ की बैठक, बीजिंग से मिले नए समीकरण के संकेत

भारत के खिलाफ हमेशा साजिशें रचने वाला चीन, एक बार फिर दक्षिण एशिया में एक्टिव हो गया है. बदलते हालात के बीच चीन नई दिल्ली के खिलाफ बांग्लादेश और पाकिस्तान को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है. इससे पहले बीजिंग ने PAK-अफगानिस्तान को भी एक साथ बैठाया था और आपसी विवाद को बातचीत से हल करने को कहा था. हालांकि भारत की इस पर पैनी नज़र बनी हुई.

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अगस्त 2024 बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट, 2025 में भारत की आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई के बाद तेजी से दक्षिण एशिया की डिप्लोमेसी और पॉलिटिक्स बदल रही है. इसी कड़ी में भारत के तीन पड़ोसी गलबहियां बढ़ाते नज़र आ रहै है. इसी को लेकर ख़बर आ रही है कि चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान त्रिपक्षीय उप विदेश मंत्रियों-विदेश सचिवों की बैठक 19 जून को चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी खुनमिंग में आयोजित हुई. इसके भारत के लिए कई सामरिक और कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. विदेश नीति पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ इसे भारत के लिए एक महत्‍वपूर्ण घटनाक्रम करार दे रहे हैं.


कौन-कौन हुआ बैठक में शामिल?
 चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइतोंग, बांग्लादेश के कार्यवाहक विदेश सचिव रुहुल आलम सिद्दीकी, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के एशिया-प्रशांत मामलों के सहायक सचिव सिद्दीकी बैठक में शामिल हुए और पाकिस्तान की विदेश सचिव अमना बलूच ने वीडियो के माध्यम से बैठक के पहले चरण में भाग लिया.

भारत को अलग-थलग करने की कोशिश

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सुन वेइतोंग ने कहा कि चीनी सरकार पड़ोसी देशों के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है. बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों ही चीन के अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और अच्छे साझेदार हैं और "बेल्ट एंड रोड" के उच्च गुणवत्ता वाले संयुक्त निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साझेदार हैं. ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य और क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों के रूप में, तीनों देशों के सामने राष्ट्रीय पुनरुत्थान और राष्ट्रीय आधुनिकीकरण को प्राप्त करने का मिशन है और सभी को एक शांतिपूर्ण और स्थिर वातावरण की आवश्यकता है. चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सहयोग तीनों देशों के लोगों के साझा हितों में है और क्षेत्र में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि बनाए रखने के लिए अनुकूल हैं. अगर साझा बयान को देखें तो साफ-साफ इशारा भारत की तरफ है.

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सहयोग बढ़ाने पर रहा जोर!

तीनों पक्षों ने चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग पर व्यापक रूप से विचारों का आदान-प्रदान किया और अच्छे पड़ोसी, समानता और आपसी विश्वास, खुलेपन और समावेशिता, आम विकास और साझा जीत सहयोग के सिद्धांतों के आधार पर त्रिपक्षीय सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की. त्रिपक्षीय सहयोग आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और लोगों की आजीविका में सुधार लाने पर केंद्रित है.

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तीनों पक्ष उद्योग, व्यापार, महासागरों, जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन, कृषि, मानव संसाधन, थिंक टैंक, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और युवा के क्षेत्रों में सहयोग परियोजनाओं को लागू करने पर सहमत हुए. तीनों पक्ष इस त्रिपक्षीय बैठक में बनी सहमति को लागू करने के लिए एक कार्य समूह का गठन करेंगे. तीनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग सच्चे बहुपक्षवाद और खुले क्षेत्रवाद का पालन करता है और किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करता है.

दक्षिण एशिया में तेजी बदल रही कूटनीति
फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि तीनों देशों के बीच हुई इस हालिया बैठक में किन-किन मुद्दों पर औपचारिक समझौते हुए हैं, लेकिन बातचीत का केंद्र बिंदु व्यापार और निवेश, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था, समुद्री विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और लोगों के बीच आपसी सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में त्रिपक्षीय साझेदारी को मज़बूत करना रहा. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. खासकर इस साल अप्रैल में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच 15 साल बाद फिर से उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हुई है.

भारत के खिलाफ रुख अपना रहे हैं यूनूस?
मौजूदा बातचीत ऐसे वक़्त में हो रही है जब ढाका की अंतरिम सरकार, जो नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनूस के नेतृत्व में है, पाकिस्तान को लेकर कुछ ज़्यादा ही नरम रुख अपनाती दिख रही है.

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पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते काफी तनावपूर्ण थे. लेकिन यूनूस अब भारत के खिलाफ आवाज़ उठाने लगे हैं — उन्होंने भारत की आलोचना करते हुए यह तक कह दिया कि हसीना को शरण देना गलत है, और उन्होंने औपचारिक रूप से भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी की है. हालांकि, भारत सरकार ने इस पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है.

यूनुस के चिकन नेक वाले बयान पर भारत ने भी कार्रवाई की थी 

भारत ने बीते अप्रैल 10 को अपने हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर "काफी भीड़ भाड़" का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश को उपलब्ध ट्रांस-शिपमेंट सुविधा समाप्त कर दी थी. 

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इस सेवा का इस्तेमाल करके बांग्लादेश भारतीय सीमा शुल्क (कस्टम) स्टेशनों का उपयोग करके तीसरे देशों को माल निर्यात करता था.

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि, "बांग्लादेश को दी गई ट्रांस-शिपमेंट सुविधा के कारण पिछले कुछ समय से हमारे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर काफी भीड़ भाड़ हो रही थी. लॉजिस्टिक्स में देरी और उच्च लागत के कारण हमारे अपने निर्यात में बाधा आ रही थी और बैकलॉग बन रहा था. इसलिए, यह सुविधा 8 अप्रैल से वापस ले ली गई है. हालांकि इसकी वजह से भारतीय क्षेत्र से होकर नेपाल या भूटान को बांग्लादेश के निर्यात को प्रभावित नहीं होने देंगे."

यह सुविधा जून 2020 में शुरू की गई थी और इसे वापस लेने का निर्णय वित्त मंत्रालय के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा लिया गया.

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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा 8 अप्रैल को जारी एक अधिसूचना में कहा गया है, "29 जून, 2020 के संशोधित प्रपत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया गया है. भारत में पहले से प्रवेश किए गए कार्गो को उस प्रपत्र में दी गई प्रक्रिया के अनुसार भारतीय क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति दी जा सकती है."

भारत द्वारा शुरू की गई इस सुविधा का उद्देश्य क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाना और भारत को एक ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उपयोग करके बांग्लादेश और तीसरे देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है.

यूनुस ने दिया था भारत विरोधी बयान

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यह कदम बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा हाल ही में चीन की अपनी यात्रा के दौरान दिए गए विवादास्पद बयानों के बाद उठाया गया.

बता दें कि इससे पहले मोहम्मद यूनुस ने बीजिंग में टिकाऊ बुनियादी ढांचे और ऊर्जा पर एक उच्च-स्तरीय गोलमेज चर्चा के दौरान कहा था, "भारत के सात राज्य, भारत का पूर्वी भाग, सात बहनें कहलाते हैं. वे भारत का एक लैंड लॉक एरिया हैं. उस एरिया के लिए समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. हम इस पूरे क्षेत्र के लिए समुद्र के एकमात्र संरक्षक हैं. इसलिए यह एक बड़ी संभावना को खोलता है. यह चीनी अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है."

दोनों देशों ने 2023 में चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के उपयोग के लिए समझौते को भी किया था, जो भारत को पूर्वोत्तर और मुख्य भूमि भारत के बीच ट्रांजिट कार्गो के लिए बांग्लादेश में इन बंदरगाहों की सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति देता है और परिवहन की लागत और समय को काफी कम करता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के मौके पर यूनुस के साथ अपनी बैठक के दौरान हिंदुओं सहित बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था.

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